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वैदिक धर्म का अधिष्ठान है ब्रह्म-तत्त्व : श्रीस्वामी ईश्वरानन्दगिरिजी महाराज

eshwaranandgiriji_maharajबीकानेर : पूज्य श्रीस्वामी संवित् सोमगिरिजी महाराज के श्रद्धेय गुरुदेव परमहंस परिव्राजकाचाय श्रीस्वामी ईश्वरानन्दगिरिजी महाराज, संस्थापक संवित् साधनायन, आबू पर्वत के संन्यास संस्कार के ६० वर्ष पूर्ण होने के पावन पर्व पर श्रीलालेश्वर महादेव मन्दिर के अधिष्ठाता श्रीस्वामी संवित् सोमगिरिजी महाराज द्वारा आयोजित हीरक जयन्ती गुरुपूर्णिमा महोत्सव का आयोजन पार्क पैराडाइज में किया गया। श्रीस्वामी संवित् सोमगिरिजी ने कहा कि पूज्यश्री से पूर्व भी कई बार बीकानेर की धरा को पावन कर चुके है। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु कोई व्यक्ति नहीं होता गुरु एक सर्वव्यापक तत्व है। जिससे सम्पर्क स्थापित करने के लिए सतत् गुरु की श्रद्धापूर्वक सेवा एवं गुरुमुख से सत्संग का श्रवण करना आवश्यक है। उपस्थित साधकों को उद्बोधित करते हुए श्रीस्वामी ईश्वरानन्दगिरिजी महाराज ने कहा कि गुरुपूर्णिमा महोत्सव में हम गुरु शक्ति का आवाहन हमेशा से करते आये हैं, करते रहेंगे। आज साक्षात अवतरण गुरु शक्ति का होना चाहिए। गुरुपूर्णिमा जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर गुरुतत्व का चिन्तन कर रहे हैं, अनुसंधान कर रहे हैं यह वैदिक दर्शन का उच्चतम शिखर है। दो तरह की धाराएँ हैं वैदिक दर्शन में-एक तत्व विचार को लेकर तत्व दर्शन और दूसरा जीवन दर्शन। गुरुपूर्णिमा अमृत का उत्सव है, वसन्त पंचमी सरस्वती का जन्म दिवस है, विद्या के बिना अमृत नहीं मिल सकता। जो हमें अमृत प्रदान करती है वह विद्या है। शरदपूर्णिमा के दिन लक्ष्मी हाथ में अमृत लेकर आती है। चैतन्य के विकास के लिए गुरुतत्व की आवश्यकता होती है। जीवन का सत्य चाहते है तो उसके लिए गुरु की आवश्यकता होती है।

eshwaranandgiriji_maharaj_satkarश्रीस्वामीजी ने कहा कि, यज्ञ को लेकर भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की व्याख्या गीता में की है। यज्ञ का अर्थ ही है कि दिव्य-दृष्टि को लेकर जीवन को जीना तथा शरीर-दृष्टि को धीरे-धीरे छोड़ते जाना। जीवन निर्माण के लिए कर्म करना आवश्यक है। मनुष्य कर्म को लेकर बन्धन में बंध जाता है। मनुष्य का प्रत्येक कर्म यज्ञार्थ होना चाहिए। ब्रह्म और धर्म दोनों तत्व ही अत्यन्त गूढ़ हैं इनकी सही व्याख्या होनी चाहिये। धर्म और पाप साथ-साथ रहते हैं। एक ही द्वार है बीच में। सत्य की अनुभूति के लिए उपासना करनी पड़ती है। धर्म की बात जीवन की ही बात है। जीवन के दर्शन को हमें कैसे जीना चाहिये इसके लिए ऋषियों ने जगत के आधार को ढूंढा। इस जगत का तत्व क्या है का विचार करते हुए जगत के कारण में गये और उसका नाम रखा ब्रह्म। ये केवल विचार मात्र नहीं है। यह हमारे जीवन का लक्ष्य है। ये वैदिक धर्म का प्राण है, वैदिक धर्म की आत्मा है।

eshwaranandgiriji_maharaj_bhaktइससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलित कर हुआ। संवित् सोमगिरिजी महाराज, मंत्री राजकुमार रिणवा, विधायक डाॅ. गोपाल जोशी, फलौदी के पूर्व विधायक ओम जोशी, पूर्व महापौर भवानी शंकर शर्मा, कुलपति महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय डाॅ. चन्द्रकला पाडिया, डाॅ. ऐ.के. गहलोत, डाॅ. एच.पी. व्यास, उद्योगपति सुभाष मित्तल, श्रीराम अग्रवाल, द्वारका प्रसाद पच्चीसिया, नरेश चुग, विकास अग्रवाल, जिला रसद अधिकारी पार्थसारथी ने श्रीस्वामी ईश्वरानन्दगिरिजी का माल्यार्पण कर स्वागत किया तथा सन्त-वृन्दों का स्वागत ब्र. सुरेन्द्र ने किया। पुखराज शर्मा ने स्वागत गीत, सुनन्दन व विवेक सारस्वत ने भजन तथा स्तोत्र पाठ ‘शिवाय् गुरवे नमः’ भावना एवं कविता शर्मा ने प्रस्तुत किया। पूज्य श्रीस्वामीजी द्वारा ‘जगद्गुरु श्रीआद्य शंकराचार्य भगवान-जीवनी (बालकों के लिए उपयोगी) पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक को वरिष्ठ साधक जगदीश चन्द्र शर्मा ने अपने माता-पिता की स्मृति में प्रकाशित करवाया है। इस अवसर पर आबू पर्वत से स्वामी नारायणगिरिजी, महेश्वर से स्वामी राजनरहरिगिरजी, कुशीनगर से स्वामी नृसिंहदासजी, अजमेर से स्वामी संवित् भास्करगिरिजी, जोधपुर से स्वामी भूमानन्द सरस्वतीजी, जयपुर से संवित् आशीष, भीनासर से स्वामी सुबोधगिरिजी एवं राजेश्वर गिरि जी आदि सन्त-वृन्दों ने भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम को सफल बनाने में जेठमल अरोड़ा, विनोद गोयल, डाॅ. अशोक शर्मा, अविनाश मोदी, अमित जांगिड़, मगन बिस्सा, एडवोकेट शैलेश गुप्ता, राजीव मित्तल, हरीश चन्द्र शर्मा, बजरंग लाल शर्मा, रूपसिंह भाटी, घनश्याम स्वामी, सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सहयोग दिया। मंच संचालन विनोद शर्मा ने किया।

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