पुरातत्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर मामला दर्ज किया जाए! – हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों की मांग
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श्री महालक्ष्मी देवी मंदिर में पानी का रिसाव
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कई छोटी-छोटी मूर्तियों के अंग क्षतिग्रस्त

कोल्हापुर : ‘श्री महालक्ष्मी देवी विकास योजना’ के अंतर्गत चल रहे कार्यों को लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय में जिला प्रशासन, मंदिर प्रशासन, पुरातत्व विभाग, जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने पुरातत्व विभाग के कार्यों पर तीव्र नाराजगी व्यक्त करते हुए विभाग के सहायक निदेशक विलास वहाणे सहित सभी जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की।
बैठक के दौरान विलास वहाणे तथा कार्य के लिए नियुक्त निजी संस्था के अधिकारियों ने संतोषजनक उत्तर देने के बजाय टालमटोल का रवैया अपनाया।
जिलाधिकारी एवं पश्चिम महाराष्ट्र देवस्थान प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. विजय राठौड़ ने सभी पक्षों की बातें सुनने के बाद कहा कि प्रशासनिक स्तर पर हुई गलतियों की पुनरावृत्ति नहीं होने दी जाएगी। अब तक हुए कार्यों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का उचित निर्णय लिया जाएगा।

शिवसेना विधायक राजेश क्षीरसागर ने कहा कि हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों की भावनाएं उचित हैं और मंदिर का कार्य पूरी तरह सही तरीके से होना चाहिए। मंदिर में हुए नुकसान की जांच होनी चाहिए तथा जहां विशेषज्ञों की आवश्यकता है, वहां विशेषज्ञों की नियुक्ति की जानी चाहिए। उन्होंने मंदिर में पानी के रिसाव को गंभीर लापरवाही बताते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी घटनाएं स्वीकार नहीं की जाएंगी।

बैठक में हिंदू जनजागृति समिति, हिंदू एकता आंदोलन, शिवसेना, हिंदू महासभा, विश्व हिंदू परिषद, मंदिर महासंघ, श्री महालक्ष्मी मंदिर के पुजारी, देवस्थान के पदाधिकारी तथा विभिन्न सामाजिक एवं हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे
- मंदिर की सफाई के दौरान सैंड ब्लास्टिंग तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे कई छोटी मूर्तियों के कान, नाक, आंखें और अन्य अंग टूट गए तथा अनेक मूर्तियां पूरी तरह घिस गईं।
- पिछले महीने मंदिर का स्वर्ण कलश बिना किसी धार्मिक विधि, शंकराचार्य अथवा अन्य धार्मिक आचार्यों की उपस्थिति के जल्दबाजी में स्थापित किया गया।
- मंदिर परिसर का प्राचीन फव्वारा (कारंजा) एक ही रात में तोड़ दिया गया, लेकिन मंदिर समिति इसकी संतोषजनक जानकारी नहीं दे सकी।
- मंदिर परिसर में पत्थरों की सफाई के दौरान अनुमति के बिना ब्रेकर मशीन का उपयोग किया गया तथा मातृलिंग मंदिर में मजदूरों के ठहरने जैसे कई अनुचित कार्य सामने आए।
- संरक्षण के दौरान मंदिर की मूर्तियों को सुरक्षित रखने के बजाय बोरियों में भरकर रखा गया।
- गरुड़ मंडप का कार्य पिछले तीन वर्षों से अधूरा है और बार-बार इसकी समय-सीमा बढ़ाई जा रही है।
विलास वहाणे के खिलाफ तीव्र नाराजगी
बैठक समाप्त होने के बाद पुरातत्व विभाग के सहायक निदेशक विलास वहाणे को हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा।
‘महाराजा प्रतिष्ठान’ के संस्थापक निरंजन शिंदे तथा ‘मराठा तितुका मेळवावा’ के योगेश केरकर ने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में मंदिरों तथा किलों को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि विशाळगढ़ सहित कई मंदिरों के संरक्षण कार्य प्रभावित हुए हैं और श्री महालक्ष्मी मंदिर की वर्तमान स्थिति के लिए भी विलास वहाणे जिम्मेदार हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनके विरुद्ध मामला दर्ज नहीं किया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने यह भी मांग की कि पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तेजस गर्गे तथा सहायक निदेशक विलास वहाणे से यह कार्य तत्काल वापस लिया जाए। उनका आरोप था कि विलास वहाणे कभी जानकारी देने के लिए उपलब्ध नहीं रहते और विभाग की सभी त्रुटियों के लिए वही जिम्मेदार हैं।
महालक्ष्मी देवी की मूर्ति के संरक्षण में गंभीर लापरवाही – अधिवक्ता प्रसन्न मालेकर
मूर्ति विशेषज्ञ अधिवक्ता प्रसन्न मालेकर ने कहा कि देवी की मूर्ति के संरक्षण कार्य में धार्मिक परंपराओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष में दो-दो बार मूर्ति पर वज्रलेप करने के लिए प्राण-प्रतिष्ठा संबंधी प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जबकि यदि मूर्ति की स्थिति अच्छी है तो इसकी आवश्यकता क्यों पड़ रही है? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई बार अमावस्या के दिन भी यह प्रक्रिया की गई तथा स्वर्ण कलश की स्थापना बिना शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि के की गई। उन्होंने श्री ज्योतिबा देवस्थान में चल रहे संरक्षण कार्यों की भी स्वतंत्र समीक्षा की मांग की।
मनकर्णिका कुंड श्रद्धालुओं के लिए जल्द खोला जाए – शिवानंद स्वामी
हिंदू जनजागृति समिति के शिवानंद स्वामी ने कहा कि अत्यंत प्राचीन एवं पवित्र मनकर्णिका कुंड को बंद कर उसके ऊपर शौचालय बनाना अनुचित था। उन्होंने कहा कि कुंड को पुनः खोलने का कार्य कई वर्षों से लंबित है और इसे शीघ्र पूरा कर श्रद्धालुओं के लिए खोला जाना चाहिए।








