
सातारा – सातारा क्रांति भूमि है । अब तक प्रत्येक क्रांति सातारा जिले से हुई है । छत्रपति शिवाजी महाराजजी ने सातारा के निकट पुणे में रायरेश्वर शिवमंदिर में शपथ लेकर ही हिंदवी स्वराज्य स्थापना का प्रारंभ किया । इसलिए सातारा के मंदिर विश्वस्त, पुजारी एवं प्रतिनिधियों को संगठितरूप से क्रांति करनी चाहिए और हिन्दुओं के मंदिरों को सरकार के चंगुल से मुक्त करवाना चाहिए, ऐसा आवाहन मंदिर महासंघ की ओर से सातारा में हुए महाराष्ट्र मंदिर न्यास जिला अधिवेशन में श्री. सुनील घनवट ने किया ।
वेदभवन मंगल कार्यालय में २० मार्च को संपन्न अधिवेशन का शुभारंभ सनातन संस्था की धर्मप्रचारक सद्गुरु स्वाती खाडये, धारेश्वर मठ के मठपति पू. नीळकंठ शिवाचार्य धारेश्वर महाराज, निवृत्त सहायक धर्मदाय आयुक्त श्री. दिलीप देशमुख, अधिवक्ता जनार्दन करपे, मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक, इसके साथ ही हिन्दू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र और छत्तीसगढ राज्य संगठक श्री. सुनील घनवट के हस्तों दीपप्रज्वलन से हुआ ।
इस अधिवेशन के लिए जिले से विविध मंदिरों के माध्यम से ३०० से भी अधिक विश्वस्त, प्रतिनिधि उपस्थित थे । तदुपरांत सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा भेजे संदेश का वाचन सनातन संस्था के श्री. मंगेश निकम ने किया । उपस्थितों का स्वागत और प्रस्तावना महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के सातारा जिलाध्यक्ष श्री. शिवाजीराव तुपे ने की ।
उपस्थित धर्माभिमानी
धर्म एवं संस्कृति जीवित रखने का कार्य मंदिरों के कारण ही हुआ है ! – सद्गुरु स्वाती खाडये, सनातन संस्था
मंदिर हिन्दू संस्कृति की धराेहर हैं । उन्हें जतन करना महत्त्वपूर्ण है । धर्म और संस्कृति की जीवित रखने का कार्य मंदिरों के कारण ही हुआ है । हिन्दू समाज का ‘जन्महिन्दू से कर्महिन्दू तक’ के मार्गक्रमण के लिए मंदिर अधिवेशन प्रभावी माध्यम है । मंदिर संस्कृति का देश के विकास में बडा हाथ है ।
उपस्थितों का मार्गदर्शन करते हुए निवृत्त सहधर्मादाय आयुक्त दिलीप देशमुख ने कानूनसंबंधी मार्गदर्शन कर, शंकानिरसन किया । धर्मादाय आयुक्त कार्यालय की प्रक्रियाओं के अभ्यासक सातारा के अधिवक्ता जनार्दन करपे ने न्यास पंंजीयन, इसके साथ ही मंदिरों को आनेवाली कार्यालयीन अडचनों के विषय में मार्गदर्शन किया । भुईज में श्री महालक्ष्मी मंदिर के विश्वस्त श्री. गजानन भोसले ने मंदिरों का सुव्यवस्थापन कैसे करना है ? इस विषय में जानकारी दी ।
मंदिर हिन्दुओं के प्रेरणास्रोत हैं ! – पू. नीळकंठ धारेश्वर महाराज, धारेश्वर मठ के मठपति
संविधान का मूल मठ-मंदिरों में है । यह विचार कर ही संविधान की निर्मिति हुई; परंतु इसकी अनदेखी कर मठ-मंदिर सरकार ने नियंत्रण में ले लिए हैं । मंदिर आर्थिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक परंपराएं संजोते हैं । इसलिए वे हिन्दुओं के प्रेरणास्रोत हैं ।
मंदिरों के माध्यम से हिन्दू युवकों को धर्मशिक्षा देना आवश्यक ! – ह.भ.प. कृष्णराव क्षीरसागर महाराज
मंदिर महासंघ के माध्यम से मंदिरों का संगठन उपक्रम अत्यंत प्रशंसनीय है । मंदिरों के संरक्षण के लिए संगठन होना आवश्यक है । मंदिरों के माध्यम से हिन्दू युवकों को संगठित कर, धर्मशिक्षा देना आवश्यक है ।








