आेल्ड गोवे का ‘हात कातरो’ खम्भा संरक्षित स्मारकों की सूची में अंतर्भूत करने की प्रक्रिया आरंभ !

अद्ययावत (अपडेट)

हिन्दू जनजागृति समिति के प्रयासों को सफलता !

पणजी (गोवा) : हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा की गई मांग एवं आंदोलन की चेतावनी पर ध्यान देकर गोवा राज्य पुरातत्व एवं पुराभिलेख विभाग द्वारा आेल्ड गोवा के ‘हात कातरो’ खम्भे को संरक्षित स्मारकों की सूची में समाविष्ट करने की प्रक्रिया आरंभ की गई है । हाल ही में विविध तज्ञ तथा संबंधित विभाग के अधिकारियों के सम्मिलित संवर्धन समिति की बैठक में ‘हात कातरो’ खम्भों के विषय पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया ।

पिछले ४ वर्षेां से हिन्दू जनजागृति समिति ‘हात कातरो’ खम्भे को संरक्षित स्मारक घोषित करने हेतु प्रयास कर रही है । समिति द्वारा सूचना अधिकार में ‘हात कातरो’ खम्भे के विषय में अत्यंत विश्‍वसनीय जानकारी, ऐतिहासिक संदर्भ एवं तपशील प्राप्त किया गया है । इस पूरी जानकारी की प्रतियां (कॉपी) जोड कर समिति द्वारा मुख्यमंत्री एवं पुरातत्व विभाग को समय समय पर ज्ञापन देकर ‘हात कातरो’ खम्भे की सुरक्षा के विषय में चिंता व्यक्त की गई थी । साथ ही बढते नगरीकरण एवं यातायात के कारण इस वास्तु को संकट उत्पन्न होने से उसे सुरक्षा मिलनी चाहिए थी; परंतु इस वास्तु को संरक्षित स्मारक का स्तर न देने के कारण उसे कोई सुरक्षा नहीं मिल रही थी ।

इस संदर्भ में अन्य वर्तमानपत्र में उलटे-पलटे लेख भी प्रकाशित हुए हैं । साथ ही ‘आप’ समान राजनीतिक पक्ष द्वारा स्वयं के प्रचार का पोस्टर भी ‘हात कातरो’ खम्भे पर चिपका कर असंवेदनशीलता की चरम सीमा का उल्लंघन किया गया था । हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा ‘आप’ के विरुद्ध परिवाद प्रविष्ट किया गया है । साथ ही फोंडा में बडा आंदोलन कर राज्य एवं केंद्र शासन से ‘हात कातरो’ खम्भे को संरक्षित स्मारक घोषित करने की जोरदार मांग की गई है । सभी घटनाक्रम की सूची बना कर पुरातत्व एवं पुराभिलेख विभाग की संचालिका ने ‘गोवा पुरातन स्मारक एवं ऐतिहासिक वास्तु जतन कानून १९७८ एवं नियम १९८०’ के अनुसार स्थापित ‘संवर्धन समिति’ के समक्ष ‘हात कातरो’ खम्भे का विषय चर्चा हेतु एवं अगली कार्यवाही के लिए रखा गया है । इस विषय में पुरातत्व एवं पुराभिलेख विभाग की संचालिका मेंडेरा ने पत्र द्वारा समिति को सूचित किया है । तदुपरांत सूत्रों द्वारा जानकारी मिली कि ‘संवर्धन समिति’ की बैठक आयोजित कर इस बैठक में ‘हात कातरो’ खम्भे का विषय चर्चा के लिए रखा गया था ।

