सिंधुदुर्ग जिला परिषद की ओर से हल्दी-कुंकुम कार्यक्रम में उपहार के रूप में सैनिटरी नैपकिन के वितरण का उपक्रम

प्रशासन में यदि साहस हो, तो वह मुसलमान और ईसाईयों के त्योहारों में इस प्रकार के उपक्रम चलाकर दिखाएं ! – रणरागिनी शाखा, हिन्दू जनजागृति समिति

  • धर्म का तनिक भी ज्ञान न होनेवाली सिंधुदुर्ग जिला परिषद ! हिन्दू धर्म में विद्यमान त्योहार, व्रत आदि का धर्मशास्त्र है । ऐसा होते हुए भी निधर्मी, व्यवस्था में विद्यमान घटक कुछ पूछ नहीं लेता और उसमें मनगढंत पद्धति से हस्तक्षेप करता है ।
  • भविष्य में मकर संक्राति को उपहार के रूप में और कुछ वस्तु का वितरण किया गया, तो उसमें आश्‍चर्य कैसा ? इससे हिन्दुआें को धर्मशिक्षा की कितनी आवश्यकता है, यह ध्यान में आता है !

सिंधुदुर्ग (महाराष्ट्र) : सिंधुदुर्ग जिला परिषद की ओर से मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में आयोजित हल्दी-कुंकुम कार्यक्रम में सैनिटरी नैपकिन का वितरण करना सुनिश्‍चित किए जाने का समाचार प्रकाशित हुआ है । मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में हल्दी-कुंकुम का कार्यक्रम एक धार्मिक उपक्रम के रूप में आयोजित किया जाता है । हिन्दू धर्मशास्त्र के अनुसार हल्दी-कुंकुम कार्यक्रम में उपहार के रूप में सात्त्विक वस्तुआें का वितरण करने की बात कही गई है । अतः इस प्रकार से उपहार के रूप में सैनिटरी नैपकिन का वितरण करना, अत्यंत अयोग्य है और यह हिन्दुआें के धार्मिक कार्यक्रम का जानबूझकर किया जानेवाला अनादर है । सिंधुदुर्ग जिला परिषद के सैनिटरी नैपकिन का वितरण करना ही हो, तो वे अवश्य करें, हमारा उसके लिए विरोध नहीं है; किंतु उपहार के रूप में हल्दी-कुंकुम कार्यक्रम में इसका वितरण क्यों ? हिन्दू जनजागृति समिती की रणरागिनी शाखा की श्रीमती अनुश्री गावस्कर द्वारा प्रकाशित विज्ञप्ति में कहा गया है कि क्या प्रशासन रमजान अथवा क्रिसमस के त्योहारों के समय सैनिटरी नैपकिन के वितरण का साहस दिखाएगा ?

जिला परिषद कार्यालय में ज्ञापन सौंपती हुईं रणरागिनी शाखा की महिलाएं

रणरागिनी शाखा की ओर से हम समस्त महिलाआें से यह आवाहन करते हैं कि आजकल प्रचालित हल्दी-कुंकुम कार्यक्रमों में भी उपहार के रूप में घरेलु उपयोगवाली अथवा प्लास्टिक की वस्तुआें का वितरण किया जाता है; परंतु धर्मशास्त्र की दृष्टि से ऐसा करना उचित नहीं है । इसलिए उपहार के रूप में सौभाग्य से संबंधित कुंकुम, सिंधोरा आदि अथवा पूजाविधि से संबंधित उदबत्ती, कर्पुर, इत्र, देवताआें के चित्र अथवा उपासना हेतु पूरक वस्तुएं, उदा. जपमाला, आध्यात्मिक ग्रंथादि सात्त्विक वस्तुएं दें । जिला प्रशासन को धार्मिक बातों में कोई सुझाना हो, तो वे धर्माचार्य अथवा संत-महंतों से मार्गदर्शन लें । श्रीमती गावसकर ने प्रशासन को यह चेतावनी भी दी कि आधुनिकतावाद के नाम पर हिन्दुआें की धर्मपरंपराएं, त्योहार, उत्सव और परंपराआें में किया जानेवाला हस्तक्षेप सहन नहीं किया जाएगा । जिला परिषद हल्दी-कुंकुम कार्यक्रम में सैनिटरी नैपकिन के वितरण का कार्यक्रम रद्द करें, अन्यथा उन्हें हिन्दुआें के क्षोभ का सामना करना पडेगा ।

संदर्भ : दैनिक सनातन प्रभात

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