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नृसिंहवाडी (महाराष्ट्र) में हिन्दू जनजागृति समिति का ‘हिंदू धर्मसंस्कार शिविर’ संपन्न

संस्कार, संस्कृत भाषा और सनातन हिंदू संस्कृति का पुनर्जागरण समय की आवश्यकता! – सदाशिव ढवळेगुरुजी, सहमंत्री, ‘संस्कृत भारती’

उद्घाटन अवसर पर दीप प्रज्वलित करते हुए बाएं से: श्री संतोष देसाई, श्री सदाशिव ढवळेगुरुजी तथा श्रीमती मधुरा तोफखाने

श्रीक्षेत्र नृसिंहवाड़ी : आने वाले युद्धकाल में स्वयं, समाज और भारत के अस्तित्व की रक्षा के लिए संस्कार, संस्कृत भाषा तथा सनातन हिंदू संस्कृति का पुनर्जागरण अत्यंत आवश्यक है। यह मार्गदर्शन ‘संस्कृत भारती’ के सहमंत्री श्री सदाशिव ढवळेगुरुजी ने किया। वे यहां ‘श्री भानुदास प्रतिष्ठान’ में हिंदू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘हिंदू धर्मसंस्कार शिविर’ के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।

इस अवसर पर हिंदू जनजागृति समिति के श्री संतोष देसाई तथा सनातन संस्था की श्रीमती मधुरा तोफखाने उपस्थित थीं।

श्री सदाशिव ढवळेगुरुजी ने आगे कहा, “वर्तमान में विश्वभर में युद्ध जैसी परिस्थितियां बनी हुई हैं। ऐसे समय में शत्रु की शक्ति, उसकी कमजोरियों और उसकी सामर्थ्य को पहचानना आवश्यक है। केवल शक्ति के बल पर ही नहीं, बल्कि चातुर्य और युक्ति से भी बलशाली शत्रु का सामना करना समय की आवश्यकता है। इसलिए यह सदैव स्मरण रखना चाहिए कि अनेक परिस्थितियों में शक्ति से अधिक युक्ति श्रेष्ठ होती है।”

इस अवसर पर श्रीमती रेखाताई बोडस, कु. सविता खेराडकर तथा कु. उज्ज्वला खेराडकर ने भी मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम में नृसिंहवाड़ी स्थित ‘श्री वासुदेवानंद सरस्वती गोशाला’ के संस्थापक अध्यक्ष श्री संजय शिरटीकर, ‘कलागंधर्व प्रतिष्ठान’ के संचालक तथा ‘ब्राह्मण सभा नृसिंहवाड़ी’ के सचिव श्री बालासाहेब आलासकर, शिरोळ के श्री रविंद्र महात्मे दंपती सहित अनेक युवा उपस्थित थे।

शिविर की कुछ झलकियां

1. श्री ढवळेगुरुजी ने युवाओं से आवाहन किया कि, सांगली और कोल्हापुर में युवक-युवतियों को एकत्र कर संस्कृत भाषा वर्ग आयोजित किए जाएं तथा अधिक से अधिक लोगों को संस्कृत बोलने के लिए प्रेरित किया जाए।

2. शिविर में कपाळ (मस्तक) पर तिलक लगाने का प्रात्यक्षिक प्रस्तुत किया गया तथा एक विशेष ध्वनि-चित्रफीत (वीडियो) भी प्रदर्शित की गई।

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