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“अल्पंसख्यक का दर्जा नहीं मिला तो हिंदुत्व को अपना लिया” !

भाद्रपद शुक्ल पक्ष षष्ठी, कलियुग वर्ष ५११६

अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) – उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ ईसाई धर्म छोड़कर हिंदू बनने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें अल्पसंख्यक दर्जा नहीं मिला तो वे हिंदू बन गए। २९  साल के राम पाल ने १०  साल तक ईसाई धर्म अपनाया। लेकिन इस दौरान उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं मिला तो वे हिंदू बन गए। उनके अलावा असरोई के सात अन्य परिवार भी ईसाई बन गए थे। लेकिन गांव का रिकॉर्ड रखने वाले जिला प्रशासन ने उन्हें अनुसूचित जाति ही माना।

यह लगभग एक दशक तक चलता रहा और वे न तो ईसाई थे और न दलित थे। इसके कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। राम पाल ने बताया कि अपने बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाने और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए वे खुद को एससी ही बताते थे। हम ईसाइयों के साथ मिलकर होली और दीवाली बनाते थे। लेकिन लोग पूछते जब तुम ईसाई हो तो दलित कैसे हो सकते हो?

गौरतलब है कि बुधवार को असरोई गांव के एक चर्च को "शुद्धिकरण" कार्यक्रम के जरिए एक चर्च को मंदिर बनाया गया था। इस दौरान ७२  दलित वाल्मिकी को फिर से हिंदू बनाया गया और इसे घर वापसी कार्यक्रम का नाम दिया। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद्, बजरंग दल और आर्य समाज शामिल थे। प्रशासन ने विवाद को टालने के लिए चर्च पर ताला लगा दिया था। साथ ही शिव के पोस्टर को भी उतार दिया गया।

ईसाई समुदाय ने आरोप लगाया कि इस तरह का परिवर्तन चुनावी फायदा लेने के लिए आरएसएस का षड़यंत्र है। उन्होंने कार्रवाई की मांग की है।

स्त्रोत : पत्रिका 

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