हर मंदिर के लिए सुरक्षा समिति स्थापित करने का ट्रस्टियों का दृढ निश्चय!

शिर्डी – श्री साई पालखी निवारा, शिर्डी में 24 और 25 दिसंबर को आयोजित तृतीय ‘महाराष्ट्र मंदिर न्यास परिषद’ के समापन पर हर मंदिर के लिए सुरक्षा समिति स्थापित करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। साथ ही मंदिरों की भूमि के अवैध हस्तांतरण को रोकने के लिए सरकार से ‘एंटी लैंड ग्रैबिंग’ कानून तुरंत लागू करने की मांग सहित कुल 10 प्रस्ताव ‘हर हर महादेव’ के जयघोष के साथ सर्वसम्मति से पारित किए गए। मंदिर महासंघ इन मांगों को लेकर जल्द ही माननीय मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा और इसके लिए राज्य के रोजगार गारंटी मंत्री श्री भरतशेठ गोगावले ने विशेष सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
इस परिषद में ‘श्री विघ्नहर गणपति देवस्थान ट्रस्ट’ के ट्रस्टी, पुणे के ग्रामदैवत श्री कसबा गणपति, भीमाशंकर देवस्थान, रांजणगांव और जेजुरी देवस्थान, श्रीक्षेत्र बेट कोपरगांव के राष्ट्रसंत जनार्दन स्वामी (मौनगिरीजी) महाराज समाधि मंदिर, अखिल भारतीय पुरोहित महासंघ के प्रतिनिधि, श्री तुलजाभवानी पुजारी मंडल, संत पीठ के प्रतिनिधि और राज्यभर से 875 से अधिक मंदिर ट्रस्टी प्रतिनिधि उपस्थित थे। सभी ने आगे एक आदर्श मंदिर संगठन महाराष्ट्र में स्थापित करने का संकल्प लिया।
सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव
मंदिरों और उनकी भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ हर सप्ताह सामूहिक आरती का आयोजन। काशी और मथुरा तीर्थ क्षेत्रों के मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाना। राज्य सरकार से सभी मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर उन्हें भक्तों को सौंपना। मंदिरों में भक्तों द्वारा अर्पित धन का उपयोग विकास कार्यों के लिए न करने की सरकार से घोषणा। धर्मादाय आयुक्त कार्यालय द्वारा मंदिरों से दान के लिए भेजे जा रहे अवैध आदेशों को रोकने और मंदिरों के धन का उपयोग केवल धार्मिक कार्यों के लिए करने की सलाह देना। महाराष्ट्र के पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए बजट में विशेष प्रावधान। तीर्थ क्षेत्रों, श्री क्षेत्रों और किलों पर बने मंदिरों से अतिक्रमण हटाने के लिए सर्वेक्षण और कार्रवाई। ‘क’ श्रेणी के मंदिरों को ‘ब’ श्रेणी में प्रमोट करने के लिए दस्तावेजों के आधार पर त्वरित कार्यवाही। मंदिर परिसरों को शराब और मांस मुक्त क्षेत्र घोषित करने के लिए अधिसूचना जारी करना। राज्य के मंदिर पुजारियों को मासिक मानदेय देने का निर्णय।
मंदिरों की समस्याओं पर चर्चा
दो दिवसीय परिषद में मंदिरों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और समूह चर्चाएं आयोजित की गईं। इनमें ‘मंदिरों को सनातन धर्म प्रचार का केंद्र बनाना’, ‘वक्फ कानून द्वारा मंदिर भूमि पर अतिक्रमण और समाधान’, ‘मंदिरों में वेशभूषा संहिता’ और ‘धर्मादाय आयुक्त कार्यालय और मंदिरों का समन्वय’ जैसे विषय शामिल थे। इन्हीं चर्चाओं के आधार पर उपरोक्त प्रस्ताव पारित किए गए।
26 दिसंबर
शिर्डी में तृतीय ‘महाराष्ट्र मंदिर न्यास परिषद’ में 875 से अधिक मंदिर प्रतिनिधियों की उपस्थिति
मंदिर और मंदिर की जमीनों पर अतिक्रमण के विरोध में संघर्ष को और तीव्र कर ‘मंदिर जहां, आरती वहां’ का संकल्प!

