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‘वारकरी महाअधिवेशन’ : वारकरी संप्रदाय और हिंदू धर्म के बीच फूट डालने की षडयंत्र करने वालों के विरुद्ध संगठित होने का संकल्प!

पंढरपुर: वारकरी संप्रदाय महाराष्ट्र की रीढ़ है और महाराष्ट्र को जोड़ने की शक्ति इस संप्रदाय में है। कुछ धर्मनिरपेक्ष, वामपंथी और प्रगतिशील लोग इसे कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। वारकरी संप्रदाय सर्वसमावेशी है और उसने समय-समय पर समाज को दिशा देने का कार्य किया है। धर्मनिष्ठ वारकरी संप्रदाय में वारकरी और हिंदू धर्म को अलग-अलग दर्शाने का षड्यंत्र चल रहा है। वारकरी महाअधिवेशन में वारकरी संप्रदाय और हिंदू धर्म में फूट डालने की षडयंत्र रचने वालों के विरुद्ध संगठित होने का संकल्प लिया गया।

वारकरियों के विभिन्न मुद्दों के लिए 25 जुलाई को सद्गुरु श्री गंगागिरी महाराज मठ में वारकरी महाअधिवेशन आयोजित किया गया था, जिसमें यह संकल्प व्यक्त किया गया। ‘श्री क्षेत्र गोदावरी धाम बेट सरला’ के महंत गुरुवर्य परम पूज्य रामगिरी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित इस अधिवेशन में 1000 से अधिक वारकरी श्रद्धालु उपस्थित थे।

इस अधिवेशन में वारकरी संप्रदाय में हिंदुत्व के लिए कार्य करने वाले वारकरी महाराज और पूजनीय संतों को ‘घुसपैठिया’ कहकर उनका अपमान करने वाले तथाकथित आधुनिकतावादी लोगों की कड़ी निंदा की गई। साथ ही, हिंदुत्वनिष्ठों और संतों का सार्वजनिक रूप से ज्ञानेश्वर माऊली की मूर्तियां भेट देकर सम्मान किया गया। इस अवसर पर इंचगिरी मठ के मठाधीश सुदर्शन महाराज, राष्ट्रीय वारकरी परिषद के ह.भ.प. रामदास महाराज चौधरी, ह.भ.प. दत्तात्रय चोरगे महाराज सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

विशेष सम्मान : हुपरी (कोल्हापुर) में आंदोलन के माध्यम से अवैध मदरसे को गिराने के लिए मजबूर करने वाले श्री नितिन काकडे, पंढरपुर के श्री विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में मूर्ति के रासायनिक लेपन के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने वाले श्री गणेश लंके, तथा गोरक्षा कार्य में निरंतर समर्पित राष्ट्रीय वारकरी सेना के उपाध्यक्ष ह.भ.प. अंभोरे महाराज कारभारी—इन सभी का संत ज्ञानेश्वर माऊली की मूर्ति भेंट देकर विशेष सम्मान किया गया।

हिंदुओं को इतिहास बोध और शत्रु बोध ध्यान में रखकर हिंदू धर्म पर होने वाले आघातों के खिलाफ सक्रिय होना आवश्यक! – प.पू. रामगिरी महाराज

प.पू. रामगिरी महाराज

“हिंदू इतिहास से सीख नहीं लेते और हम संगठित नहीं हैं, इसी कारण कई आक्रमणकारियों ने हम पर शासन किया। धर्म पर होने वाले आघातों के प्रति जागृत न होने के कारण आज अन्य धर्मियों और गलत विचारों को फैलाने वालों के हौसले बुलंद हैं। वारकरी संप्रदाय समाज को देने और जोड़ने का काम करता है, लेकिन आज ऐसे संप्रदाय के बारे में भ्रम फैलाने वाले विचार प्रसारित किए जा रहे हैं, ‘समता’ दिंडी निकाली जा रही है। आज कुछ लोग कह रहे हैं कि पंढरपुर के पांडुरंग, विट्ठल न होकर कोई और हैं।

‘लव जिहाद’ का जहर अब हर गांव-देहात तक पहुंच चुका है। छोटे बच्चों की बुद्धि भ्रष्ट करके उन्हें इस्लाम की प्रार्थनाएं सिखाई जा रही हैं। गोवंश रक्षा के संदर्भ में सरकार ने मई महीने में एक अध्यादेश निकाला है; यदि किसी क्षेत्र में अवैध गोहत्या होती है तो उसके लिए पुलिस, तहसीलदार और प्रशासन भी उतने ही उत्तरदायी हैं! इसे ध्यान में रखते हुए हमें प्रशासन को गोहत्या रोकने के लिए बाध्य करना चाहिए।”

