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हिन्दू जनजागृति समिति के ज्ञापन के बाद आंध्र प्रदेश सरकार का आदेश, ‘आंध्र प्रदेश के मंदिरों के भूमि का घरों के निर्माण हेतु बलपूर्वक अधिग्रहण न किया जाए !’

हिन्दू जनजागृति समिति ने सरकार को याद दिलाया हैदराबाद न्यायालय का आदेश, ‘मंदिर की भूमि सरकारी योजनाआें हेतु अधिग्रहित करना अनुचित !’

ख्रिस्ती मुख्यमंत्री होनेवाले आंध्र प्रदेश में हिन्दू मंदिरों की दानपेटी को लूटने के साथ-साथ उनकी भूमि को हडपने का प्रयास होना, इसमें आश्‍चर्य कैसा ? सरकार की इस हिन्दूविरोधी कार्रवाईयों को देखते हुए आंध्र प्रदेश की सरकार ने हिन्दुआें के विरुद्ध धर्मयुद्ध घोषित किया है, क्या ऐसा समझें ?

देश के अन्य किसी राज्य में ऐसी घटनाएं होती हों, तो हिन्दू संगठनों को उस संदर्भ में संबंधित राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित कर उसे रोकने का प्रयास करना चाहिए !

अमरावती (आंध्र प्रदेश) : हिन्दू मंदिरों की स्वामित्ववाली भूमियों को बलपूर्वक अधिग्रहित कर उनपर घर और अन्य व्यावसायिक दुकानों का निर्माण करने की गतिविधियां चल रही है। उससे मंदिरों की पवित्रता तो भंग होती ही है, साथ ही श्रद्धालुआें की सुविधा हेतु निर्माणाधीन भविष्य के निर्माणकार्यों में भी बाधाएं उत्पन्न होती हैं। अतः ऐसे कृत्य तुरंत बंद करने चाहिए। हिन्दू जनजागृति समिति के आंध्र प्रदेश समन्वयक श्री. चेतन गाडी ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर यह मांग की थी। इस मांग का संज्ञान लेकर राज्य के धर्मादाय विभाग के विशेष सचिव ने २१ अगस्त २०१९ को एक बैठक में यह आदेश दिया कि प्रशासनिक अधिकारी हिन्दू मंदिरों के स्वामित्ववाली भूमी का घर और अन्य व्यावसायिक दुकानों के निर्माण हेतु बलपूर्वक अधिग्रहण न करे और जबतक मंदिर व्यवस्थापन, न्यासी इत्यादि लोग किसी मंदिर की भूमि बिनाउपयोगवाली है, ऐसा घोषित कर उसकी नीलामी करनेवाले हों, तभी प्रशासनिक अधिकारी इस नीलामी में भाग लेकर भूमि का अधिग्रहण कर सकते हैं।

वर्ष २००६ में हैदराबाद न्यायालय का आदेश

हिन्दू जनजागृति समिति यदि सरकार को इस आदेश का स्मरण दिलाकर विरोध नहीं करती, तो सरकार इस आदेश को ताक पर बिठाकर हिन्दू मंदिरों की भूमि का अधिग्रहण करती, इसे ध्यान में लें ! – सम्पादक, दैनिक सनातन प्रभात

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने २५ लाख लोगों के घरों का निर्माण करने की घोषणा की थी। इस योजना के लिए उन्होंने मंदिरों की भूमि को कुछ वर्षों के लिए किराएपर (लीज) मांगी थी। (ईसाई मुख्यमंत्री रेड्डी ने चर्च अथवा मस्जिद की भूमियों को किराएपर लेने का आदेश क्यों नहीं दिया ?  इससे उनका हिन्दूद्वेष उजागर होता है ! – सम्पादक, दैनिक सनातन प्रभात) इसके लिए उन्होंने प्रशासन को नोटिस जारी कर प्रत्येक जिले में विद्यमान मंदिरों की भूमियों की जानकारी एकत्रित करने के लिए कहा था।

मुख्य सचिव के माध्यम से सभी जिलाधिकारियें को यह नोटिस भेजा गया था। हिन्दू जनजागृति समिति को इसकी जानकारी मिलनेपर समिति ने धर्मादाय विभाग को ज्ञापन प्रस्तुत किया था। इस ज्ञापन के साथ समिति ने वर्ष २००६ में हैदराबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए सरकारी योजनाआें के लिए मंदिरों की भूमि का उपयोग करना अनुचित है, इस आदेश की प्रति जोड दी थी। उसके पश्‍चात धर्मादाय विभाग ने बैठक कर उक्त आदेश दिया।

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