शिर्डी – राज्य के 108 मंदिरों में हिंदू धर्म और संस्कृति की जानकारी देने वाले धर्मशिक्षा बोर्ड लगाने, 100 से अधिक मंदिरों में ड्रेस कोड लागू करने, मंदिरों में बाल संस्कार वर्ग शुरू करने सहित मंदिरों और उनकी जमीनों पर हुए अतिक्रमण के विरोध में संघर्ष को और तीव्र करते हुए ‘मंदिर जहां, आरती वहां’ का संकल्प ‘महाराष्ट्र मंदिर न्यास परिषद’ के दूसरे दिन समस्त मंदिर ट्रस्टियों और प्रतिनिधियों ने लिया। श्री साई पालखी निवारा, निमगांव, शिर्डी में आयोजित तृतीय ‘महाराष्ट्र मंदिर न्यास परिषद’ में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से 875 से अधिक आमंत्रित मंदिर ट्रस्टियों, प्रतिनिधियों, पुरोहितों, मंदिरों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले अधिवक्ताओं और मंदिर विशेषज्ञों ने भाग लिया।

मंदिर परिसर में केवल हिंदुओं को व्यापार की अनुमति दें! – श्री सुनील घनवट, मंदिर महासंघ

वक्फ बोर्ड के माध्यम से अहिंदुओं ने मंदिरों पर और मंदिरों की जमीनों पर अतिक्रमण किया है। कई जगहों पर हिंदुओं को अपने मंदिरों और भूमि से हाथ धोना पड़ा है। इसका सामना करते हुए वक्फ कानून में केवल संशोधन नहीं, बल्कि इसे पूरी तरह से रद्द करने की मांग हमने मंदिर महासंघ की ओर से केंद्र सरकार से की है। जो लोग हिंदू देवी-देवताओं को नहीं मानते, वे मंदिर परिसरों में दुकानें लगाते हैं और प्रसाद, फूल आदि बेचते हैं। इतना ही नहीं, वे इस प्रक्रिया में थूक का उपयोग करके ‘थूक जिहाद’ करते हैं। आगे से, जब भी गांव का मेला या उत्सव हो, तो यह सुनिश्चित करें कि वहां अन्य धर्मों की दुकानें न लगें। वर्तमान में अखाड़ा परिषद और संतों ने इस वर्ष के प्रयागराज कुंभ मेले में केवल हिंदुओं को व्यापार करने की अनुमति देने का निर्णय लिया है, जो अत्यंत सराहनीय है, ऐसा मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री सुनील घनवट ने कहा।
मंदिर परिसर में केवल हिंदू व्यापारियों को ‘ओम प्रमाणपत्र’, और हिंदू कामगारों के लिए ‘हिंदू वर्क फोर्स’ का निर्माण! – श्री रणजीत सावरकर

आज ‘हलाल’ प्रमाणपत्र के माध्यम से कट्टरपंथीओं का नेटवर्क फैलाने की कोशिश हो रही है। इसके जवाब में स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक ने ‘ओम प्रमाणपत्र’ की शुरुआत की है। यह प्रमाणपत्र मंदिर सहित प्रत्येक हिंदू व्यापारी के लिए अनिवार्य होना चाहिए। आने वाले समय में, हर मंदिर में काम के लिए केवल हिंदू कामगार मिलें, इसके लिए हम जल्द ही ‘हिंदू वर्क फोर्स’ का निर्माण करेंगे। इसमें केवल हिंदुओं को नौकरी दी जाएगी, ऐसा स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के कार्याध्यक्ष श्री रणजीत सावरकर ने कहा।
इस अवसर पर ‘अखिल भारतीय संत समिति’ के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष अनिकेतशास्त्री देशपांडे ने कहा , ‘‘जैसे हलाल प्रमाणपत्र है, वैसे ही अब हिंदुओं को ‘ओम प्रमाणपत्र’ लेने और केवल वहीं से सामान खरीदने की शुरुआत करनी चाहिए।’’ नासिक स्थित श्री कालाराम मंदिर के पुजारी महंत सुधीरदास महाराज ने कहा , ‘‘संविधान ने सभी को समान अधिकार दिए हैं, और वे तय कर सकते हैं कि किससे सामान खरीदना है और किससे नहीं। इसलिए हिंदुओं को विशेष रूप से प्रसाद हिंदू विक्रेताओं से ही खरीदने का निर्णय लेना चाहिए।’’
मंदिर सदस्य पंजीकरण और सोशल मीडिया सेल की शुरुआत!