वारकरी संप्रदाय में घुसे असली घुसपैठिए कौन हैं, यह बताने का समय आ गया है! – सुनील घनवट, (महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ राज्य संगठक, हिंदू जनजागृति समिति)

“संगठित वारकरी संप्रदाय में जानबूझकर दरार डालने और उनका बुद्धिभेद करने का काम चल रहा है। श्री विट्ठल की भक्ति का वर्णन करने वाले जगद्गुरु तुकाराम महाराज के अनेक अभंग होने के बावजूद, वारी के मार्ग पर केवल ‘अल्लाह के सिवा कोई श्रेष्ठ नहीं’, ‘अल्लाह दिलावे-अल्लाह खिलावे’ जैसे एकांगी प्रचार करने वाले बैनर-पोस्टर लगाए जा रहे हैं। हमें इस षड्यंत्र को समय रहते पहचानकर नाकाम करना होगा। वारकरी संप्रदाय में घुसे असली घुसपैठिए कौन हैं, यह बताने का समय आ गया है। महाराष्ट्र के लिए वारकरी संप्रदाय प्राण है और हिंदू धर्म उसकी आत्मा!

दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आंदोलन में पेपर लीक के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के नाम पर पुलिस की गाड़ियां तोड़ी गईं और पुलिस पर हमला किया गया। वहां दंगे जैसी स्थिति उत्पन्न की गई और देशविरोधी नारे लगाए गए। इस देशविरोधी षड्यंत्र को समझकर हमें इसके विरुद्ध कार्रवाई करने का संकल्प लेना चाहिए।”

अन्य वक्ताओं के विचार

विहिप के ह.भ.प. नारायण महाराज शिंदे: “वारकरियों के भोलेपन का फायदा उठाकर कुछ लोग उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देकर उनका बुद्धिभेद करने का प्रयास करते हैं। इसलिए आने वाले समय में वारकरी संप्रदाय में घुसे छद्म कीर्तनकारों को खोजकर सामने लाना आवश्यक है!”

राष्ट्रीय वारकरी परिषद के प्रवक्ता ह.भ.प. महेंद्र महाराज म्हस्के: “वर्तमान में देव, देश और धर्म के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। संप्रदाय के लिए काम करने वाले कई लोग धर्म के मंच पर आकर अपनी राय व्यक्त करने से डरते हैं; लेकिन जैसा कि प.पू. वक्ते महाराज ने कहा था—’पहले हम वैदिक सनातन हिंदू हैं, उसके बाद वारकरी हैं’, यह बात हमें हमेशा याद रखनी होगी।”

राष्ट्रीय वारकरी परिषद के प्रवक्ता ह.भ.प. निवृत्ती महाराज हल्ल्याळीकर: “महाराष्ट्र सरकार ने गोवंश हत्याबंदी कानून लागू किया है, लेकिन इस कानून को और कठोर किया जाना चाहिए। सभी तीर्थ क्षेत्रों को शराब और मांस से मुक्त किया जाना चाहिए। इंद्रायणी और चंद्रभागा नदियों को स्वच्छ किया जाना चाहिए।”

विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय सहमंत्री श्री दादा वेदक: “देव, देश और धर्म पर होने वाले आघातों के विरुद्ध वारकरियों को आवाज उठानी चाहिए। वारकरी संप्रदाय की भक्ति, समर्पण और त्याग में कोई कमी नहीं आनी चाहिए! वर्तमान में परिवार संस्था और विवाह संस्था पर हमले हो रहे हैं; समाज और राष्ट्र को जोड़ने वाली कड़ी के रूप में आदर्श परिवार व्यवस्था को खड़ा करना होगा। प्रत्येक हिंदू परिवार को अपना कम से कम एक बेटा धर्म के कार्य के लिए समर्पित करना चाहिए!”

राष्ट्रीय वारकरी परिषद के अध्यक्ष ह.भ.प. मारुति महाराज तुनतुने-शास्त्री: “अन्य धर्मीय संगठित हैं, इसलिए उनकी हर मांग पर सरकार को ध्यान देना पड़ता है, जबकि हिंदू संगठित नहीं हैं, इसीलिए आज हिंदू धर्म पर आघात हो रहे हैं। गोमाता को राज्यमाता का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद पशूवधगृह की अनुमति दी जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।”

प्रज्ञापुरी ज्ञानपीठ अक्कलकोट के पीठासीन धर्माधिकारी श्री प्रसाद पंडित: “वज्रलेपन (रासायनिक लेप) की निरर्थकता पता होने के उपरांत मंदिर समिति ने जानबूझकर यह लेप करने की जिद की। मंदिर महासंघ और वारकरी संप्रदाय ने पत्रकार वार्ता करके इसकी सच्चाई सामने लाई और कानूनी लड़ाई लड़कर इस पर रोक लगवाई।”

विभिन्न प्रस्तावों को ‘हर हर महादेव’ के जयघोष के साथ मिला समर्थन!

