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‘हिन्दू संहति’ संगठन के संस्थापक अध्यक्ष श्री. तपन घोष साहस पुरस्कार से सम्मानित

देश को क्षात्रतेज की आवश्यकता ! – तपन घोष

tapan_ghoshदायीं ओर से सर्वश्री श्रीकांत ताम्हनकर पांडुरंग बलकवडे, तपन घोष (मानपत्र का स्वीकार करते हुए),
गिरीश प्रभुणे, उमाकांत केंढे

पुणे – सर्व आध्यात्मिक अधिकारी व्यक्ति सत्त्वगुण की वृद्धि करने के संदर्भ में वक्तव्य देते हैं, वह उचित ही है; किंतु केवल सत्त्वगुणसे नहीं चलेगा, अपितु वर्तमान में रजोगुण की भी(क्षात्रवृत्ति की भी) आवश्यकता है ।

पुणे नगर हिन्दू महासभा तथा स्वतंत्रतावीर सावरकर स्मृति प्रतिष्ठान द्वारा ११ जुलाई को केसरी वाडा में लोकमान्य सभागृह में पश्चिम बंगाल के हिन्दू संहति संगठन के संस्थापक अध्यक्ष श्री. तपन घोष को साहस पुरस्कार से सम्मानित किया गया । उस समय पुरस्कार का उत्तर देते समय उन्होंने वक्तव्य दिया, कि ‘सत्त्वगुण का बहाना कर अपनी अकार्यक्षमता छिपाने का प्रयास करना अनुचित है । भारतदेश में अल्प मात्रा में रहनेवाला रजोगुण (क्षात्रतेज) की वृद्धि कर धर्म एवं राष्ट्र रक्षा का कार्य करने का समय आ गया है ।’ शाल, श्रीफल, स्मृतिचिह्न, मानपत्र इस पुरस्कार का स्वरूप था । स्वतंत्रता वीर सावरकर द्वारा मार्सेलिस बंदरगाह से सागर में साहसी छलांग लगाने के स्मरणार्थ इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था । उस समय ज्येष्ठ इतिहासतज्ञ श्री. पांडुरंग बलकवडे, ज्येष्ठ विचारवंत श्री. गिरीश प्रभुणे, पुणे नगर हिन्दू महासभा के अध्यक्ष श्री. उमाकांत केंढे तथा स्वतंत्रतावीर सावरकर स्मृति प्रतिष्ठान के श्री. श्रीकांत ताम्हनकर उपस्थित थे । उस समय श्री. बलकवडे ने ‘बिग्रेड : वास्तविकता एवं आभास’ इस विषय पर व्याख्यान दिया ।

श्री. तपन घोष द्वारा किए गए मार्गदर्शन के महत्त्वपूर्ण सूत्र !

१. जब मुसलमान अथवा ईसाईयों के साथ युद्ध होता है, तब हिन्दू पराजित नहीं होते । हिन्दू लडाई से पूर्व अथवा पश्चात ही पराजित होते हैं ! आप कुछ भी नहीं कर सकते, यह बताकर लडने से पूर्व ही हिन्दुओं का खस्सीकरण किया जाता है अथवा लडाई के पश्चात हिन्दू नेतृत्व द्वारा करार किया जाता है तथा उसमें भी निरंतर हिन्दुओं की पिटाई की जाती है; इसलिए हिन्दुओं को एक साहसी नेतृत्व की आवश्यकता है ।

२. देश की किसी भी सीमा पर किया जानेवाला आक्रमण देश के विभाजन का एक षडयंत्र है । जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल तथा आसाम, इन राज्यों में देश का विभाजन आरंभ हो गया है । केवल भारतीय सेना के कारण ही कश्मीर भारत में है; किंतु वही सेना वहां के हिन्दुओं को कश्मीर में स्थापित कर सकने मेंअसमर्थ रही है । अतएव देश का विभाजन करनेवालों का आवाहन स्वीकार कर उसे लौटाने के लिए सिद्ध होना चाहिए ।

३. मैं गत ३१ वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में कार्यरत हूं । राष्ट्रीय स्वयंंसेवक संघ का स्वयंसेवक, प्रचारक होकर भी मुझे खेदपूर्वक यह कहना पडता है, कि संघ ने देश के विभाजन का आवाहन स्वीकार कर उसे लौटाने के प्रयास नहीं किए हैं । वर्ष १९९० में कश्मीर से लक्षावधि हिन्दुओं को विस्थापित होना पडा था । संघ ने काश्मीर का आवाहन स्वीकार नहीं किया, तो क्या वे आसाम, बंगाल इन राज्यों का आवाहन स्वीकार करेंगे ? उन्होंने कश्मीर को मुक्त किया, तो क्या वे बंगाल तथा आसाम राज्यों को भी मुक्त करेंगे । (क्या अभी वास्तव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आत्मचिंतन कर धर्मरक्षा तथा राष्ट्ररक्षा का कार्यक्रम करेगा ? – संपादक, दैनिक सनातन प्रभात) 

