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जयगढ़ के किले का खजाना !

आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी, कलियुग वर्ष ५११६

राजस्थान के कुछ खजानों की चर्चा समय समय पर होती रही है। इन्हीं में से एक है मान सिंह प्रथम का खजाना। मान सिंह अकबर का सेनापति था। माना जाता है कि १५८०  में उन्होंने अफगानिस्तान को जीत लिया था।

वहां से मुहम्मद गजनी के खजाने को लेकर वह हिंदुस्तान तो आ गया लेकिन उसने इसके बारे में अकबर को नहीं बताया। उसने इस खजाने को जयगढ़ किले में दफना दिया। यह माना जाता है कि उसने महल के नीचे तहखाने बनाए और खजाने को उसमें भर दिया।

कहा तो ये भी जाता है कि १९६०  में इमरजेंसी के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी इस खजाने की तलाश में जान लगा दी , कई महीनों तक खुदाई चलती रही, लेकिन उनकी ये खोज व्यर्थ गई।

हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि छह महीने के बाद खुदाई जब रुकी तो ट्रकों का काफिला किले से निकला। दिल्ली जयपुर रोड को आम आदमियों के लिए बंद कर दिया गया और फौजी ट्रकों में खजाने के प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचा दिया गया।

एक स्थानीय पत्रकार ने RTI के माध्यम से ये जानना चाहा कि क्या सरकार ने वाकई ऐसी कोई खुदाई कराई थी जिसमें खजाना निकला हो। लेकिन सरकार ने इस RTI का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया। इन लिंक्स पर क्लिक कर आप पूरा मामला पढ़ सकता है।

ये पूछा था पत्रकार ने RTI के माध्यम से

ये जवाब मिला था पत्रकार को

इस खजाने को लेकर एक और भी कहानी राजस्थान में प्रचलित है। ऐसा माना जाता है कि मान सिंह ने इस खजाने के बारे में जोधा बाई को बता दिया था। जोधा ने इस खजाने को फतेहपुर सीकरी स्थित एक मंदिर में रखवा दिया था।

वक्त की रेत में ये मंदिर दफन हो गया और साथ ही खो गया खजाने का रहस्य भी। स्थानीय लोग मानते हैं कि खजाना अभी भी उसी मंदिर में है।

स्त्रोत : अमर उजाला 

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