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महाराष्ट्र मंदिर महासंघ की ओर से दापोली में मंदिर परिषद संपन्न

85 मंदिर न्यासियों की उपस्थिति

देवस्थानों की सुरक्षा के लिए न्यासियों की प्रभावी एकजुटता आवश्यक ! – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति

बाएं से श्री सुरेश शिंदे, सद्गुरु सत्यवान कदम, श्री सुरेश रेवाळे तथा मार्गदर्शन करते हुए श्री रमेश शिंदे

दापोली – वर्ष 2007 में महाराष्ट्र के लगभग 4 लाख मंदिरों को तत्कालीन सरकार द्वारा एक आदेश के माध्यम से अपने नियंत्रण में लेने की कानूनी प्रक्रिया आरंभ की गई थी; किंतु हिन्दू जनजागृति समिति ने मंदिर न्यासियों, हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों और विभिन्न संप्रदायों को साथ लेकर राज्यव्यापी आंदोलन किया, जिसके परिणामस्वरूप सरकार को वह आदेश वापस लेना पड़ा। वर्तमान में भी महाराष्ट्र सरकार ने प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम 2026’ को स्थगित किया है। यह स्थगन महाराष्ट्र मंदिर महासंघ द्वारा मंदिर न्यासियों के माध्यम से किए जा रहे विरोध का परिणाम है; किंतु संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। सरकार हमारी हो सकती है, परंतु उससे भी अधिक हमारे लिए देवस्थान और मंदिर संस्कृति महत्वपूर्ण हैं। यदि मंदिर संस्कृति और देवस्थानों को सुरक्षित रखना है, तो मंदिर न्यासियों की प्रभावी एकजुटता आवश्यक है। यह प्रतिपादन हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के मार्गदर्शक श्री रमेश शिंदे ने किया। वे दापोली तालुका के जालगांव-ब्राह्मणवाड़ी स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर में आयोजित मंदिर परिषद को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर दापोली, मंडणगड और खेड तालुकों के 85 मंदिर न्यासी उपस्थित थे।

कार्यक्रम का शुभारंभ शंखनाद के साथ हुआ। संचालन हिन्दू जनजागृति समिति के श्री परेश गुजराथी ने किया तथा प्रस्तावना महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के जिला संयोजक श्री सुरेश शिंदे ने रखी।

प्रारंभ में मंचासीन मान्यवरों का शाल, श्रीफल एवं पुष्पहार देकर सम्मान किया गया। सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरु सत्यवान कदम का सम्मान लाडघर गांव के अध्यक्ष श्री सुधीर साळवी ने किया। प्रमुख वक्ता श्री रमेश शिंदे का सम्मान समिति के श्री चंद्रकांत उजाळ ने किया। दापोली तालुका संयोजक श्री सुरेश रेवाळे का सम्मान खेड तालुका के बीजघर देवस्थान के न्यासी श्री सुनील भोसले ने किया, जबकि महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के श्री सुरेश शिंदे का सम्मान मंडणगड तालुका के टाकेडे देवस्थान के श्री अनंत शिंदे ने किया।

श्री रमेश शिंदे के प्रमुख विचार

1. शासन के प्रस्तावित देवस्थान इनाम निर्मूलन कानून में, जबकि वक्फ बोर्ड के पास लाखों एकड़ भूमि है, उसे इस कानून से बाहर रखा गया है और केवल हिन्दू देवस्थानों की भूमि अधिग्रहित करने का प्रावधान रखा गया है। यह कैसा धर्मनिरपेक्षता का स्वरूप है?

2. सरकार ने देवस्थान इनाम निर्मूलन कानून को केवल स्थगित किया है, समाप्त नहीं। इसलिए यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि अब यह कानून कभी लागू नहीं होगा। अधिकाधिक मंदिर न्यासियों को इसके विरोध में जनजागरण अभियान चलाना चाहिए।

3. वर्तमान में जो मंदिर सरकारी नियंत्रण में हैं, वहां धार्मिक परंपराओं का क्षरण हो रहा है। देवधन, सोना, चांदी और मंदिर भूमि से संबंधित भ्रष्टाचार के अनेक प्रकरण सामने आए हैं। इन विषयों पर न्यायालयों में भी संघर्ष जारी है।

4. मंदिरों की भूमि पर अवैध कब्जों को रोकने के लिए महाराष्ट्र में ‘एंटी लैंड ग्रैबिंग एक्ट’ लागू किया जाना चाहिए। इस मांग को महाराष्ट्र मंदिर महासंघ पिछले एक वर्ष से सरकार के समक्ष रख रहा है। गुजरात में यह कानून वर्ष 2023 से लागू है। महाराष्ट्र में यह कानून केवल वक्फ बोर्ड की भूमि की सुरक्षा के लिए लागू है। इसलिए हिन्दू मंदिरों की भूमि की सुरक्षा हेतु भी यह कानून लागू किया जाए। इसके लिए प्रत्येक मंदिर और न्यासी को व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाना चाहिए।

5. देवस्थान की भूमि के अभिलेखों से देवस्थान का नाम हटाकर ‘महाराष्ट्र शासन’ दर्ज किया जा रहा है। ऐसे मामलों पर मौन नहीं रहना चाहिए। मंदिरों और धर्म से जुड़े विषयों के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है।

मंदिरों की समृद्ध विरासत का संरक्षण हमारा कर्तव्य ! – सद्गुरु सत्यवान कदम

सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरु सत्यवान कदम ने कहा कि मंदिरों की समृद्ध विरासत का संरक्षण करना हम सभी का कर्तव्य है। प्राचीन काल में मंदिर धर्मशिक्षा के प्रमुख केंद्र हुआ करते थे। मंदिरों के माध्यम से हिन्दू समाज सभी भेदभाव भूलकर संगठित होता था। जन्म से हिन्दू व्यक्ति को कर्म से हिन्दू बनाने का कार्य मंदिर ही करते थे।

उन्होंने कहा कि आज हिन्दुओं में धर्मशिक्षा का अभाव होने के कारण अनेक लोग मंदिरों में दर्शन के लिए आते समय श्रद्धालु की अपेक्षा पर्यटक की भांति व्यवहार करते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति निःशुल्क धर्मशिक्षण वर्ग संचालित करती हैं। सनातन द्वारा निर्मित धर्मशिक्षा फलक मंदिरों में लगाने से भक्तों तक धर्मशास्त्र की जानकारी पहुंचेगी और उनकी श्रद्धा सुदृढ़ होगी। इसलिए मंदिरों को पुनः धर्मशिक्षा के केंद्र बनाना आवश्यक है।

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