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मध्यप्रदेश में मिला १५०० साल पुराने प्राचीन मंदिरों का ‘खजाना’

नई दिल्‍ली – मध्यप्रदेश में एक प्राचीन विरासत का पता चला है। राजधानी भोपाल से ४८० किलोमीटर दूर सतना जिले के मैहर की कैमूर पहाड़ियों में लगभग १५०० साल पुराने मंदिरों का पता चला है, जिनके अस्तित्व प्रदेश के पुरात्तव विभाग ने खोज निकाले हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार गुप्त कालीन यह मं‌‌दिर चौ‌थी से पांचवी शताब्दी के बीच का है। इसके साथ ही यहां एक अत्यंत प्राचीन संस्कृति के निशान मिलने की संभावना जग गई है।

अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार कैमूर की पहाड़ियों में दो शिव मंदिरों के अलावा दो घरों के अस्तित्वों का पता चला है। पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय विभाग के आयुक्‍त अजातशत्रु ने बताया कि मनोरा गांव के छह टीलों की खुदाई में इनका पता चला है।

कैमूर की पहाड़ियों में ९९ जगह हुई ‌थी खुदाई

सतना जिले से ५० किलोमीटर दूर स्थित मनोरा गांव में पुरातत्वविदों ने खुदाई के लिए कुल ९९ बिंदू चयनित किए थे। उन्होंने बताया कि खुदाई का यह कार्य पुणे स्थित डेक्कन कालेज के पुरातत्वविद प्रमोद दंतवाते की मदद से चला। उत्तर और मध्य भारत में गुप्त वंश ३२० से ५५० ईस्वी के बीच अपने चरम पर था।

इस दौरान पूर्व में राज्य के उदय गिरी और विदिशा जिले में गुप्त वंशकालीन मं‌दिरों के काफी अवशेष मिले हैं। इसके अलावा राइसैन के सांची, पन्ना जिले के नाचना और सतना के भूमरा में प्राचीन सभ्यता की विश्व विरासत का पता चलता रहा है।

हाल में कैमूर की पहाड़ियों पर मिले मंदिरों के ये अवशेष भी उस महान सभ्यता का हिस्सा हैं। खुदाई टीम का नेतृत्व करने वाले उत्‍खनन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डीके माथुर बताते हैं कि मनोरा गांव में लगभग दो महीने की खुदाई के बाद इस विरासत का पता चला। जिनके गुप्त कालीन होने के संकेत मिल रहे हैं।

दो शिवमंदिरों के अलावा दो घरों के होने के संकेत

यहां मिली प्राचीन मूर्तियों में बनाए गए भगवानों के घुंघराले बाल, बड़ी ढाला ईंटों, लाल मिट्टी के बर्तनों, पत्‍थर और लोहे से बने घरों और विभिन्न बर्तनों से इसके गुप्त कालीन विरासत का होने के संकेत मिलते हैं।

इसके अलावा जिन खास चीजों का पता चला है उनमें विशेष डिजाइन वाले सीतू शिवलिंग भी शामिल है। माथुर बताते हैं कि उत्‍खनन में मिले अवशेषों से पता चलता है कि मंदिर चाकौर आकार का रहा होगा और पूरी संरचना अष्टकोणीय रही होगी।

जबकि इसकी बाउंड्री गोलाकार रही होगी। इसके अलावा यहां पानी की निकासी की भी विशेष व्यवस्‍था का पता चला है। वैसे इस क्षेत्र को तलैया का टीला नाम से भी जाना जता है।

खुदाई में मिला लोहे का काफी सामान

इसके अलावा लोहे के नाखूनों और मंदिर में लोहे की कई अन्य चीजें भी मिली हैं। वहीं पत्‍थर के बने दो साधार आलों का मिलना भी इसके गुप्त कालीन होने की ओर इशारा करता है।

इसके अलावा लोहे के भाले, तीर, लोहदंड, बड़ा चम्मच, पत्थर पीसने के औजार भी खुदाई में मिले। जबकि आटा पीसने के औजार, अभ्रक मिश्रित मिट्टी के बर्तनों, पत्थर के गहने के कुछ हिस्से भी मंदिर के दूसरे क्षेत्र में बहुतायत में पाए गए।

खुदाई में जुटे एक अधिकारी ने बताया कि ९९ जगहों पर की गई खुदाई में इन सब चीजों का पता चला है। इसके साथ ही विभाग ने भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण विभाग को इस क्षेत्र में और खुदाई शुरू करने के लिए आग्रह भेज दिया है।

स्त्रोत : अमर उजाला

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