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वैदिक धर्म की पुनर्स्थापना करनेवाले पुरोहित बनें – पू. डॉ.चारुदत्त पिंगळे, राष्ट्रीय मार्गदर्शक, हिन्दू जनजागृति समिति

बार्इं ओर से श्री. देवकरण शर्मा (देव), मार्गदर्शन करते हुए पू. (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे एवं श्री.रामकृष्ण पौराणिक

उज्जैन : वेदपाठशाला में आए प्रत्येक विद्यार्थी वेदज्ञान प्राप्त करने के साथ साधना कर गुरुकृपा भी प्राप्त करे । साधना से ईश्वर के प्रति भाव उत्पन्न होकर हमें उपासना का बल भी मिलता है । भारत में रामराज्य स्थापित करने हेतु ऐसे ब्रह्मतेज की आवश्यकता है । यह तेज उत्पन्न कर वैदिक धर्म की पुनर्स्थापना करनेवाले पुरोहित बनना चाहिए । हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक पू.डॉ.चारुदत्त पिंगळे ने ऐसा प्रतिपादित किया । वे ४ जनवरी को यहां के श्रीऋषि गुरुकुल के विद्यार्थियों को मार्गदर्शन करते हुए बोल रहे थे । इस समय व्यासपीठ पर गुरुकुल के संस्थापक श्री.देवकरण शर्मा (देव) एवं गुरुकुल के न्यासी श्री.रामकृष्ण पौराणिक उपस्थित थे ।

पू.डॉ. चारुदत्त पिंगळे ने कहा कि, सृष्टि की निर्मिति नाद से हुई । इसलिए प्रथम नाद, नाद से अक्षर एवं अक्षर से शब्द तथा शब्द के उच्चार से अर्थ उत्पन्न हुआ । उसीप्रकार वेदमंत्रपठन से जो नाद उत्पन्न होता है, यद्यपि उसका अर्थ समझ में नहीं आता है, तब भी उस से वेदमंत्रपठन करनेवालों का चित्त शुद्ध होता है ।

विद्यार्थियों को भारत के पुनरुत्थान का साक्षीदार बनना चाहिए । – देवकरण शर्मा

इस अवसर पर श्री.देवकरण शर्मा ने कहा कि, युगनिर्माण होना आवश्यक है । इसलिए हमें आलस, संकीर्ण बुद्धि तथा भोगवासना का त्याग कर उपासना के बल पर जीवन को सोने के समान बनाना चाहिए । मुसलमान एवं अंग्रेजों ने अपनी व्यवस्था को बिगाड दिया । वर्तमान में भारत के पुनरुत्थान के लिए दायित्व लेकर विद्यार्थियों को उसका साक्षीदार बनना चाहिए ।

इस अवसर पर श्री.रामकृष्णजी पौराणिक ने कहा कि, आज हमें हिन्दू धर्म को पुनः सशक्त बनाना चाहिए । तब अपने पास से दूर गए पुनः पास आएंगे ।

इस प्रकार से हुई श्रीऋषि गुरुकुल की स्थापना…

श्रीऋषि गुरुकुल की स्थापना के विषय में संस्थापक श्री.देवकरणजी शर्मा (देव) ने कहा कि, मैंने महाविद्यालयीन शिक्षा ग्रहण करते समय ही गुरुकुल के माध्यम से सनातन धर्म के लिए कार्य करने का निश्चय किया । इसलिए वर्ष २००३ में स्वेच्छानिवृत्त होकर उस समय प्राप्त ११ लाख रुपयों से गुरुकुल के लिए भूमि क्रय की । इस भूमि में ४०० से अधिक वृक्ष लगाए । आज इस परिसर में गोशाला, वेदपाठशाला, शिवमंदिर, भोजनशाला, अध्यापक एवं विद्यार्थी का निवासस्थान है एवं यज्ञशाला का भी निर्माणकार्य होनेवाला है । वर्तमान समय में इस वेदपाठशाला में शुक्ल यजुर्वेद एवं अथर्ववाद की शिक्षा दी जा रही है । भविष्य में चारों वेदों की शिक्षा देने की योजना है । पूरे देश में गुरुकुल समान मूल्याधारित पाठयक्रम सिद्ध करने हेतु मैं प्रयास कर रहा हूं ।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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