आषाढ शुक्ल पक्ष त्रयोदशी, कलियुग वर्ष ५११६
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कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) – देव भूमि हिमाचल प्रदेश के कण कण में बसे हैं देवी देवता। यहां पर बहुत से आस्था के केंद्र विद्यमान हैं। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के इंदौरा उपमंडल में काठगढ़ महादेव का मंदिर स्थित है। पठानकोट से बरास्ता इंदौरा से २२ किलोमीटर, मीरथल पंजाब से तीन किलोमीटर की दूरी पर एक ऊंचे टीले पर नदी के बाएं किनारे पर स्थित है। इसके दक्षिण में ब्यास नदी बहती है। इस धार्मिक स्थल पर दो नदियों का संगम होता है।
यह दुनिया का ऐसा एकमात्र मंदिर है जहां शिवलिंग ऐसे स्वरुप में विद्यमान हैं जो दो भागों में बंटे हुए हैं अर्थात मां पार्वती और भगवान शिव के दो विभिन्न रूपों को ग्रहों और नक्षत्रों के परिवर्तित होने के अनुसार इनके दोनों भागों के मध्य का अंतर घटता-बढ़ता रहता है। ग्रीष्म ऋतु में यह स्वरूप दो भागों में बंट जाता है और शीत ऋतु में पुन: एक रूप धारण कर लेता है।
स्त्रोत : हरी भूमि