इस परिषद में मंदिर महासंघ की सदस्यता पंजीकरण की शुरुआत की गई, साथ ही मंदिर महासंघ के ‘फेसबुक पेज’, ‘इंस्टाग्राम’ और ‘एक्स’ (ट्विटर) के खाते का शुभारंभ सनातन संस्था की धर्मप्रचारक सद्गुरु स्वाति खाडये; तारकेश्वर गढ के मठाधिपति पूज्य आदिनाथशास्त्री; मल्हारा, अचलपुर के श्री धरमाल संस्थान के महंत देवरावबाबा; संजीवनी गढ के पूज्य शंकर महाराज महंत; पुणे के ‘ओम जय शंकर आध्यात्मिक प्रतिष्ठान’ मठ के परम पूज्य पप्पाजी पुराणिक महाराज की वंदनीय उपस्थिति में हुआ। इसके लिए एक ‘क्यूआर कोड’ दिया गया है, जिससे सीधे पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही ‘सनातन पंचांग 2025’ के एंड्रॉयड (Android) और आईओएस (iOS) ऐप का उद्घाटन भी किया गया।

इस अवसर पर ‘ग्लोबल महानुभाव संघ’ के महाराष्ट्र राज्य उपाध्यक्ष पूज्य सुदर्शन महाराज कपाटे ने कहा , ‘‘हिंदू धार्मिक स्थलों पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए हिंदुओं का एकजुट होना आवश्यक है। सनातन हिंदू धर्म के हर मंदिर को अपना मानने का भाव हिंदुओं में जाग्रत होगा, तभी हिंदू मंदिरों पर हो रहे अतिक्रमण का प्रतिकार किया जा सकेगा। अहिंदू दिन में 5 बार एकत्र होते हैं, तो हिंदुओं को भी कम से कम दिन में एक बार तो एकजुट होना चाहिए। मंदिरों की रक्षा के लिए मंदिर परिषद कार्यरत है; लेकिन इस कार्य में हर हिंदू को योगदान देना चाहिए।’’

इस अवसर पर यवतमाल के भाजपा उपाध्यक्ष श्री. रवि ज्ञानचंदानी ने कहा, ‘‘महाआरती परिवार संगठन के माध्यम से हर मंदिर में हर सप्ताह हनुमान चालीसा पाठ का सार्वजनिक कार्यक्रम हमने प्रारंभ किया है। जलगांव जिले के पूसद क्षेत्र में प्रतिदिन 25 मंदिरों में एक साथ सुबह 6 बजे हनुमान चालीसा पाठ का कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है।’’
श्री तुलजाभवानी मंदिर में भ्रष्टाचार के विरुद्ध न्यायिक लड़ाई लड़ने वाले अधिवक्ता संजीव देशपांडे का सत्कार!
तुलजापुर स्थित श्री भवानी देवी मंदिर में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के विरुद्ध नि:शुल्क और सफल लड़ाई लड़ने वाले छत्रपति संभाजीनगर के अधिवक्ता संजीव देशपांडे का महाराष्ट्र मंदिर न्यास परिषद में सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री अभय वर्तक ने शॉल, श्रीफल और पुष्पगुच्छ देकर सत्कार किया। इस अवसर पर श्री तुलजाभवानी मंदिर में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई के प्रारंभिक चरण से जुड़े हिंदू विधिज्ञ परिषद के संस्थापक सदस्य पूज्य अधिवक्ता सुरेश कुलकर्णी की उपस्थिति रही। हिंदू जनजागृति समिति की ओर से यह कानूनी लड़ाई जारी है।
उपस्थित मान्यवर : अखिल भारतीय पुरोहित महासंघ के अध्यक्ष श्री सतीश शुक्ल, सनातन संस्था की धर्मप्रचारक सद्गुरु स्वाति खाडये, श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग देवस्थान के श्री मधुकर अण्णा गवांदे, श्रीगोंदा अहिल्यानगर के श्रीराम देवस्थान के हरिभक्तपरायण नाना महाराज शिपलकर, अहिल्यानगर के श्रीकृष्ण मंदिर की प्रमुख हरिभक्तपरायण प्रभाताई भोंग, भक्ति प्रसाद आश्रम के हरिभक्तपरायण संदीप महाराज पिसे, श्री तुलजाभवानी माता मंदिर सिद्ध गरीबनाथ मठ के महंत मावजीनाथ महाराज, ज्ञानदर्शन गुरुकुल श्रीक्षेत्र हनुमानगढ के अध्यक्ष महंत हरिभक्तपरायण अभिमन्यु महाराज खाडे, शिरापुर के श्रीराम मंदिर के हरिभक्तपरायण घनश्याम महाराज शिंदे, श्री तुलजाभवानी पुजारी मंडल के पूर्व अध्यक्ष श्री किशोर गंगणे उपस्थित रहे।
२४ दिसंबर
शिर्डी में 750 से अधिक मंदिर प्रतिनिधियों की उपस्थिति में तीसरे ‘महाराष्ट्र मंदिर न्यास परिषद’ का शुभारंभ
अन्य धर्मों के प्रार्थना स्थल सरकार के अधीन नहीं हैं, तो हिंदुओं के मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करो! – पू. रामगिरी महाराज, अहिल्यानगर

