
गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) : हाल ही में हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक पू. डॉ. चारुदत्त पिंगळे ने ‘गीता प्रकाशन’ के संस्थापक अध्यक्ष प्रह्लादजी ब्रह्मचारी के नियमित सत्संग में मार्गदर्शन करते हुए जानकारी दी कि प्रतिदिन सवेरे-शाम घर में गोमूत्र छिडकने से वास्तुशुद्धि होती है, एवं खेत में गोमय का उपयोग करने से उसका स्थूल एवं सूक्ष्म दोनों स्तरोंपर उसका लाभ होता है।
सब से उन्नत व्यक्ति का भी आभामंडल अधिकाधिक १ मीटर होता है, जब कि देशी गाय का आभामंडल ८ मीटर तक होता है।
इस अवसर पर श्री. प्रह्लादजी ब्रह्मचारी के साथ अनेक जिज्ञासु उपस्थित थे। पू. डॉ. पिंगळे ने कहा कि, ‘अपने देश में गाय को पशु न मानकर गोमाता संबोधित किया जाता है एवं उसको माता का स्तर दिया गया है। एक समय भारत में अधिक गोधनवाले व्यक्ति को धनवान समझा जाता था; परंतु आज हम पर केवल गोमाता की नहीं, अपितु गोवंश की भी रक्षा करने का समय आ गया है।’
स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात








