श्रावण अमावस्या, कलियुग वर्ष ५११६
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भोपाल (मध्यप्रदेश) – बेटा देश के काम आया यह सोचकर उनका सीना आज भी गर्व से चौड़ा हो जाता है, लेकिन सरकार की अनदेखी आंखों में आसू ला देती है। कारगिल युद्ध में शहीद लांस नायक दिलीप सिंह लिंगवाल का परिवार आज भी बाणगंगा की झुग्गी में रहने को मजबूर है। १५ साल बाद भी उन्हें प्लॉट नहीं मिला है। मुआवजे के लिए भी शहीद के पिता को अनशन में बैठना पड़ा था।
१५ साल पहले जुलाई के इन्हीं दिनों में सर्वेश्वरी देवी के पास खबर आई कि उनके लाड़ले और सबसे बड़े बेटे दिलीप सिंह ने भारत मां की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त कर ली है। दिलीप सिंह की बात निकलते ही मां की आंखों में पानी आ गया।
साड़ी से आंसू पोंछते हुए भरभराती आवाज में बोलीं, छुट्टी बिताकर नौ जुलाई को घर से गया था और १८ जुलाई को चिट्ठी आ गई। उसके साथियों का शव मिला, लेकिन हमें तो बेटे के आखिरी दर्शन भी नसीब नहीं हुए। उसका अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाए।
स्त्रोत : राजस्थान पत्रिका