स्वाभिमान हेतु बलिदान देनेवाले गोमंतकियों का स्मृतिस्तंभ ‘हात कातरो’ खम्भा

‘हात कातरो’ खम्भा स्वाभिमान हेतु बलिदान देनेवाले गोमंतकों का एक प्रतीक है । उनका वह स्मृतिस्तंभ है । यदि धर्मसमीक्षण सभा के (इाqन्क्वजिशन) के नाम पर पोर्तुगिजों द्वारा गोमंतकों पर किए गए भयानक अत्याचार का यह स्तंभ महत्त्वपूर्ण साक्ष्य है । यदि ‘हात कातरो’ खम्भे को संजोया गया, तो अगली पीढी के मन में अपने ‘पूर्वजों के बलिदान’ का भान जागृत रहेगा । पराक्रम एवं इतिहास की स्मृति जागृत रखनेवाली वस्तु एवं वास्तुओं का बडा महत्त्व है । इतिहास की पुनरावृत्ति न होने के उद्देश्य से किसी राष्ट्र पर विदेशियों अथवा जुलमी राजसत्ताओं द्वारा किए गए अत्याचार के संकेत आज जर्मनी, अमरीका, एवं रूस समान राष्ट्रों में संजोए जा रहे हैं । इसलिए इस ‘हात कातरो’ खम्भे का जतन होना अत्यंत आवश्यक है ।


२० अप्रैल २०१४

‘हात कातरो खांब’, ऐतिहासिक धरोहरके रूपमें जतन करें !

मुख्यमंत्रीसे हिंदू जनजागृति समितिकी मांग

ऐसी मांग क्यों करनी पडती है ? क्या प्रशासनको ऐतिहासिक वास्तुओंका महत्त्व ज्ञात नहीं है ?

पणजी (गोवा) : ओल्ड गोवा स्थित ‘हात कातरो खांब’ स्वाभिमान हेतु बलिदान देनेवाले गोमंतकियोंका प्रतीक है । वह उनका ‘स्मृतिस्तंभ’ है । ‘हात कातरो खांब’ ऐतिहासिक वास्तुके रूपमें जतन करें, हिंदू जनजागृति समितिने गोवाके मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकरको एक आवेदन द्वारा ऐसी मांग दी है ।

इस आवेदनमें कहा गया है कि ‘हात कातरो खांब’ आज भी पोर्तुगीज शासनकर्ताओंद्वारा गोमंतकके हिंदुओंपर किए अनन्वित अत्याचारोंकी साक्ष दे रहा है; किंतु आज उसकी दुरवस्था हो गई है । खंभेकी दो कडियां कोई तोडकर ले गया है । उस खंभेको संरक्षक अहाता(कंपाउंड) नहीं है । खंभेका इतिहास बतानेवाला कोई भी फलक वहां नहीं है । `हात कातरो खांब’ गोमंतकों हेतु लांछन न होकर, स्वाभिमान हेतु बलिदान देनेवाले गोमंतकियोंका प्रतीक है ।

`हात कातरो खांब ’ एक ऐतिहासिक धरोहरके रूपमें जतन करनेके साथ ही खंभेकी सुरक्षा हेतु संरक्षक दीवार स्थापित करना, खंभेके निकट बडे अक्षरोंमें लिखाईवाला फलक लगाना, गोमंतकियोंमें जो इतिहासके अभ्यासी तथा प्रज्ञावान माने जाते हैं, फलक बनाने हेतु ऐसे विद्वानोंकी सहायता लेना, खंभेके रखरखाव तथा सुरक्षा हेतु प्रशासनकी ओरसे व्यवस्था करना, गोवाके पर्यटन स्थलोंमें अधिकृत पद्धतिसे प्रशासन इस खंभेको सम्मिलित करे तथा प्रशासनके संकेतस्थलमें भी उसका निर्देश करे, समितिने आवेदनद्वारा ऐसी मांगें भी दी हैं । इस आवेदनकी प्रति पुरातत्व विभागके मंत्री श्री. सुदिन ढवळीकरके साथ विद्यमान सांसद श्री. श्रीपाद नाईक, गोवा विधानसभाके विरोधी पक्षनेता श्री. प्रतापसिंह राणेको भेजी गई हैं ।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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