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हिन्दू जनजागृति समिति के केरल राज्य के धर्मप्रसार कार्य का फरवरी २०१५ का ब्यौरा !

चैत्र कृष्णपक्ष दशमी, कलियुग वर्ष ५११६

हिन्दू जनजागृति समिति का धर्मप्रसार कार्य

१. वैलेंटाईन डे मनाया न जाए; इसलिए प्रबोधन !

१४ फरवरी को पाश्चात्त्य संस्कृतिनुसार वैलेंटाईन डे मनाया जाता है। इस अनुचित प्रथा के संदर्भ में जनजागृति करने की दृष्टि से पत्रकोंका वितरण किया गया, साथ ही इस संदर्भ में प्रबोधन पर भित्तीपत्रक भी प्रकाशित किए गए। इस प्रबोधनात्मक कार्य में ३ धर्माभिमानी सम्मिलित हुए। पालक्काड जनपद के श्री. राधाकृष्णन ने २ पाठशालाओंका भ्रमण कर ये भित्तीपत्रक दिए, साथ ही अन्य १८ स्थानोंपर उन्होंने स्वयं प्रकाशित किए।

२. एक हिन्दू धर्माभिमानी व्यक्ति का अनुकरणीय कृत्य केरल के तलश्शेरी नामक गांव में हिन्दू धर्म की जानकारी देनेवाले ग्रंथोंका विक्रय करनेवाले श्री. बाबू ने मलयालम भाषा के ग्रंथ, लघुग्रंथ, साथ ही अपनी दुकान में विक्रय हेतु धार्मिक विधि की ध्वनिचित्र-चक्रिका भी खरीद ली। वे अनेक स्थानोंपर ग्रंथ प्रदर्शनी आयोजित करते हैं। अब विक्रय हेतु सनातन-निर्मित ग्रंथ भी दुकान में रखने की उनकी इच्छा है।

३. प्रवचन एवं ग्रंथ प्रदर्शनी

फरवरी मास में ५ प्रवचन हुए। उस स्थान पर ग्रंथ प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। दोनोंको अच्छा प्रतिसाद प्राप्त हुआ।

४. शिवरात्रि के निमित्त किया गया प्रसार कार्य !

शिवरात्रि के निमित्त केरल के एर्नाकुलम् जनपद में ४ मंदिरों में ग्रंथ प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, साथ ही एक मंदिर में प्रवचन भी आयोजित किया गया।

५. त्रिची की माताजी द्वारा केरल आश्रम का भ्रमण तथा कार्य हेतु साधकों को आशीर्वाद !

श्री ललिता महिला समाजम्, तिरुइन्गाइमलाइ, त्रिची, तामिलनाडू की अध्यक्षा तथा श्रीविद्या की उपासक गुरु श्री-ला-श्री-माताजी (माताजी) ने २४.२.२०१५ को केरल सेवाकेंद्र का भ्रमण किया। सेवाकेंद्र के साधकोंको उन्होंने धर्मकार्य करने हेतु आशीर्वाद दिया। त्रिची में माताजी का आश्रम है। वे वहां श्रीविद्या उपासना करती हैं, साथ ही योगिनी की पूजा करने का प्रशिक्षण भी देती हैं। माताजी ने साधकोंको आशीर्वाद दिए कि आप इसी प्रकार धैर्य से दिल लगाकर धर्मप्रसार का कार्य करें ! विरोध होगा; किंतु गुरु आपको आगे लेकर जाएंगे ही। २५.१२.२०१५ से ४.१.२०१६ इस कालावधि में माताजी के मार्गदर्शन में त्रिची में श्री विद्या महायाग संपन्न होगा। उस हेतु उन्होंने साधकोंको भी निमंत्रित किया है।

– कु. प्रणिता सुखठणकर तथा कु. अदिति सुखठणकर, केरल (७.३.२०१५)

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