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संस्कृतीरक्षा की पहेल करना वर्तमान की आवश्यकता ! – रमेश शिंदे

चैत्र शुक्लपक्ष पंचमी, कलियुग वर्ष ५११७

राजस्थान में हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा धर्मप्रसार का कार्य

हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेशजी शिंदे

झुंझुनू (राजस्थान) : वर्तमान में भारत की युवापिढी पाश्‍चात्त्य संस्कृती की ओर बढ रही हैं। सुरज पूर्व की और उगता हैं और पश्‍चिम की और डुबता हैं। लेकीन अपने संस्कृती का महत्त्व पता न होने के कारण आज भारत के युवा डुबनेवाले पश्‍चिमी सभ्यता को अपना रहे हैं और विदेशी लोग तो भारत की संस्कृती आचरण में ला रहे हैं। भारत की इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में बदलाव हो, इसलिए हिन्दू जनजागृति समिति २२ राज्य में कार्य कर रही हैं। इस कार्य में सहभागी होकर युवा संस्कृतीरक्षा में पहेल करें, ऐसा आवाहन हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेशजी शिंदे ने यहांपर किया।

आज यहां के गौपाल गौशाला में युवाओंके लिए आयोजित कार्यक्रम में यह आवाहन किया गया। इस समय समिति के श्री. आनंद जाखोटिया ने समिति का परिचय लोगोंको करवा दिया। सायं ६.३० से ८.०० तक चले इस कार्यक्रम में १०० व्यक्ती उपस्थित थें। इस कार्यक्रम का आयोजन झुंझुनू गौरक्षा दल के श्री. प्रवीण स्वामी ने किया था। इस कार्यक्रम को निवृत्त जिल्हाधिकारी श्री. विजयभारती, गौपाल गौशाला के अध्यक्ष श्री. ताराचंदजी गुप्ता, मंत्री श्री. सुभाष क्यामसलिया, शशिकांत पंचारी, अल् ससीर एवं चिडावा गौरक्षा दल के पदाधिकारियोंकी विशेष उपस्थिती थी।

श्री. शिंदेजी ने आगे बताया की, हमारे संस्कृति में शेकहॅन्ड नही, तो प्रणाम करने की पद्धती हैं। आज स्वाईन फ्ल्यू जैसे रोगोंका फैलाव होने पर शेकहॅन्डसे लोग पिछे हट रहे हैं। इस प्रकार आपत्ती आने के पश्‍चात्त अपने संस्कृति का आचरण करने के अलावा पहले से ही प्रयास करें। भ्रमणभाष पर बोलते समय हॅलो के बजाए नमस्ते या अपने भगवान का नाम लें। जन्मदिन अंग्रेजी दिनांक अनुसार नहीं, तो तिथि के अनुसार मनाएं।

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