शिर्डी – प्रतिकूल परिस्थितियों में संतों ने मंदिरों की संस्कृति को बनाए रखा। वर्तमान स्थिति में हिंदू केवल तीर्थक्षेत्र जाते हैं; लेकिन अगर उन तीर्थक्षेत्रों की पवित्रता नष्ट हो रही है, तो वे उस पर ध्यान नहीं देते हैं। अध्यात्म हमारे श्वास और रक्त के प्रत्येक बूंद में होना चाहिए। अगर हिंदू धर्म के बारे में निष्क्रिय रहे, तो भविष्य में जीना कठिन होगा। भारत में एक भी मस्जिद या चर्च को सरकार ने अपने अधीन नहीं लिया है, जबकि करोड़ों रुपये के लेनदेन होते हुए भी। अन्य धर्मों के प्रार्थना स्थल सरकार के अधीन नहीं हैं, लेकिन हिंदुओं के मंदिर ही क्यों सरकार के अधीन हैं? इसलिए अब हिंदुओं के मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाना चाहिए, यह मांग अहिल्यानगर के सद्गुरु गंगागिरी महाराज संस्थान के मठाधिपति पू. रामगिरी महाराज ने की। महाराष्ट्र मंदिर महासंघ, विरार के श्री जीवदानी देवी संस्थान, श्री ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर देवस्थान, श्री साई पालखी निवारा और हिंदू जनजागृति समिति के संयुक्त तत्वावधान में श्री साई पालखी निवारा, शिर्डी में आयोजित तीसरे ‘महाराष्ट्र मंदिर न्यास परिषद’ के पहले दिन वे बोल रहे थे। इस परिषद में पूरे महाराष्ट्र से 750 से अधिक आमंत्रित मंदिरों के विश्वस्त, प्रतिनिधि, पुरोहित, मंदिरों के संरक्षण के लिए लडने वाले वकील, अध्येता आदि शामिल हुए हैं।
परिषद का शुभारंभ श्रीक्षेत्र बेट कोपरगांव के राष्ट्रसंत जनार्दन स्वामी (मौनगिरीजी) महाराज समाधि मंदिर के पू. रमेशगिरी महाराज, कोपरगांव के श्रीक्षेत्र राघवेश्वर देवस्थान के मठाधिपति पू. राघवेश्वरानंदगिरी महाराज, सनातन संस्थान के सद्गुरु सत्यवान कदम, मुंबई के समस्त महाजन संघ के अध्यक्ष श्री. गिरीष शहा, श्री जीवदानी देवी संस्थान के अध्यक्ष श्री. प्रदीप तेंडोलकर और मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री. सुनील घनवट के हाथों दीप प्रज्वलन करके किया गया। इसके बाद सनातन संस्थान के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले द्वारा दिए गए संदेश को सद्गुरु सत्यवान कदम ने पढा। उन्होंने अपने संदेश में कहा, भारत में सच्चे अर्थों में रामराज्य लाना है, तो प्रत्येक मंदिर को राष्ट्र और धर्म के संरक्षण के लिए आवश्यक मंदिर संस्कृति का पुनरुद्धार करना अनिवार्य है।

