मंदिर संस्कृति का संरक्षण केवल तभी संभव है जब मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाए!” — श्री श्री अभिनव शंकर भारती महाश्वामीजी, कुडलि श्रृंगेरि महासंस्थान

बेंगलुरु : “हमने धीरे-धीरे समाज, न्याय, परिवार और शिक्षा को सरकार के नियंत्रण में सौंप दिया है। जैसे-जैसे समाज सरकारी नियंत्रण में आता जा रहा है, यह निर्भरता की स्थिति तक पहुँच चुका है। धार्मिक सिद्धांतों पर आधारित जीवन जीकर हम समग्र विकास प्राप्त कर सकते हैं। केवल मंदिरों से सरकारी हस्तक्षेप को हटा कर ही समाज का प्रगति संभव है,” श्री आभिनव शंकर भारती महाश्वामीजी, कुडलि श्रृंगेरि महासंस्थान ने अपने मार्गदर्शन में उपस्थित लोगों से कहा।
दो दिवसीय ‘कर्नाटक राज्य द्वितीय मंदिर सम्मेलन,’ जो कर्नाटक मंदिर महासंघ और हिंदू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित किया गया था, बेंगलुरु के बासवेश्वर नगर स्थित गंगम्मा थिम्मैया कन्वेंशन हॉल में सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के दौरान ‘सनातन पंचांग एंड्रॉयड ऐप 2025’ का शुभारंभ किया गया। इस ऐप में दैनिक अपडेट्स, पंचांग विवरण, शुभ मुहूर्त, त्यौहार, आध्यात्मिक लेख, आयुर्वेद टिप्स और धर्म शिक्षा से संबंधित बहुमूल्य संसाधन उपलब्ध हैं। इसके बाद ‘आयुर्वेद अपनाएँ और बिना दवाओं के स्वस्थ रहें’ नामक ई-बुक का विमोचन किया गया।
“विश्व शांति केवल धर्म के पालन से ही संभव है!” — पूज्य सिद्धलिंग स्वामीजी

मंदिरों में वेद पाठ, सामूहिक प्रार्थनाएँ और यज्ञों जैसी गतिविधियाँ संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। धर्म वैश्विक शांति और मानवता के मूल्यों को बनाए रखता है, जिससे वैश्विक कल्याण संभव हो सकता है। ‘संसार हमारा घर है; सभी प्राणियों की सुख-शांति हो (लोकः समस्ताः सुखिनो भवन्तु)’ इस मन्त्र के तहत पूज्य सिद्धलिंग स्वामीजी (स्कंदेश्वर स्वामी मंदिर), ने धर्म की रक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।
“हिंदू संस्कृति के संरक्षण के लिए जागरूकता आवश्यक है!” — वेद ब्रह्म श्री इंद्राचार्य

हिंदू धार्मिक जागरूकता के महत्व को बताते हुए वेद ब्रह्म श्री इंद्राचार्य ने मंदिरों के माध्यम से हिंदू धर्म और संस्कृति के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।
“भारत में वक्फ बोर्ड क्यों है जबकि पाकिस्तान और बांगलादेश में सनातन बोर्ड क्यों नहीं है?” — श्री सुनील घनवट

