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‘बाजीराव-मस्तानी’ चलचित्र अर्थात केवल ‘विकृत रूप’ ! – ‘पानीपत’कार श्री. विश्वास पाटिल

इतिहास का घोर अनादर – ‘बाजीराव-मस्तानी’ चलचित्र केवल ‘वीभत्स रूप’ !

हिन्दुओंको इस चलचित्र का बहिष्कार कर ‘हिन्दू एकता’ दिखानी चाहिए !
क्या दिग्दर्शक भन्साळीद्वारा कभी अन्य पंथियोंके संदर्भ में ऐसे विकृत दृश्य दर्शाने एवं अभिनेता रणवीर सिंहद्वारा उसमें काम करने का साहस दिखाया गया होता ?

‘पानीपत’कार श्री. विश्वास पाटिल

मुंबई : विवादजनक ‘बाजीराव-मस्तानी’ चलचित्र अर्थात केवल वीभत्स रूप है, ऐसे शब्दों में बाजीराव पेशवा का जीवनपट प्रस्तुत करनेवाले ‘पानीपत’कार तथा प्रसिद्ध इतिहास संशोधक श्री. विश्वास पाटिलद्वारा इस चलचित्र पर आलोचना की गई।

श्री. विश्वास पाटिल ने आगे कहा कि, ‘चलचित्र स्वतंत्रता’ के नाम पर ‘हनुमानजी को गणपति’ एवं ‘गणपति को हनुमानजी’ जैसे प्रस्तुत करना कैसे संभव है ?

‘बाजीराव पेशवा’ समाज के नायक हैं। केवल योगायोग दिखाना था, तो भन्साळी को अपना ब्रैंड उपयोग में लाना चाहिए था। बाजीराव पेशवा के नाम का उपयोग क्यों किया गया ?

राजघराने की स्त्रियोंको न्यून वस्त्रों में दर्शा कर दिग्दर्शक ने बडी भूल की है ! उस समय स्त्रियां परदे की आड में रहा करती थीं। ऐसी स्थिति में उनके लिए स्वयं नृत्य करना कैसे संभव है ?

‘लावनी’ बाद में अस्तित्व में आई, तो एक ‘लावनी’ के रूप में ‘पिंगा’ गीत कैसे प्रस्तुत कर सकते हैं ?

संक्षेप में कहें, तो ये सब अत्यंत निंदनीय हैं !

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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