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लव-जिहाद के मामले में मुस्लिम जज ने फटकारा – ‘सैय्यद’ होकर भी ऐसा काम किया !

अहमदाबाद : गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जेड. के. सैयद ने एक मुस्लिम युवक की जमानत की अर्जी खारिज कर दी। उच्च न्यायालय के जज के. सैयद ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा, ‘तुमने अपनी मुस्लिम पहचान छिपाकर हिन्दू बनकर एक हिन्दू युवती से शादी की, तुम एक सैयद हो..’सैयद’ होते हुए तुम्हें ऐसा कुकृत्य नहीं करना चाहिए था।’

अश्मत अली नाम के मुस्लिम युवक की जमानत की अर्जी खारिज करते हुए जज ने कहा, ‘मैं तुम्हारी अर्जी को कैसे स्वीकार कर लूं ? तुम एक शादीशुदा इंसान हो, और फिर भी तुमने दूसरी शादी करने के लिए हिन्दू युवती से अपनी पहचान छुपाई और उसे धोखा दिया, मैं भी एक सैयद हूं और हम एक ही समुदाय के है -‘सैयद’…और सैयद मुस्लिमों के गुरु होते हैं।’

अश्मतअली सैयद घरेलू हिंसा और धोखाधड़ी करने के आरोप में पुलिस हिरासत में है। उसने अपनी पहचान छिपाते हुए हिन्दू समुदाय की एक युवती से दूसरी शादी की थी। आरोपी की पहली शादी हो चुकी है और उसके बच्चे भी हैं।

जज ने याचिकाकर्ता के वकील से जब याचिकाकर्ता की पहली बीवी के बारे में पूछा तो वकील ने कहा कि वह अपने सास -ससुर के साथ रह रही है। इस जवाब से जज संतुष्ट नहीं हुए और इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की।

तमाम वाद-विवाद के बाद अश्मतअली के वकील ने जमानत की अर्जी वापस लेने के लिए कहा। कोर्ट ने इसके लिए अनुमति दे दी। इससे पहले याचिकाकर्ता की जमानत की अर्जी सेशन कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि आरोपी एक मुस्लिम युवक है और उसने हिन्दू युवती से अपनी पहचान छिपा कर हिन्दू युवक बन कर धोखा किया है, यह अपराध काफी गंभीर है और ऐसे अपराधों को अगर हल्के में लिया गया तो समाज पर इसके घातक परिणाम देखने को मिल सकते है।

स्रोत : नवभारत

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