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आईएसआईएस ने स्कूलों में लागू किया ‘इस्लामिक पाठ्यक्रम’

भाद्रपद कृष्ण पक्ष चतुर्दशी, कलियुग वर्ष ५११६


सीरियाई शहर रक्का की सड़क पर आईएसआईएस आतंकी

काहिरा : सुन्नी आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) ने उत्तरी सीरियाई शहर रक्का के स्कूलों में दर्शनशास्त्र और रसायन-विज्ञान पढ़ाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। संगठन ने बच्चों के लिए नया 'इस्लामिक पाठ्यक्रम' लागू किया है। सीरिया में मानवाधिकार पर्यवेक्षण संस्था ने इसकी जानकारी दी। बताया जा रहा है कि आतंकवादियों ने यह कदम इसलिए उठाया क्‍योंकि उनके मुताबिक ये विषय अल्‍लाह के नियमों के खिलाफ शिक्षा देते हैं।

इस्‍लामिक एजुकेशन तैयार करने का निर्देश

'सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स' की रिपोर्ट में कहा गया कि आईएसआईएस से जुड़े इस्लामिक एक्सपर्ट्स ने मौजूदा पाठ्यक्रम से फिलॉसफी और केमिस्ट्री हटाने का फैसला किया है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि ये विषय अल्लाह के नियमों के खिलाफ शिक्षा देते हैं। इसके अलावा आईएसआईएस ने रक्का के सभी स्कूलों के टीचर्स और डायरेक्टर्स को इस्लामिक एजुकेशन सिस्टम तैयार करने को कहा है।

संगठन के अनुसार, उनके द्वारा नियुक्त किए गए बोर्ड मेंबर्स इसकी जांच करेंगे और इस्लामिक पाठ्यक्रम लागू न करने वालों को कड़ी सजा देंगे। आतंकी संगठन ने स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को सैलरी देने की घोषणा भी की है। गौरतलब है कि रक्का को इस्लामिक स्टेट का क्षेत्र घोषित किए जाने के बाद सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद ने यहां के स्कूल स्टाफ की तनख्वाह रोक दी थी।

                                                           इराक के स्कूल शरणार्थी शिविरों में तब्दील 

इस्लामिक स्टेट के सुन्नी आतंकवादियों का कहर झेल रहे उत्तरी इराक के ज्यादातर स्कूल अब शरणार्थी शिविरों में तब्दील हो चुके हैं। राहत एजेंसियों, स्थानीय अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इन शिविरों में ज्यादातर लोग यजीदी अल्पसंख्यक समुदाय के है जिन पर सुन्नी आतंकवादियों ने कहर बरपा है। यह समुदाय अरब और कुर्दो के बाद इराक का तीसरा बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है। इनमें शिया और सुन्नी दोनों मुसलमान दोनों शामिल हैं।

पिछले दो महीने के दौरान यजीदी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में हजारों किलोमीटर की यात्रा करके अपनी जान बचाने के लिए राहत शिविरों में पनाह ले रहे हैं। सरकारी मदद के अभाव में यह शिविर स्वंयसेवी और धर्मार्थ संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे हैं। कई शरणार्थियों ने अपना दुखड़ा रोते हुए कहा, "हम अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। पता नहीं आगे क्या होने वाला है। हमारी ईश्वर से बस इतनी प्रार्थना है कि वह हमें हमारे घरों तक वापस जाने का मौका दिला दे।"

राहत शिविर चलाने वाली संस्थाएं और उनके कर्मी शरणार्थियों की बदहाली देखकर दिल मसोस कर रह जाते हैं। वह उन्हें तत्काल राहत तो दे रहे हैं, लेकिन इन शरणार्थियों को सुरक्षित उनके घरों तक वापस पहुंचाने के बारे में वह भी कुछ करने मे असमर्थ हैं।

ऐसे ही एक राहतकर्मी ने हालात पर अफसोस जताते हुए कहा, "सरकार नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। अब इन बेसहारों का अल्लाह ही मालिक है।"  इस बीच यजीदियों के खिलाफ नए हमले करते हुए सुन्नी आतंकवादियों ने इस समुदाय के करीब ८० लोगों की हत्या कर दी है और उनकी महिलाओं और बच्चों का अगवा कर लिया है।

इराक में बिगड़ते हालात को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के साथ ही विश्व के कई देश मदद के लिए आगे आ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने जहां इस्लामी स्टेट पर कई तरह की पाबंदियों का एलान किया है, वहीं यूरोपीय संघ के देशों ने इराक में अपनी ओर से मदद की पेशकश की है।

                                           सुरक्षा परिषद ने छह इस्लामी आतंकवादियों को काली सूची में डाला  

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इराक और सीरिया में इस्लामी आतंकवादियों पर कार्रवाई करते हुए आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के प्रवक्ता समेत छह लोगों को काली सूची में डाला है। सुरक्षा परषिद ने अलगाववादियों को पैसा देने, हथियारों की आपूर्ति करने और नियुक्ति करने वालों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की भी बात कही।

१५ सदस्यीय परिषद ने सर्वसम्मत जिसे यह प्रस्ताव पारित किया, जिससे आईएस को कमजोर किया जा सकेगा। आतंकवादी संगठन अल-कायदा से अलग हुए संगठन आईएस और अल कायदा के सीरयाई संगठन नुसरा फ्रंट ने इराक और सीरिया में बड़े हिस्से पर कब्जा जमा रखा है।  

आतंकवादी संगठन आईएस को सुरक्षा परषिद ने काफी लंबे समय से काली सूची में डाला हुआ है, लेकिन नुसरा फ्रंट को इस वर्ष की शुरूआत में ही इस सूची में शामिल किया गया था।

स्त्रोत : दैनिक भास्कर

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