देवस्थान इनाम निर्मूलन कानून निरस्त होने तक संघर्ष जारी रखना चाहिए ! – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति
मंदिरों के संरक्षण, प्रबंधन और धार्मिक स्वायत्तता के लिए संगठित होने का मंदिर न्यासियों से आवाहन

कुडाळ – ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम प्रारूप निर्मूलन अधिनियम 2026’ नामक प्रस्तावित कानून का राज्यभर में व्यापक विरोध हुआ। इसके परिणामस्वरूप सरकार को फिलहाल इसकी प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी है; किंतु केवल स्थगन का अर्थ यह नहीं कि कानून समाप्त हो गया है। जब तक सरकार आधिकारिक रूप से इस कानून को वापस लेने की घोषणा नहीं करती, तब तक मंदिर न्यासी, श्रद्धालु और हिन्दू समाज को सतर्क रहकर संगठित रूप से अपना पक्ष प्रस्तुत करते रहना चाहिए, ऐसा आवाहन हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री रमेश शिंदे ने किया।
महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के तत्वावधान में 13 जून को सिंधुदुर्ग जिले के झाराप स्थित आराध्या होटल में मंदिर न्यासियों की बैठक आयोजित की गई थी। इस अवसर पर श्री शिंदे मुख्य वक्ता के रूप में मार्गदर्शन कर रहे थे। कार्यक्रम में सनातन संस्था की धर्मप्रचारक सद्गुरु स्वाती खाडये तथा सद्गुरु सत्यवान कदम की सम्माननीय उपस्थिति रही। बैठक में जिलेभर के विभिन्न देवस्थानों के न्यासी, मानकरी, मंदिर समितियों के पदाधिकारी एवं सेवाकार्यों से जुड़े 120 से अधिक लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

श्री रमेश शिंदे के प्रमुख विचार
1. सरकार द्वारा प्रस्तावित कानून पर सुझाव तथा आपत्तियां आमंत्रित किए जाने के बाद राज्यभर से बड़ी संख्या में निवेदन, आपत्तियां और प्रतिक्रियाएं प्रस्तुत की गईं। अनेक मंदिर न्यासियों ने स्थानीय प्रशासन और विभागीय स्तर पर अपनी भूमिका स्पष्ट की। इसके बाद सरकार ने प्रक्रिया स्थगित की है; किंतु यह अंतिम निर्णय नहीं है, इसलिए समाज को इस विषय को गंभीरता से लेना चाहिए।
2. मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, अपितु सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन के आधार भी हैं। अतः मंदिरों से संबंधित नीतियां बनाते समय उनकी पारंपरिक व्यवस्था, स्थानीय प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सहभागिता का ध्यान रखा जाना आवश्यक है।
3. किसी एक मंदिर या न्यास के लिए जटिल प्रशासनिक अथवा कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना कठिन हो सकता है; किंतु सामूहिक प्रयासों से शासन और न्यायिक स्तर पर विषयों को अधिक प्रभावी ढंग से रखा जा सकता है।
4. अनेक बार न्यासियों, श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों के समन्वित प्रयासों से सकारात्मक निर्णय प्राप्त हुए हैं। इसलिए मंदिरों से जुड़े विषयों पर संवाद, अध्ययन और कानूनी तैयारी आवश्यक है।
“आपको भगवान के विश्वस्त के रूप में मंदिरों की जिम्मेदारी सौंपी गई है” – सद्गुरु स्वाती खाडये
सद्गुरु स्वाती खाडये ने कहा कि, बहुसंख्यक हिन्दू जनसंख्या वाले देश में केवल हिन्दू मंदिरों को ही सरकारी नियंत्रण में लेने का प्रयास क्यों होता है, जबकि मस्जिदों और चर्चों के साथ ऐसा नहीं होता? इसका मुख्य कारण हिन्दुओं का असंगठित होना है।
उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में मंदिर धर्मशिक्षा के केंद्र हुआ करते थे, जहां समाज को धार्मिक और नैतिक शिक्षा मिलती थी। राजाओं द्वारा मंदिरों को संरक्षण दिया जाता था; किंतु आज मंदिरों की संपत्ति पर नियंत्रण स्थापित करने के प्रयास दिखाई देते हैं। वर्तमान पीढ़ी में ईश्वर के प्रति श्रद्धा कम होने का एक कारण यह भी है कि घर, विद्यालय और मंदिर – तीनों स्तरों पर धर्मशिक्षा का अभाव हो गया है।
उन्होंने मंदिर न्यासियों को स्मरण कराया कि उन्हें भगवान का विश्वस्त बनाकर यह दायित्व सौंपा गया है, इसलिए मंदिरों की रक्षा और उनके आध्यात्मिक उद्देश्य को जीवित रखना उनका कर्तव्य है।
बैठक में हुए प्रमुख विषय
1. उपस्थित न्यासियों ने मंदिर भूमि अभिलेख, अतिक्रमण, प्रशासन से संवाद, मंदिर विकास योजनाएं, कानूनी प्रक्रियाएं, वित्तीय प्रबंधन तथा स्थानीय स्तर की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की।
2. सिंधुदुर्ग जिले के अनेक मंदिर प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए देवस्थानों के संरक्षण के लिए अधिक समन्वय, मार्गदर्शन और जिला स्तर पर संयुक्त भूमिका की आवश्यकता व्यक्त की।
3. भविष्य में तालुका स्तर पर न्यासियों की बैठकें, जनजागरण अभियान, श्रद्धालुओं से संवाद, निवेदन प्रस्तुत करने और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं के समन्वय को बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया गया।
4. सभी उपस्थित लोगों ने मंदिर संरक्षण, सुव्यवस्थित प्रबंधन और धार्मिक परंपराओं के संवर्धन के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया।
रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों की 6,600 एकड़ भूमि सरकारी नियंत्रण में !
बैठक में बताया गया कि 20 अगस्त 2018 को अनधिकृत निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई के नाम पर रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों के अनेक हिन्दू मंदिरों की वनभूमियां महाराष्ट्र सरकार के नाम दर्ज कर दी गईं। दोनों जिलों में ऐसी लगभग 6,600 एकड़ भूमि वन विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है।
इन भूमियों को पुनः मंदिरों को लौटाने की मांग राज्य के विधि राज्यमंत्री आशीष जैसवाल के समक्ष रखी गई है, ऐसी जानकारी भी बैठक में दी गई।