पंढरपुर स्थित पुरातत्व विभाग द्वारा श्री विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में रासायनिक लेपन प्रक्रिया के धर्मविरोधी निर्णय के विरुद्ध वारकरी और मंदिर महासंघ ने लड़ाई लड़ी; भविष्य में किसी भी प्रकार का रासायनिक लेपन न किया जाए। संतों, संत-साहित्य, राष्ट्रपुरुषों, धर्म और देवी-देवताओं का अपमान करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए ईशनिंदा प्रतिबंधक कानून लागू किया जाए। प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन अधिनियम २०२६’ को स्थगित रखा जाए और सरकार देवभूमि की रक्षा करने वाला ‘देवस्थान भूमि संरक्षण कानून’ लागू करे। इन सभी प्रस्तावों को उपस्थित वारकरी-श्रद्धालुओं ने ‘हर हर महादेव’ के जयघोष के साथ अपना पूर्ण समर्थन दिया।


23 जुलाई

वारकरियों की लंबित मांगों को लेकर आषाढ़ी एकादशी पर पंढरपुर में ‘भव्य वारकरी महाअधिवेशन’ का आयोजन

वारकरी संतों को ‘घुसपैठिया’ कहने वालों का सार्वजनिक निषेध और महाअधिवेशन में हिंदुत्वनिष्ठ संतों का भव्य सम्मान – श्री सुनील घनवट, हिंदू जनजागृति समिति

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए (बाएं से) श्री दत्तात्रय पिसे, ह.भ.प. निवृत्ति महाराज हल्ल्याळीकर, ह.भ.प. मारुति महाराज तुनतुने (शास्त्री), श्री सुनील घनवट एवं श्री प्रसाद पंडित

सोलापुर – वारकरी संप्रदाय कई शताब्दियों से समाज को नैतिक मूल्य, संस्कृति रक्षा और देशभक्ति की सीख दे रहा है। आज भी यह संप्रदाय धर्म और राष्ट्रहित के लिए निरंतर कार्यरत है। इसी भूमिका के साथ वारकरियों में एकता स्थापित करने और शासन के समक्ष महत्त्वपूर्ण मांगों को मजबूती से रखने के लिए आषाढ़ी एकादशी (25 जुलाई) के पावन अवसर पर पंढरपुर में एक दिवसीय भव्य ‘वारकरी महाअधिवेशन’ का आयोजन किया गया है। वर्ष 2008 से पंढरपुर और आलंदी में इस प्रकार के अधिवेशन आयोजित किए जा रहे हैं। इस महाअधिवेशन में हिंदुत्व के लिए कार्य करने वाले ह.भ.प. और पूजनीय संतों को ‘घुसपैठिया’ कहकर उनका अपमान करने वाले तथाकथित प्रगतिशील (पुरोगामी) लोगों का सार्वजनिक निषेध किया जाएगा। साथ ही, धर्मरक्षा के लिए संघर्ष करने वाले हिंदुत्वनिष्ठ संतों का इस अवसर पर भव्य सम्मान किया जाएगा। यह जानकारी हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ राज्य संगठक श्री सुनील घनवट ने एक पत्रकार वार्ता में दी।

इस अवसर पर राष्ट्रीय वारकरी परिषद के अध्यक्ष ह.भ.प. मारुति महाराज तुनतुने (शास्त्री), राष्ट्रीय प्रवक्ता ह.भ.प. निवृत्ति महाराज हल्ल्यालीकर, प्रज्ञापुरी ज्ञानपीठ अक्कलकोट के पीठासीन धर्माधिकारी श्री प्रसाद पंडित और हिंदू जनजागृति समिति के श्री दत्तात्रेय पिसे आदि उपस्थित थे।

यह महाअधिवेशन दिनांक 25 जुलाई 2026 (आषाढ़ी एकादशी) को दोपहर 12.30 से 3.30 बजे तक पंढरपुर स्थित भक्तिमार्ग, जनकल्याण अस्पताल के बगल में सद्गुरु श्री गंगागिरी महाराज मठ में संपन्न होगा। इस अधिवेशन की अध्यक्षता आचार्य पूज्यपाद श्री 1008 दंडी स्वामी अमृताश्रम महाराज करेंगे, तथा सरला बेट, श्री क्षेत्र गोदावरी धाम के पीठाधीश महंत गुरुवर्य प.पू. रामगिरी महाराज का मार्गदर्शन इस अधिवेशन को प्राप्त होगा।

