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न्यायालयद्वारा अवैध भोंपूके विरोधमें कार्रवाईके आदेश प्राप्त होनेपर भी पुलिस निष्क्रिय !

भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्दशी, कलियुग वर्ष ५११६

अतः हिन्दुओंकी यह अपेक्षा है कि ऐसी निष्क्रिय पुलिसपर न्यायालयको कडी कार्रवाई करनी चाहिए !

मुंबई : मुंबई उच्च न्यायालयद्वारा ये स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि पुलिसकी अनुमतिके अतिरिक्त मुंबई तथा नई मुंबई परिसरमें मस्जिदोंपर लगाए गए भोंपूके विरोधमें कार्रवाई करें । किंतु मुंबई उच्च न्यायालयके न्यायमूर्ति विद्यासागर कानडे तथा न्यायमूर्ति प्रमोद कोदके खण्डपीठके सामने यह स्पष्ट हुआ है कि इस आदेशकी पूर्तिके सन्दर्भमें गृहसचिव एवं पुलिस महासंचालकोंद्वारा अभीतक कुछ भी कार्रवाई नहीं की गई है । इस सन्दर्भमें खण्डपीठने दोनों तंत्रोंको प्रतिज्ञापत्र प्रस्तुत करनेके आदेश दिए हैं । इस याचिकाकी सुनवाई २७ सितम्बरको होगी । इस याचिकामें मुसलमानोंके एक संगठन तथा एक मुसलमानद्वारा हस्तक्षेप किया गया है; किंतु उनके मत परस्परविरोधी हैं । (इससे यह स्पष्ट होता है कि मुसलमान अपने पंथके सन्दर्भमें कितने जागृत होते हैं ! – संपादक, दैनिक सनातन प्रभात)

१. याचिकाकर्ता संतोष पाचलगने मुंबई उच्च न्यायालयमें इस मांगके लिए जनहित याचिका प्रविष्ट की है कि मुंबई तथा नई मुंबईमें मस्जिदोंपर अवैध भोंपू लगाए गए हैं, उसपर कार्रवाई की जानी चाहिए ।

२. इस याचिकामें हस्तक्षेप करते हुए मुस्लिम एकता फाऊण्डेशनद्वारा मूल याचिकाकर्ताका विरोध किया गया है । याचिका राजनीतिक दृष्टिसे प्रेरित कर इस संगठनने याचिकाद्वारा यह आरोप लगाया है कि केवल विशिष्ट धर्मको ही लक्ष्य किया जा रहा है । (इसमें राजनीतिक दृष्टिकोणका सम्बन्ध ही कहां आता है ? मस्जिदोंपर भोंगे लगानेके कारण सर्वोच्च न्यायालयद्वारा रात्रि १० से प्रातः ६ इस बजेकी अवधिमें ध्वनिप्रदूषणके लिए निर्धारित की गई मर्यादाओंका उल्लंघन हो जाता है । करोडों हिन्दुओंके साथ व्याधिपीडित धर्मांध तथा बालकोंको भी कष्ट पहुंचते हैं । जनहित हेतु होनेवाली याचिकामें किसी भी धर्मको लक्ष्य करनेका प्रश्न ही नहीं आता । ऐसा होते हुए भी मुस्लिम एकता फाऊण्डेशनका उद्देश्य ही षडयंत्रसे भरा है, यदि ऐसा प्रतीत हुआ, तो उसमें अनुचित बात क्या है ! – सम्पादक, दैनिक सनातन प्रभात)

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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