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देवस्थान भूमि संरक्षण परिषद : मंदिर सरकारीकरण एवं वक्फ अतिक्रमण के विरुद्ध मंदिर ट्रस्टी हुए एकजुट

अमरावती एवं अकोल में देवस्थान भूमि संरक्षण परिषद 

१. अमरावती

हिंदुओं की मांगों को सरकार तक पहुंचाकर न्याय दिलाने का प्रयास करूंगा! – डॉ. अनिल बोंडे, सांसद (भाजपा)

मंदिर ट्रस्टियों ने स्व-रक्षा प्रशिक्षण तथा गौशालाएं आरंभ करने की मांग उठाई

बाएं से: श्री पूंजाजी नेमाडे, सांसद डॉ. अनिल बोंडे, बोलते हुए श्री सुनील घनवट, श्री अनुप जायसवाल तथा श्री श्रीकांत पिसोलकर

अमरावती – मंदिरों की भूमि की रक्षा के साथ-साथ मंदिरों का संरक्षण भी आवश्यक है। मंदिर ट्रस्टियों को इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेना चाहिए। पूजा-अर्चना के साथ मंदिरों के माध्यम से युवाओं के लिए स्व-सुरक्षा प्रशिक्षण वर्ग, व्यायामशालाएं और गौशालाएं जैसे समाजोपयोगी उपक्रम शुरू किए जाने चाहिए। मंदिर ट्रस्टियों को समयानुसार संगठित होकर प्रयास करने की आवश्यकता है। वर्तमान में किसी भी दल की सरकार हो, प्रशासन के कुछ अधिकारियों की अनुचित मानसिकता के कारण ऐसे कष्टदायक कानून बनाए जाते हैं। हम जनप्रतिनिधि के रूप में इस विषय को गंभीरता से देख रहे हैं और हिंदुओं की मांगों को सरकार तक पहुंचाकर न्याय दिलाने का प्रयास करूंगा, ऐसा आश्वासन भाजपा सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने यहां आयोजित ‘देवस्थान भूमि संरक्षण परिषद’ में दिया।

परिषद में हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ के संगठन मंत्री तथा राष्ट्रीय मंदिर महासंघ के संगठन मंत्री श्री सुनील घनवट सहित विदर्भ के 150 से अधिक मंदिरों के ट्रस्टी उपस्थित थे। परिषद में कहा गया कि, सरकार द्वारा ‘देवस्थान इनाम निर्मूलन कानून’ के प्रारूप को स्थगित करना हिंदुओं की संगठित शक्ति की जीत है तथा अब अगला संघर्ष मंदिरों की भूमि को वक्फ बोर्ड के कब्जे से मुक्त कराने के लिए होगा।

मंदिर ट्रस्टी संगठित हुए तो देश के 4 लाख मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त होंगे! – सुनील घनवट

श्री सुनील घनवट ने कहा कि मंदिर ट्रस्टियों के साथ मंदिर महासंघ के मजबूती से खड़े रहने के कारण संगठन शक्ति का निर्माण हुआ है। इसी शक्ति के कारण सरकार को कुछ ही दिनों में ‘इनाम उन्मूलन प्रारूप’ स्थगित करना पड़ा। मंदिर संस्कृति पर आघात होने पर सभी मंदिर ट्रस्टी एकजुट होकर संघर्ष कर रहे हैं। किसी एक मंदिर की समस्या पूरे हिंदू समाज की समस्या है। इसी सामूहिक शक्ति के बल पर एक दिन केंद्र सरकार को देश के 4 लाख मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की घोषणा करनी पड़ेगी।

मंदिर भूमि पर कब्जा करने वालों के विरुद्ध ‘एंटी-लैंड ग्रैबिंग’ कानून बने! – अनुप जयस्वाल

महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राज्य पदाधिकारी अनुप जयस्वाल ने कहा कि मंदिर महासंघ द्वारा राज्यभर में किए गए जागरण अभियान के कारण ही देवस्थान इनाम उन्मूलन कानून को रोका जा सका। मंदिरों की भूमि हड़पने वाले भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध सरकार को कठोर ‘एंटी-लैंड ग्रैबिंग’ (भूमि कब्जा विरोधी) कानून लागू करना चाहिए।

हिंदू मंदिर संस्कृति संरक्षण के केंद्र बनें! – श्रीकांत पिसोळकर

हिंदू जनजागृति समिति के विदर्भ समन्वयक श्रीकांत पिसोळकर ने कहा कि सभी हिंदू मंदिरों को संगठन, समन्वय और सुरक्षा की त्रिसूत्री पर कार्य करना चाहिए। मंदिर हिंदू संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के प्रमुख केंद्र बनें, इसके लिए प्रयास किए जाने चाहिए।

इस अवसर पर अमरावती के जिला हिंदू संघटक प्रदीप गर्गे भी उपस्थित थे।

२. अकोला

मंदिरों के सरकारीकरण और वक्फ बोर्ड के अतिक्रमण के विरुद्ध संघर्ष को और तीव्र करने का संकल्प!

मंच पर उपस्थित (बाएं से) श्री श्रीकांत पिसोलकर, श्री प्रमोद अग्निहोत्री, श्री सुनील घनवट, श्री दिनकर ठाकरे, श्री प्रशांत देशमुख तथा श्री अरविंद देठे

अकोला – सरकार द्वारा ‘देवस्थान इनाम निमूर्लन कानून’ के प्रारूप को स्थगित करना हिंदुओं की संगठित शक्ति की एक बड़ी विजय है। अब अगला संघर्ष मंदिरों की भूमि को वक्फ बोर्ड के कब्जे से मुक्त कराने तथा मंदिरों की भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के विरुद्ध ‘एंटी-लैंड ग्रैबिंग’ (भूमि अतिक्रमण विरोधी) कानून लागू कराने का होगा। यह संकल्प यहां आयोजित ‘देवस्थान भूमि संरक्षण परिषद’ में व्यक्त किया गया।

इस परिषद में हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ राज्य संगठक तथा राष्ट्रीय मंदिर महासंघ के संगठक श्री सुनील घनवट सहित अकोला और विदर्भ क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों के लगभग 150 ट्रस्टी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

इस अवसर पर श्री सुनील घनवट ने कहा, “यदि मंदिरों के ट्रस्टी संगठित हो जाएं, तो देश के 4 लाख मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराया जा सकता है।”

हिंदू जनजागृति समिति के विदर्भ समन्वयक श्री श्रीकांत पिसोलकर ने परिषद की प्रस्तावना प्रस्तुत की। उन्होंने महाराष्ट्र मंदिर महासंघ द्वारा अब तक किए गए कार्यों और प्राप्त ऐतिहासिक सफलताओं का विस्तृत परिचय दिया।

इस अवसर पर मंच पर श्री चंडिकादेवी संस्थान के अध्यक्ष श्री प्रशांत देशमुख, स्वयंभू महादेव अंत्री के अध्यक्ष श्री अरविंद देठे, हनुमान मंदिर के ट्रस्टी श्री प्रमोद अग्निहोत्री तथा मूर्तीजापुर मंदिर महासंघ के ट्रस्टी श्री दिनकर ठाकरे सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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