उपस्थित लोगों का स्वागत श्री. प्रदीप तेंडोलकर ने किया। इस अवसर पर श्री. तेंडोलकर ने कहा, मंदिरों का संरक्षण भगवान का काम है। इसलिए इस काम के लिए ईश्वर ने ही हमें एक साथ लाया है। महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के माध्यम से पिछले 3 वर्षों में हुए कार्य निश्चित रूप से उल्लेखनीय हैं। इस परिषद के माध्यम से सभी विश्वस्तों को एक मंच प्राप्त हुआ है। मंदिर महासंघ का कार्यात्मक आकलन महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री. सुनील घनवट ने प्रस्तुत किया। इस दौरान श्री. घनवट ने आगे कहा कि, लोकसभा चुनाव में कट्टरपंथीओं ने अपनी रणनीति मस्जिदों में तय की। मतदान किसे करना है, इसके लिए फतवे जारी किए गए, तो फिर हिंदू धर्म और राष्ट्र के बारे में रणनीति मंदिरों में क्यों नहीं तय की जाए? इस परिषद में एकत्रित हुए हजारों विश्वस्तों ने सड़क पर उतरकर मंदिरों को सरकारीकरण से मुक्त करने की मांग की, तो सरकार को मंदिरों को सरकारीकरण से मुक्त करना ही होगा। इस तरह प्रत्येक विश्वस्त ने ‘अपने मंदिर से हिंदू संगठन कैसे किया जा सकता है?’, इस पर विचार करके कार्य किया, तो भविष्य में हिंदुओं को सुरक्षा देने का काम भी मंदिरों द्वारा किया जा सकता है।
मंदिरों से ही संस्कार किए जाएंगे, तभी राष्ट्रप्रेमी पीढी का निर्माण होगा! – श्री. गिरीष शहा

एक महीने पहले मैं अबुधाबी में श्री स्वामीनारायण मंदिर देखने गया था। वहां की व्यवस्था बहुत अच्छी थी। रोजाना 10 से 20 हजार यात्री दर्शन करने आते हैं, साथ ही वहां आकर संस्कार और संस्कृति के बारे में ज्ञानवर्धन भी होता था। वास्तव में यह ज्ञान हमारे पास पहले से ही है। नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालयों की पुस्तकें, हमारे वेद, योग, न्याय प्रणाली, गणित, आयुर्वेद ये सभी हमारी मंदिर संस्कृति से उत्पन्न हुए हैं। भारतीय संस्कृति में पहले से ही हिंदुओं के मंदिर गुरुकुल थे। शिक्षण पद्धति थी। वर्तमान स्थिति क्या है? केवल मंदिर हमारा है। इसके आसपास ऐसा कुछ नहीं है। हमें इससे बाहर निकलना होगा। मंदिर में 16 में से 15 संस्कार करने की व्यवस्था होनी चाहिए। अगर गर्भाधान संस्कार जैसे संस्कार मंदिर में हुए, तो आने वाली पीढी राष्ट्रप्रेमी होगी, यह समस्त मुंबई के समस्त महाजन संघ के अध्यक्ष श्री. गिरीष शहा ने कहा।
मंदिरों का संरक्षण प्रत्येक हिंदू का सामूहिक दायित्व है! – प.पू. रमेशगिरी महाराज, कोपरगांव

