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यदि ‘हिंदु राष्ट्र’ की आवश्यकता है, तो हिंदुओंके लिए दूसरे राष्ट्र की स्थापना करे ! – नेपालके मंत्

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष अष्टमी, कलियुग वर्ष ५११६

नेपालके मंत्री कर्णबहाद्दूर थापाकी उद्दंडता !

हिंदुओ, भारत एवं नेपालके साथ संंपूर्ण विश्वमें हिंदु धर्मकी पुनस्र्थापना करने हेतु शपथ लें !

टेक्सास (अमेरिका) – नेपालमें होनेवाला हिंदुओंका धर्मपरिवर्तन रोकने एवं नेपालको ‘हिंदु राष्ट्र’ घोषित करने हेतु अमेरिकाके हिंदु जागरन नेपाल संगठनद्वारा नेपालके उद्योग तथा वाणिज्य मंत्री कर्णबहाद्दूर थापाको निवेदन दिया गया । इस समय उन्होंने ‘यदि आपको ‘हिंदु राष्ट्र’की आवश्यकता है, तो आप हिंदुओंके लिए दूसरा ‘हिंदु राष्ट्र’ स्थापित करे’, इस प्रकार उद्दंडतासे उत्तर देकर संगठनके पदाधिकारियोंको बाहर निकाला ।.

१.’नेकपा एमाले समर्थित प्रवासी नेपाली मंच संस्था’ द्वारा आयोजित कार्यक्रममें सम्मिलित होने हेतु कर्णबहाद्दूर थापा अमेरिकाके टेक्सास नगर गए थे । इस अवसरपर हिंदु जागरन नेपालकी अर्ंतराष्ट्रीय संयोजिका सवितादेवी थापाने नेपालके प्रधानमंत्रीके नामपर कर्णबहाद्दूर थापाको कथित निवेदन दिया; परंतु उन्होंने उसे अस्वीकार किया ।

२. सवितादेवी थापाने विश्वमें ५० से अधिक इस्लामी राष्ट्र एवं इससे अधिक ईसाई राष्ट्र है इस बातपर उनका ध्यान केंदि्रत करते हुए पूछा कि नेपालमें ८१ प्रतिशतसे अधिक जनता हिंदु होते हुए भी नेपाल ‘हिंदु राष्ट्र’ क्यों नहीं हो सकता ?, इसपर उन्होंने उपर्युक्त उत्तर दिया ।

३. निवेदन अस्वीकार करनेके संदर्भमें वहां उपसि्थत नेपाली नागरिकोंद्वारा थापाको पूछा जानेपर उत्तरमें उन्होंने कहा कि नेपाल सेक्यूलर (धर्मनिरपेक्ष) ही ठीक है । हमें जनताने सेक्यूलरिज्म (धर्मनिरपेक्षता) के लिए ही मतदान किया है । हमे किसी भी व्यकि्तने  हिंदु राष्ट्रके लिए मतदान नहीं किया है ।

४. उस समय हिंदु जागरन नेपालके समर्थकोंके ‘यह निवेदन आप केवल प्रधानमंत्रीतक पहुंचाएं’, ऐसा कहनेपर उन्होंने कहा, ‘मेरा परिवार हिंदु है;  परंतु मेरी हिंदु धर्मपर श्रद्धा नहीं है’ ।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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