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‘ए’ फॉर ‘अल्ला’ तो ‘एच’ फॉर ‘हिन्दू’, क्यों नहीं ?

हिन्दूओंको, ‘धर्मशिक्षण’ की कितनी आवश्यकता है, देखें . . .

एक उर्दू शाला के बाहर एक फलक पर लिखे गये 'ए' फॉर 'अल्ला' ये शब्द
एक उर्दू शाला के बाहर एक फलक पर लिखे गये ‘ए’ फॉर ‘अल्ला’ ये शब्द

आदिलाबाद (तेलंगाना) : तेलंगाना राज्य में आदिलाबाद जिले में स्थित भूक्तपुरा में अंग्रेजी माध्यम का उर्दू विद्यालय है।

इस विद्यालय के बाहर प्रवेश के संबंध में एक फलक लगाया गया है, इस पर ‘ए’ फॉर अल्ला’ शब्द स्पष्ट रूप से लिखा, दिखाई देता है !

क्या, किसी हिन्दु विद्यालय के बाहर ‘एच्’ फॉर ‘हिन्दू’ अथवा ‘जी’ फॉर ‘गणपति’ ऐसा लिखने का साहस हिन्दू कर सकते हैं ?

छोटे छोटे बच्चोंको बचपन से ही ‘धर्मशिक्षा’ देने का महत्त्व, जो मुसलमानोंकी समझ में आता है, वो हिन्दुओंकी समझ में नहीं आता ! इसीलिए आज विश्व में इस्लाम एक ‘सामर्थ्यवान’ धर्म माना जाता है, जब कि, ‘हिन्दू धर्म’ को भारत में भी कोई नहीं पूछता !

यहां अनेक हिन्दुओंको तो, ‘मैं हिन्दू हूं’ ऐसा कहने में भी शर्म आती है या, ऐसा कहने का ‘साहस’ ही नहीं होता !

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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