
हातकणंगले (जिला कोल्हापुर) – राज्य सरकार ने ‘देवस्थान इनाम उन्मूलन विधेयक-2026’ प्रस्तावित किया था। इस विधेयक के दुष्परिणामों को महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने विभिन्न स्थानों पर बैठकें, पत्रकार परिषदें आयोजित कर तथा ज्ञापन देकर सरकार के ध्यान में लाया। मंदिर महासंघ द्वारा किए गए जनजागरण के कारण राज्य के अनेक मंदिरों के ट्रस्टियों, पुजारियों और श्रद्धालुओं ने इस विधेयक का विरोध करते हुए ज्ञापन दिए और आपत्तियां दर्ज कराईं। महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के संगठित प्रयासों के कारण ‘देवस्थान इनाम निर्मूलन विधेयक’ को स्थगित करना पड़ा। यह मत हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे ने व्यक्त किया। वे नृसिंह मंदिर में आयोजित मार्गदर्शन कार्यक्रम में बोल रहे थे।
श्री रमेश शिंदे ने आगे कहा, “मंदिर संस्कृति के महत्व को समझने के लिए हिंदुओं को नियमित रूप से मंदिरों में एकत्र होकर धर्मचर्चा करनी चाहिए। जिस प्रकार मंदिर संस्कृति पर लगातार आघात हो रहे हैं, उसका सामना करने के लिए हम सभी को संगठित होकर सामूहिक रूप से प्रतिकार करना चाहिए।”
इस अवसर पर मंदिर महासंघ के प्रसाद कुलकर्णी, अशोक गुरव, हिंदू जनजागृति समिति के महेंद्र अहिरे, संतोष सणगर, साधना गोडसे, शिल्पा कोठावळे, रजनी सुधाकर गुरव, भाजपा के नगरसेवक पवन निगवे, रावसाहेब चौगुले, पंकज बुढ्ढे, अभिजित अरवाडे, मंदिर की ट्रस्टी सुषमा जोशी, बंडू कोळी, सुरेश खोत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भावेश पटेल, शिवसेना के मंगेश देवाळे, मंदिर के पुजारी पांडुरंग धनगर, निखिल पुजारी सहित बड़ी संख्या में मंदिरों के पुजारी, ट्रस्टी और हिंदुत्वनिष्ठ उपस्थित थे।