४.  जो हिन्दू बहादुर हैं, उन्हें क्षत्रिय का स्तर देना चाहिए । लडना एक धर्मकार्य है, यह उन्हें बताना पडेगा । उनका मनोधैर्य उच्च होना चाहिए । उन्हेंसाथ देने के लिए पूरीतरह से सहयोग करना चाहिए । उन्हें यह विश्वास दिलाना चाहिए, कि आज के अर्जुन आप ही हैं ।

५. बंगाल में वर्तमान में प्रतिदिन हिन्दू-मुसलमानों में १०० विवाद होते हैं । हिन्दू युवतियों को लव जिहाद में फंसाया जाता है । हिन्दू संहती ने उन्हें बचाने का कार्य आरंभ किया है ।

६. सर्व धर्म समान हैं । सर्व धर्म में अच्छी सीख दी गई है, ऐसा तत्त्वज्ञान बतानेवालों ने क्या कुरान के २ पन्ने भी पढे हैं ?, क्या बाईबल के ४ पन्ने पढे होंगे ? कुराण, बाईबल बिना पढे ही सर्व धर्मों में समान सीख दी है, ऐसा वे निश्चितरूप से कैसे कह सकते हैं ? सर्वधर्मसमभाव की सीख, यह समाज को लगी एक कोढ है । इससे समाज को बचाना चाहिए ।

७. रामकृष्ण मिशन के साधुओं द्वारा सर्व धर्म समान हैं, यह मिथ्या बताया जाता है । समाजवादी अथवा अन्य धर्मियों द्वारा सर्वधर्मसमभाव की बातें की जानी ठीक है; किंतु जब भगवे वस्त्र धारण करनेवालों की ओर से सर्वधर्मसमभाव बताया जाता है, तब वह समाज के लिए अत्यंत हानिकारक रहता है । अतः कृपया आप अपने घर में बच्चों पर सर्वधर्मसमभाव के संस्कार न करें ।

ब्रिगेड के मिथ्या इतिहास के संदर्भ में फटकारते हुए साथ ही उनके हिन्दूद्रोह एवं इतिहासद्रोह के संदर्भ में निर्भयता से बोलनेवाले श्री. बलकवडे !

१. अहिंसा के विचार के कारण देश निरंतर दासता में फंसता जा रहा है । क्षात्रधर्म राष्ट्र की संस्कृति है । देश को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बताए गए क्षात्रधर्म की आवश्यकता है । यही विचार देश के लिए तारक है ।

२. हिन्दू समाज ने जो कुछ सहन किया है, उससे शिक्षा ग्रहण करने की आवश्यकता है ।

३. कुछ लोगों द्वारा हिन्दू धर्म के पंथ एवं जाति में जानबूझकर संघर्ष उत्पन्न किया जाता है । हिन्दू धर्म अन्यायकारी तथा समाज का विभाजन करनेवाला है, ऐसा अपप्रचार किया जाता है । अतः हिन्दू धर्मांतर्गत संघर्ष उत्पन्न कर देवी-देवता, राष्ट्रपुरुष तथा क्रांतिकारियों के संदर्भ में संभ्रम निर्माण किया जा रहा है । इससे हिन्दू समाज का विभाजन हो रहा है; अतः उसका प्रतिकार करने की आवश्यकता है ।

४. जेम्स लेन ने उसके ‘हिन्दू किंग इन इस्लामिक इंडिया,’ इस पुस्तक में जिजाऊ महाराज, दादोजी कोंडदेव, शहाजी महाराज के संदर्भ में आपत्तिजनक लेखन किया था । इस पर पुणे के इतिहास संशोधकों ने लड कर उस पुस्तक पर पाबंदी लगाई थी । ब्रिगेड के लोगों ने केवल उस आपत्ति जनक लेख की लक्षावधि प्रति प्रकाशित कर गांवगांवमें वितरित की तथा अनिष्ट बातों का प्रचार किया । जेम्स लेन का जो उद्देश्य था, वह उसके कारण सफल हुआ । अतः वास्तव में ये लोग ही जेम्स लेन के दलाल हैं ।

५. इन लोगों के पास परायों का धन है । किसी भी प्रमाण के बिना इस मंडली द्वारा इतिहास का विकृत लेखन किया गया है । देश के युवकों को संभ्रमित करने का उनका षडयंत्र है । मुसलमान, ईसाई शत्रु हैं, यह त्वरित ध्यान में आता है; किंतु ब्रिगेड के समान लोग घरभेदी के समान कार्य कर रहै हैं । ऐसे लोगों की वास्तविकता पहचान कर उसका प्रतिकार करने के लिए सिद्ध होना चाहिए ।

क्षणिकाएं – श्री. घोष को संस्कृत मानपत्र प्रदान किया गया । पुणे नगर हिन्दू महासभा के श्री. संजय वैशंपायन ने मानपत्र का वाचन किया ।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात 

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