प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक ‘आर्यभट्ट’ के उपहास मामले में अमेजन इंडिया को कानूनी नोटिस
मुंबई/नई दिल्ली : अमेज़न इंडिया के एक व्यावसायिक विज्ञापन में प्राचीन भारत के महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री ‘आर्यभट्ट’ का अत्यंत आपत्तिजनक ढंग से उपहास उड़ाने के मामले में कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा गया है। सर्वोच्च न्यायालय में कार्यरत और हिंदू जनजागृति समिति की अधिवक्ता अमिता सचदेवा द्वारा भेजी गई इस नोटिस में मांग की गई है कि अमेज़न 48 घंटे के भीतर भारतीय जनता से सार्वजनिक माफी मांगे और इस विवादित विज्ञापन को तुरंत वापस ले। मांग पूरी न होने पर अमेज़न के विरुद्ध फौजदारी और दीवानी मुकदमा दर्ज किया जाएगा, ऐसा स्पष्ट अल्टीमेटम दिया गया है। इस विज्ञापन को लेकर देश भर के राष्ट्रप्रेमी नागरिकों में भारी आक्रोश है और सोशल मीडिया पर ‘अमेज़न का बहिष्कार करो’ (#Boycott_Amazon) अभियान तेजी से ट्रेंड कर रहा है।
🛑 LEGAL NOTICE,
To,
The Chief Executive Officer / Managing Directorhttps://t.co/an0kuix5ot, Inc. & Amazon Seller Services Private Limited (Amazon India)
Corporate Office:
8th Floor, World Trade Centre, Plot No. C-1, Sector 16,
Noida, Uttar Pradesh – 201301
Also to:
Amazon… pic.twitter.com/6QiuVJRGWS— Amita Sachdeva, Advocate (@SachdevaAmita) June 12, 2026
यह विवाद ‘अमेज़न नाऊ’ (Amazon Now) सेवा के प्रचार अभियान के कारण शुरू हुआ है, जिसमें आर्यभट्ट की वेशभूषा में एक व्यक्ति को ‘‘जीरो डिलीवरी चार्ज खोजने वाले वैज्ञानिक’’ के रूप में बेहद मजाकिया और व्यंग्यात्मक ढंग से पेश किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि जिस महान ऋषि-तुल्य वैज्ञानिक ने दुनिया को ‘शून्य’ की अमूल्य अवधारणा दी और वैश्विक स्तर पर भारत का वैज्ञानिक परचम लहराया, उन्हें केवल व्यावसायिक लाभ के लिए एक ‘कॉर्पोरेट मस्कट’ बनाकर उनकी क्रूर थट्टा उड़ाना भारत की महान ज्ञान-विरासत और राष्ट्रीय अस्मिता का जानबूझकर किया गया अपमान है।
नोटिस में ध्यान दिलाया गया है कि व्यावसायिक लाभ के लिए भारतीय संस्कृति और हिंदू प्रतीकों का अपमान करने का अमेज़न का यह पुराना इतिहास रहा है। इससे पहले भी कंपनी के प्लेटफॉर्म पर हिंदू देवी-देवताओं (भगवान गणेश और माता लक्ष्मी) के चित्रों वाले पायदान, टॉयलेट सीट कवर बेचे जाने और ‘तांडव’ वेब सीरीज के माध्यम से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले सामने आ चुके हैं, जिसके लिए भारी विरोध के बाद कंपनी को माफी मांगनी पड़ी थी। केवल व्यावसायिक मुनाफे के लिए भारतीय महापुरुषों का जानबूझकर अपमान करने का यह कृत्य संशोधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 (धार्मिक भावनाएं आहत करना), धारा 196 व 197 (वैमनस्य फैलाना और राष्ट्रीय अखंडता को बाधित करना) तथा धारा 302 (धार्मिक भावनाओं को आहत करने का इरादा) के तहत सीधे आपराधिक और दीवानी कार्रवाई के योग्य है।
Amazon Insults Aryabhata
Aryabhata gave the world ZERO.
