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नई दिल्ली – शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने २१ जून को इंटरनेशनल योगा डे के आयोजन पर सवाल उठाए हैं। साथ ही, योग से सूर्य नमस्कार को अलग रखने पर उन्होंने मोदी सरकार की निंदा करते हुए कहा, ”हर मौके पर हम मुस्लिमों को वीटो क्यों दे देते हैं? अगर किसी धर्म की कुछ अच्छी बात है तो वह हर किसी को अपनाने में आपत्ति क्या है? आखिर नमाज के वक्त उनके सामने दीवार होती है, तो इसका मतलब क्या वह दीवार से सामने सिर झुका रहे हैं?” बता दें कि योग में सूर्य नमस्कार को शामिल करने पर कई मुस्लिम संगठनों ने आपत्ति जताई है। सरकार ने भी योगा डे पर आसनों की लिस्ट में सूर्य नमस्कार को नहीं रखा है।
‘गोमांस खाने वाले नहीं कर सकते योग’
सत्ता में आने के बाद उलटे रास्ते पर मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए शंकराचार्य ने कहा कि सत्ता में आने के बाद नरेंद्र मोदी उलटे रास्ते पर चल रहे हैं। इसे लेकर राजनीति हो रही है। जिसे योग नहीं करना है, तो वह मत करे, लेकिन इसे लेकर इतना हो-हल्ला क्यों किया जा रहा है।
सामूहिक योग सरकार की सिर्फ एक नौटंकी : दिग्विजय
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने २१ जून को दिल्ली के राजपथ पर सामूहिक योग को मोदी सरकार की नौटंकी करार दिया है। उन्होंने कहा, ”मुझे सामूहिक योग के आयोजन का कोई तर्क समझ नहीं आता। योग अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। इसे धार्मिक और राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। मैं पिछले ४० साल से योग, ध्यान और प्रणायाम कर रहा हूं। मैं इसे करने की सलाह हर किसी को दूंगा।”
स्त्रोत : दैनिक भास्कर