मंदिरों की पवित्र भूमि को वक्फ बोर्ड द्वारा ज्वलंत कानूनों के माध्यम से हड़प लिया जा रहा है। वक्फ बोर्ड किसी भी भूमि, चाहे वह सार्वजनिक हो या निजी, पर नोटिस जारी करके दावा कर सकता है। केवल कर्नाटक में ही वक्फ बोर्ड ने लगभग 25,000 एकड़ भूमि पर दावा किया है, जबकि भारत भर में अवैध अधिग्रहण हो रहे हैं। देशभर में वक्फ बोर्ड के पास 9.5 लाख एकड़ भूमि का नियंत्रण है। श्री सुनील घनवत ने मंदिरों को वक्फ अतिक्रमण से बचाने के लिए मंदिरों के दस्तावेजों और अभिलेखों को अद्यतन और सुरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन के मुख्य अंश
इस अधिवेशन में 800 से अधिक मंदिर विश्वस्त शामिल हुए। प्रतिनिधियों ने धर्म शिक्षा कक्षाओं की शुरुआत, मंदिरों में धर्म शिक्षा बोर्ड की स्थापना, सरकारी हस्तक्षेप का विरोध, और मंदिर महासंघ के साथ सभी पहलुओं में सहयोग करने के बारे में चर्चा की। प्रतिभागियों ने निर्णय लिया कि महत्वपूर्ण निर्णयों को माननीय राज्य धर्म मंत्री को प्रस्तुत किया जाएगा और साथ ही इस प्रेस विज्ञप्ति की एक प्रति भी भेजी जाएगी।
मंदिर संस्कृति के संरक्षण के लिए बेंगलुरु में कर्नाटक राज्य के दूसरे मंदिर अधिवेशन का शुभारंभ
अब लड़ाई मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए – पू. देवकीनंदन ठाकुर

बेंगलुरु : अयोध्या में श्रीराम मंदिर बन गया है। जय श्रीराम का सपना पूरा हो गया है। अब क्या आप (हिंदू) मथुरा चलेंगे? क्या मथुरा में जन्मभूमि बनानी है या नहीं? ‘बहुत सह लिया, अब ना सहेंगे; हिंदू हक अब लेकर रहेंगे!’ इस प्रभावी नारे के साथ प्रसिद्ध कथावाचक पू. देवकीनंदन ठाकुर ने मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए हिंदुओं को आगे आने का आह्वान किया।

कर्नाटक राज्य के बेंगलुरु में ‘कर्नाटक मंदिर महासंघ’ और ‘हिंदू जनजागृति समिति’ द्वारा आयोजित दूसरे ‘कर्नाटक मंदिर अधिवेशन’ में उन्होंने यह बात कही। इस अवसर पर राज्यभर से मंदिर न्यासी, प्रतिनिधि, पुजारी और मंदिर संरक्षण के लिए लड़ने वाले वकील बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

इस दौरान पू. देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि, जिस तरह मुसलमानों के धार्मिक स्थलों की रक्षा के लिए वक्फ बोर्ड है, उसी प्रकार हिंदुओं के मंदिरों को मुक्त कर उनके प्रबंधन के लिए ‘सनातन बोर्ड’ बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि संस्कृति का संरक्षण करना है, तो मंदिरों की रक्षा करना अनिवार्य है, और यह तभी संभव है जब हिंदू एकजुट हों। उन्होंने उपस्थित लोगों से मंदिर संरक्षण के लिए लड़ाई में शामिल होने का आह्वान किया।
कर्नाटक राज्य के ‘गंगम्मा तिम्मय्या कन्वेंशन हॉल’, बसवेश्वरनगर, बेंगलुरु में मंदिर संस्कृति के संरक्षण के लिए मंदिर ट्रस्टियों के इस अधिवेशन का शुभारंभ शंखनाद से हुआ। इस अवसर पर पू. रामानंद गौड़ा, धर्मप्रचारक, सनातन संस्था; वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमिला नेसरगी, कर्नाटक उच्च न्यायालय; श्री. नंदकुमार, आईएएस, पूर्व आयुक्त, मुजराई विभाग, कर्नाटक सरकार; पद्मश्री श्री. आर. वी. गौरीशंकर, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, श्रृंगेरी महासंस्थान और श्री. सुनील घनवट, राष्ट्रीय संगठक, मंदिर महासंघ ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मान्यवरों के हाथों ‘रुग्ण की सेवा-शुश्रूषा साधना के रूप में कैसे करें?’ इस सनातन निर्मित कन्नड़ भाषा के लघु ग्रंथ का विमोचन किया गया।
भारतभर में मंदिर महासंघ के कार्य को हिंदू समाज से व्यापक समर्थन मिल रहा है। कर्नाटक राज्य के मंदिरों के संवर्धन और संरक्षण के लिए हिंदुओं को एकजुट होने का आह्वान कर्नाटक मंदिर महासंघ के संगठक श्री. मोहन गौड़ा ने किया।








