
मुंबर्इ – ‘भारत माता की जय’ कहने के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के टिप्पणी के बाद संगठन के एक शीर्ष पदाधिकारी भैयाजी जोशी ने शुक्रवार को दीनदयाल उपाध्याय अनुसंधान संस्थान में कहा है कि, वास्तव में ‘वंदे मातरम्’ ही राष्ट्रगान है।
उन्होंने कहा, वर्तमान में संविधान के अनुसार ‘जन गण मन’ हमारा राष्ट्रगान है। इसका सम्मान किया जाना चाहिए। इससे दुसरी भावना उत्पन्न होने का कोई कारण नहीं है। किंतु यदि कोई वास्तविक अर्थों पर विचार करता है तो ‘वंदे मातरम्’ हमारा राष्ट्रगान है।
जोशी ने कहा, ‘जन गण मन’ में राष्ट्र को ध्यान में रखकर भावनाएं व्यक्त की गर्इ हैं।
उन्होंने कहा, हालांकि ‘वंदे मातरम’ में जाहिर की गर्इ भावनाएं राष्ट्र की विशेषता और बनावट को रेखांकित करती हैं। यह दोनों गीतों के बीच का अंतर है। दोनों का सम्मान किया जाना चाहिए।
‘वंदे मातरम्’ बंकिम चंद्र चटटोपाध्याय की कविता है और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका बेहद महत्त्वपूर्ण रही। वर्ष १९५० में इसके दो छंद को राष्ट्रगीत का आधिकारिक दर्जा दिया गया।
स्त्रोत : लाइव्ह हिन्दुस्थान