Amazon gave him ZERO respect.Turning Bharat’s greatest mathematician into a marketing prop for “zero fees” is not creativity, it’s cultural insult.@amazonIN Apologise. Withdraw the ad. Respect India’s civilisational… pic.twitter.com/htr0HluRxi
— HinduJagrutiOrg (@HinduJagrutiOrg) June 12, 2026
इस पृष्ठभूमि में हिंदू जनजागृति समिति ने अमेज़न को अपनी शर्तें पूरी करने के लिए 48 घंटे का समय दिया है। इसके तहत ‘आर्यभट्ट – अमेज़न नाऊ’ विज्ञापन को यु-ट्यूब, इन्स्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और टीवी सहित सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से स्थाई रूप से हटाना होगा। साथ ही, कंपनी को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल, वेबसाइट के होमपेज और देश के अग्रणी समाचार पत्रों में हिंदू समाज और भारतीय संस्कृति से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगनी होगी, तथा भविष्य में राष्ट्रीय प्रतीकों या महापुरुषों का अपमान न करने का एक लिखित वचन पत्र भी देना होगा। अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि दी गई अवधि में कार्रवाई न होने पर अदालत में मुकदमा दायर किया जाएगा।
11 जून
‘अमेजन इंडिया’ ने विज्ञापन में महान भारतीय शास्रज्ञ आर्यभट का किया अनादर
महान वैज्ञानिक की विरासत को हास्य का विषय बनाने पर आक्रोश!

मुंबई, महाराष्ट्र – विश्व को ‘शून्य’ (0) का अमूल्य उपहार देने वाले महान भारतीय गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री आर्यभट्ट की छवि का व्यावसायिक प्रचार के लिए उपयोग करने पर Amazon India को तीव्र आलोचना का सामना करना पड रहा है। ‘Amazon Now’ के एक नए विज्ञापन में आर्यभट्ट को हल्के-फुल्के और हास्यास्पद संवादों के माध्यम से प्रस्तुत किए जाने पर अनेक नागरिकों, इतिहास प्रेमियों और भारतीय संस्कृति के समर्थकों ने आपत्ति व्यक्त की है।
नागरिकों का कहना है कि, यह विज्ञापन भारतीय संस्कृति, इतिहास और हमारे महान विद्वानों के योगदान को तुच्छ बनाकर व्यावसायिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास करता है। कंपनी को यह विज्ञापन तत्काल वापस लेकर सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना करनी चाहिए तथा केंद्र सरकार को भी इस विषय में उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
विज्ञापन में क्या दिखाया गया है?
विज्ञापन में आर्यभट्ट को समय-यात्रा करके आधुनिक युग में आते हुए दिखाया गया है। उनके हाथ में प्राचीन पांडुलिपियां हैं। आधुनिक समय में पहुंचने पर कुछ युवा उन्हें पहचान नहीं पाते और उनकी पारंपरिक वेशभूषा का उपहास करते हुए पूछते हैं, “अंकल, यह डिलीवरी कहां देनी है?”
इसके बाद आर्यभट्ट स्वयं को परिचित कराने का प्रयास करते हैं, किंतु विज्ञापन में उन्हें विद्यालयों और रॉकेट प्रक्षेपण स्थलों के आसपास भटकते हुए तथा इस चिंता में व्याकुल दिखाया जाता है कि मानवता ‘शून्य’ के वास्तविक महत्व को भूल चुकी है।
विज्ञापन के अंतिम भाग में आर्यभट्ट के ‘शून्य’ के ऐतिहासिक और विश्व-परिवर्तनकारी योगदान को ई-कॉमर्स प्रचार से जोड़ दिया जाता है। आर्यभट्ट को तब प्रसन्न दिखाया जाता है जब उन्हें पता चलता है कि, कंपनी अपने प्लेटफ़ॉर्म पर “Zero Additional Fees”, “Zero Search Fees” और “Zero Handling Fee” जैसे प्रचार संदेशों में ‘शून्य’ का उपयोग कर रही है।
आलोचकों का कहना है कि, मानव सभ्यता को गणितीय क्रांति देने वाले आर्यभट्ट के महान योगदान को केवल व्यावसायिक प्रचार और मार्केटिंग के रूप में प्रस्तुत करना उनके ऐतिहासिक महत्व और विरासत का अवमूल्यन करता है। एक महान वैज्ञानिक की अमर उपलब्धि को कॉर्पोरेट विज्ञापन के आकर्षण तक सीमित करना अत्यंत आपत्तिजनक और निंदनीय है।








