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अमेरिका ने बनाया ‘मुस्लिम-फ्री’ गन रेंज, होगी निगरानी

वॉशिंगटन – अमेरिकी राज्य अरकंसा में जस्टिस डिपार्टमेंट का सिविल राइट्स डिविजन एक ऐसे गन रेंज पर नजर रखेगा, जिसकी मालकिन पर आरोप है कि उसने पिछले साल सितंबर में इसे ‘मुस्लिम-फ्री जोन’ घोषित किया था। काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (CAIR) ने पिछले साल जस्टिस डिपार्टमेंट को हॉट स्प्रिंग्स स्थित गन केवर शूटिंग रेंज की मालकिन जैन मॉर्गन के बारे में लिखा था।

काउंसिल का कहना था कि ‘मुसलमानों को बिजनस की किसी जगह पर बैन करना’ अमेरिका के फेडरल लॉ का उल्लंघन है जिसमें कहा गया है कि किसी से भी नस्लीय व धार्मिक आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन के अरकंसा चैप्टर ने भी मामले की जांच की मांग की थी।

जस्टिस डिपार्टमेंट ने एक अंग्रेजी अखबार को भेजे गए ई-मेल के जरिए साफ किया कि वह मामले पर नजर रख रहा है। हालांकि डिपार्टमेंट ने यह साफ नहीं किया कि वह मामले की जांच भी करवाएगा या नहीं। गन रेंज की मालकिन मॉर्गन ने सितंबर में लिखा था कि वह ‘किसी भी ऐसे व्यक्ति को बंदूक या अन्य हथियार नहीं बेचेंगी और किराए पर भी नहीं देंगी, जो ऐसे धर्म को मानता हो जिसमें उसे मेरी जान लेने का आदेश दिया गया हो।’

जनवरी में एक साउथ एशियन हिंदू पिता और उनके पुत्र ने मॉर्गन की फर्म पर भेदभाव करने का आरोप लगाया था और कहा था कि गन केव शूटिंग रेंज में धार्मिक आधार पर भेदभाव होता है। उनके अनुसार,’हम भूरे हैं, हमें नहीं पता कि उसने हमें मुसलमान समझा या कुछ और। उसने हमसे कहा कि यदि तुम एक मुसलमान हो तो मैं उम्मीद करती हूं तुम लोग कायरता नहीं दिखाओगे और इस बारे में साफ-साफ बता दोगे।’

हालांकि मॉर्गन ने पिता-पुत्र की इस बात को खारिज कर दिया था। मॉर्गन ने कहा था कि उन दोनों अजीब व्यवहार ने उन्हें इस बात को मानने के लिए मजबूर किया था कि उन्हें इस रेंज में गन देना सही नहीं है। मॉर्गन ने यह भी कहा कि उनकी फर्म त्वचा के रंग के आधार पर किसी ग्राहक से भेदभाव नहीं करतीं। उन्होंने पिता-पुत्र पर एक अजेंडा के तहत काम करने का आरोप लगाया और कहा कि वे ऐसी ही स्थिति पैदा करना चाहते थे जो अब हो रही है।

CAIR और ACLU के मुताबिक मॉर्गन की ‘मुस्लिम-फ्री’ पॉलिसी १९६४ के फेडरल सिविल राइट्स ऐक्ट का उल्लंघन करती है। मॉर्गन इस बात से इनकार करती हैं और कहती हैं कि गन केव शूटिंग रेंज एक प्राइवेट क्लब के तौर पर चलाया जाता है, और उनको ऐसे पटेंशल कस्टमर्स को बाहर का रास्ता दिखाने का पूरा अधिकार है, जो दूसरों को खतरा पहुंचा सकते हैं।

मॉर्गन का यह भी कहना है कि उन्होंने खुद कुरान पढ़ी है और यह निष्कर्ष निकाला है कि एक धर्म के तौर पर इस्लाम अपने अनुयायियों को हिंसक कृत्य करने का आदेश देता है, और मुसलमानों पर बैन लगाने के लिए यह कारण काफी है।

स्त्रोत : नवभारत टाइम्स

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