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हिन्दू समाज के अस्तित्व को अक्षुण्ण बनाए रखने में संतों की महती भूमिका – भैयाजी जोशी, सरकार्यवाह,

भाद्रपद शुक्ल पक्ष सप्तमी, कलियुग वर्ष ५११६

नागपुर : हिन्दू समाज के अस्तित्व को अक्षुण्ण बनाए रखने रखने में देश के संतों का महती योगदान है। अपने देश में हजारों वर्षों तक अनेक आक्रान्ताओं ने आक्रमण किया, धर्म-संस्कृति पर अघात किए, पर प्रत्येक संकट की घड़ी में संतों ने समाज का सतत मार्गदर्शन किया। यही कारण है कि हमारे धर्म और संस्कृति की रक्षा हो पाई। उन संतों के जीवन और सन्देश से वर्तमान पीढ़ी को अवगत करना आवश्यक है, ऐसा कहकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने तरुण भारत के ‘ओळख विदर्भातील संतांची’ उपक्रम की सराहना की। वे रविवार को तरुण भारत द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे।

ज्ञात हो कि नागपुर से प्रकाशित होनेवाले मराठी दैनिक ‘तरुण भारत’ ने ‘ओळख विदर्भातील संतांची’ शीर्षक से विदर्भ के संतों के संक्षिप्त जीवन और सन्देश पर आधारित लेखमाला चलाई थी। इस लेखमाला पर आधारित प्रश्न मंजूषा के पुरस्कार वितरण समारोह में संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी सभा को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे। भैयाजी ने बताया कि एक समाचार पत्र के रूप में तरुण भारत सदैव संतों और महापुरुषों से संदेशों को नियमित रूप से प्रकाशित कर समाज का प्रबोधन करता आया है। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ विचार बहुत मूल्यवान होते हैं, उसमें अपरम्पार शक्ति होती है। बुरे विचार सहजता से समाज में सहजता से फ़ैल जाते हैं, पर श्रेष्ठ विचारों को समाजाभिमुख बनाने के लिए कठोर परिश्रम करना होता है। संतों ने अनथक प्रयत्न कर अपने समाज को श्रेष्ठ विचारों से प्लावित किया है।

इस अवसर पर अंजनगांवसुर्जी स्थित देवनाथ पीठ के प्रमुख जितेन्द्रनाथ महाराज कार्यक्रम की बतौर अध्यक्ष व्यासपीठ पर विराजमान थे।

कार्यक्रम के अध्यक्ष जितेन्द्रनाथ महाराज ने अपने भाषण में कहा कि ‘संत हे चालते-बोलते विद्यापीठ होते।’ उन्होंने बताया कि जो समाज के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, वे ही सच्चे संत हैं। इस कार्यक्रम में नगर के गणमान्य नागरिक भारी संख्या में उपस्थित थे।

स्त्रोत : न्यूज भारती

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