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उत्तर प्रदेश : सामूहिक दुष्कर्म, धर्म परिवर्तन की धाराएं हटीं

आश्विन शुक्लपक्ष नवमी, कलियुग वर्ष ५११६

मेरठ (उत्तर प्रदेश) : राष्ट्रीय स्तर पर तहलका मचाने वाले खरखौदा के सामूहिक दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के मामले में पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस ने चार्जशीट में सामूहिक दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन की धारा हटा दी है। सिर्फ कलीम पर दुष्कर्म की धारा रखी गई है। विवेचना के दौरान ही पुलिस इस मसले पर विवादों में घिरी थी और उस पर सत्ता पक्ष के दबाव में आरोपियों को बचाने के आरोप लगे थे। चार्जशीट को लेकर विवाद न बढ़े, इसलिए पुलिस ने पहले ही विवेचना जारी है के सूत्र वाक्य का सहारा ले लिया है।

तीन जुलाई को खरखौदा के एक गांव में युवती ने सामूहिक दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया था। लड़की के गर्भाशय का एक हिस्सा भी आपरेशन कर निकाले जाने की बात सामने आई थी। पुलिस की विवेचना पर शुरू से ही सवाल उठ रहे थे। चार्जशीट ने उन आरोपों को और गंभीर कर दिया है। पुलिस ने विवेचना में पीड़िता के १६४ आइपीसी के बयान को दरकिनार रखते हुए सामूहिक दुष्कर्म की धारा ३७६घ को हटा दिया है। धर्म परिवर्तन की धारा २९५क को भी हटा दिया है। एफआइआर में सभी आरोपियों का चालान बराबर धाराओं में किया गया था, लेकिन पुलिस ने चार्जशीट में पूरी कहानी को ही बदल दिया। पुलिस ने तर्क दिया कि, सिर्फ अकेले कलीम ने ही युवती के साथ दुष्कर्म किया है। बाकी सभी आरोपियों को घर से भगाने और शपथ पत्र बनवाने का दोषी माना गया है। इतना ही नहीं युवती की फेलोफियन ट्यूब निकालने तक का चार्जशीट में जिक्र तक नहीं है। मास्टरमाइंड सनाउल्ला और प्रधान नवाब को पुलिस ने छेड़छाड़ और धोखाधड़ी की मामूली धाराओं में आरोपी बनाया है।

स्त्रोत : जागरण

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