इस अधिवेशन में वरिष्ठ कीर्तनकार संतवीर ह.भ.प. बंडातात्या कराडकर, महाराष्ट्र वारकरी महामंडल के अध्यक्ष ह.भ.प. रामेश्वरशास्त्री महाराज और सचिव ह.भ.प. नरहरि महाराज चौधरी, श्री विट्ठल-रुक्मिणी संस्थान (पंढरपुर) के विश्वस्त ह.भ.प. प्रकाश महाराज जवंजाळ, जगद्गुरु श्री संत तुकाराम महाराज संस्थान के विश्वस्त ह.भ.प. माणिक महाराज मोरे, श्री संत ज्ञानेश्वर महाराज संस्थान (आलंदी) के प्रमुख विश्वस्त योगी निरंजननाथ, अखिल भारतीय संत समिति के प्रदेश महामंत्री स्वामी भारतानंद सरस्वती महाराज मार्गदर्शन करेंगे। इसके अलावा शिवसेना आध्यात्मिक अघाड़ी के प्रदेशाध्यक्ष श्री अक्षय महाराज भोसले, भाजपा आध्यात्मिक समन्वय अघाड़ी के प्रदेश प्रमुख श्री तुषार भोसले, राष्ट्रीय वारकरी परिषद के ह.भ.प. मारुति महाराज तुनतुने, ह.भ.प. बापू महाराज रावकर, ह.भ.प. निवृत्ति महाराज हल्ल्यालीकर और हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ राज्य संगठक श्री सुनील घनवट सहित कई गणमान्य संत, महंत, धर्माचार्य और हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के प्रमुख भी अपने विचार रखेंगे।

अधिवेशन की प्रमुख मांगें

  • इस अधिवेशन में पंढरपुर, देहू, आलंदी, पैठण, मुक्ताईनगर सहित सभी तीर्थस्थलों को स्थायी रूप से मद्य और मांस-मुक्त करने तथा इन तीर्थस्थलों के 10 किलोमीटर के दायरे में अहिंदुओं के धर्मप्रसार पर सख्त पाबंदी लगाने की प्रमुख मांग की जाएगी।
  • संत-साहित्य, राष्ट्रपुरुषों, धर्म और देवताओं का अपमान करने वालों पर कठोर कार्रवाई के लिए स्वतंत्र ‘ईशनिंदा निवारण कानून’ लागू करने की भी मांग की जाएगी।
  • इसके साथ ही, संतों के श्लोकों का गलत अर्थ निकालकर वारी (तीर्थयात्रा) का माहौल खराब करने वालों पर शासन द्वारा स्थायी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
  • नक्सलियों का समर्थन करने वाली ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ (ANiS) जैसी संस्थाओं, नास्तिकों और तथाकथित प्रगतिशीलों को वारी में आने से रोका जाए और ‘अंनिस’ के आर्थिक घोटालों की जांच के लिए तत्काल प्रशासक नियुक्त किया जाए।
  • वारकरी शिक्षण संस्थानों और वेद पाठशालाओं को मासिक अनुदान देने, चंद्रभागा और इंद्रायणी नदियों का प्रदूषण तुरंत रोकने तथा ‘वक्फ बोर्ड’ द्वारा हड़पी गई मंदिरों की जमीनें वापस दिलाने के लिए शासन द्वारा तुरंत निर्देश देने की भी मजबूती से मांग रखी जाएगी।

इसके साथ ही, पुरातत्व विभाग द्वारा श्री विट्ठल-रुक्मिणी की मूर्ति पर रासायनिक लेपन के धर्मविरोधी निर्णय के खिलाफ वारकरी और मंदिर महासंघ द्वारा लड़ी गई लड़ाई पर भी इस महाअधिवेशन में चर्चा की जाएगी।

प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन अधिनियम २०२६’ को स्थायी रूप से रद्द कर देवभूमि की रक्षा करने वाला ‘एंटी लैंड ग्रैबिंग एक्ट’ लागू किया जाए, यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखा जाएगा। आयोजकों की ओर से सभी वारकरियों और भक्तों से इस ऐतिहासिक अधिवेशन में बड़ी संख्या में उपस्थित रहने की अपील की गई है। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें: श्री विनोद रसाल (संपर्क: 9975592892)

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