
श्रीनगर : पूरे कश्मीर में पोस्टर लगाकर वार्निंग दी गई है कि लड़कियां स्कूटी न चलाएं। उसमें लिखा है, ”हम सभी लड़कियों से गुजारिश करते हैं कि स्कूटी न चलाएं। अगर हमने किसी लड़की को स्कूटी चलाते देख लिया तो स्कूटी और लड़की दोनों को जला देंगे।” यह भी धमकी दी गई है कि अलगाववादियों के बंद के दौरान किसी ने दुकान खोली तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
किस संगठन ने लगाए पोस्टर
– अंग्रेजी और उर्दू में लिखे पोस्टर ‘संघबाज एसोसिएशन ऑफ जम्मू एंड कश्मीर’ के नाम से लगाए गए हैं। उसके साथ आगे लिखा है- कश्मीर में पत्थर फेंकने वालों का संगठन।
– पुलिस पोस्टर लगाने वालों की तलाश कर रही है। लोगों से पुलिस ने अपील की है कि परेशान न हों। हम सुरक्षा की गारंटी देते हैं। जो स्कूटी पर जाएंगी, हम उनका खासतौर पर ध्यान रखेंगे।
– इस बीच, कश्मीर में २३वें दिन भी प्रदर्शन जारी रहा। सीएम महबूबा मुफ्ती सुबह महिला कॉलेज श्रीनगर में बनाए गए सीईटी के एक्जाम सेंटर का जायजा लेने पहुंचीं। वहां स्टूडेंट्स के पेरेंट्स ने उनका विरोध किया।
– पेरेंट्स का कहना था कि आप यहां क्यों आईं, आपके आने से हल्ला मच सकता है और बच्चों का पेपर बिगड़ सकता है। इसके बाद सीएम वहां से लौट गईं।
हिजबुल कमांडर रैली में दिखा, फिर गायब हो गया
– छुट्टी का दिन होने से रविवार को घाटी में बडे स्तर पर प्रदर्शन हुए। पुलवामा, कुलगाम, शोपियां तथा श्रीनगर के कई इलाकों में कर्फ्यू जारी रखा गया।
– इसके बावजूद हजारों प्रदर्शनकारी सड़क पर आए और सुरक्षाबलों पर जमकर पथराव किया।
– पुलवामा की एक रैली में हिजबुल कमांडर आतंकी अबू दुजाना के देखे जाने की सूचना मिली। जब तक पुलिस वहां पहुंचती आतंकी भाग चुका था।
– बताया गया कि वह रैली का उत्साह बढ़ाने आया था। सोपोर में भी पथराव बाद बल प्रयोग करना पड़ा।
– आपको बता दें कि आतंकी बुरहानी वानी की मौत के बाद से कश्मीर घाटी में प्रदर्शन हो रहे हैं। अलगाववादियों ने ५ अगस्त तक बंद का एलान किया है।
बुजुर्गों को भी थप्पड़ मार देते हैं १० साल के बच्चे
– सीएम महबूबा मुफ्ती ने एक चैनल से बातचीत में कहा कि अगर कोई बुजुर्ग दुकान खोलता है तो १० साल का बच्चा भी उसे थप्पड़ मार देता है। शादी में जा रही लड़कियों को रोककर बच्चे उनके कपड़ों पर सवाल उठाते हैं।
– सीएम ने कहा कि आज से १० साल बाद हमारे बच्चों का क्या होगा ? बिजनेसमैन और अफसर अपने बच्चों को बाहर भेज देते हैं। गरीब भी सब कुछ बेचकर पढाई के लिए बच्चों को बाहर ही भेजना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि बच्चों को कोई तकलीफ न हो।