वर्तमान स्थिति में मठ, मंदिर, देवस्थान के उचित प्रबंधन और उनके संरक्षण के लिए महाराष्ट्र मंदिर न्यास परिषद का आयोजन किया गया है। सनातन संस्था भी इसके लिए कार्यरत है। सभी हिंदुओं को स्वयं को सीमित सोच छोड़ देनी चाहिए। मंदिर हिंदुओं के सामूहिक उपासना केंद्र हैं। भजन, नामजप, प्रार्थना के माध्यम से मंदिरों में सामूहिक उपासना की जाती है। ऐसे मंदिरों का विनाश होना हिंदू धर्म पर हमला है। इसलिए मंदिरों के संरक्षण के लिए सभी हिंदुओं को एकजुट होकर सनातन संस्कृति का झंडा फहराना चाहिए, यह आह्वान श्रीक्षेत्र बेट कोपरगांव के राष्ट्रसंत जनार्दन स्वामी (मौनगिरीजी) महाराज समाधि मंदिर के पू. रमेशगिरी महाराज ने इस दौरान किया।
मंदिर अभ्यासक श्री. संदीप सिंह ने कहा, मंदिर यह कमाई का साधन नहीं है, बल्कि यह भक्ती का केंद्र है, यह समझना आवश्यक है। मंदिर हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ है। दुनिया भर में कई औद्योगिक शहर अब खत्म हो रहे हैं; इसके विपरीत भारत में उज्जैन, पाटलीपुत्र, रामेश्वरम, काशी जैसी तीर्थस्थल वाली शहरें हजारों सालों से जीवित हैं; क्योंकि ये सभी मंदिरों की अर्थव्यवस्था पर निर्भर थीं। इस देश की अर्थव्यवस्था मंदिरों के कारण खड़ी है।
धर्मशिक्षा के साथ धर्मरक्षण का कार्य भी मंदिरों को करना चाहिए! – सद्गुरु स्वाती खाडये

सद्गुरु स्वाती खाडये, सनातन संस्था मंदिरों के माध्यम से हिंदू समाज का जन्महिंदु से कर्महिंदु में रूपांतरण करना एक महान कार्य था। मंदिर हिंदू धर्म की आधारशिला हैं। इसलिए धर्मरक्षण के संदर्भ में मंदिरों से उनके सामर्थ्यानुसार कुछ कदम उठाए जाने चाहिए। यह आधारशिला तभी सच्चे अर्थ में होगी, जब मंदिरों से धर्मरक्षण के संदर्भ में ठोस कदम उठाए जाएंगे और जागरूकता फैलाई जाएगी। भविष्य में अगर मंदिरों को धर्मशिक्षा का केंद्र बनाना है, तो धर्मशिक्षा के साथ धर्मरक्षण का कार्य भी साथ-साथ लेना जरूरी है, ऐसा आह्वान इस अवसर पर सनातन संस्था की सद्गुरु स्वाती खाडये ने किया।
प्रमुख उपस्थिती : मुंबई में स्वतंत्ऱ्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के कार्याध्यक्ष श्री. रणजीत सावरकर, शिर्डी निर्वाचन क्षेत्र के सांसद श्री. भाऊसाहेब वाघचौरे, श्री ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर देवस्थान के वकील श्री सुरेश कौदरे, पूर्व धर्मादाय आयुक्त श्री दिलीप देशमुख, ओझर के श्री विघ्नहर गणपति देवस्थान ट्रस्ट के उपाध्यक्ष श्री. तुषार कवड़े, व्यवस्थापक श्री. अशोक देवराम घेगडे, जेजुरी के विश्वस्त श्री. राजेंद्र खेडे, पुणे के ग्रामदैवत श्री कसबा गणपति की सौ. संगिताताई ठकार और रांजणगाव के विश्वस्त श्री. तुषार पाटील।
इस अवसर पर शिर्डी निर्वाचन क्षेत्र के सांसद श्री. भाऊसाहेब वाघचौरे ने कहा , पिछले कुछ वर्षों में मैंने 550 से अधिक मंदिरों का जीर्णोद्धार किया है और भविष्य में अन्य मंदिरों का भी जीर्णोद्धार करने का निर्णय लिया है।
परिषद में विशेष घटनाएँ : शिर्डी के पास पुणतांबा में श्री महादेव मंदिर में मूर्तियों की अपमानजनक घटना घटी है। इस घटना की मंदिर परिषद में निंदा की गई और आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग राज्य सरकार से की गई।








