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प. बंगाल में ‘लव जिहाद’ के बदले चला मुस्लिम लड़कियों को हिंदू बनाने का कैंपेन

चैत्र कृष्णपक्ष अष्टमी, कलियुग वर्ष ५११६

कोलकाता : मुस्लिम लड़के-हिंदू लड़की की शादी को ‘लव जिहाद’ करार देकर विरोध करने वाले हिंदू संगठनों ने पश्चिम बंगाल में इसके खिलाफ एक अलग ही अभियान चलाना शुरू कर दिया है। हिंदू-मुस्लिम दंपती पर दबाव बनाने के बदले संगठन के सदस्य ऐसे जोड़ों की मदद कर रहे हैं। लेकिन शर्त एक है कि ऐसे मामलों में मुस्लिम दुल्हन को शुद्धिकरण के जरिए हिंदू धर्म अपनाना होगा। बंगाल के कई जिलों, जहां हाल के कुछ चुनावों में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया है, वहां विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच, हिंदू सहमति संगठन, भारत सेवाश्रम संघ ने ‘बहू लाओ, बेटी बचाओ’ कैंपेन चलाया है। इसे ‘लव जिहाद’ का जवाब बताया जा रहा है।

बता दें कि उत्तर और पश्चिम भारत में ‘घर वापसी’ कैंपेन से विरोधियों के निशाने पर आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात का विश्वास दिलाया कि धर्म को लेकर लोगों की व्यक्तिगत आजादी है, जिसे कोई हानि नहीं पहुंचा सकता। हालांकि, इस बीच देश के पूर्वी हिस्से में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने एक नए धर्मान्तरण कार्यक्रम की शुरुआत कर दी है।

शुद्धिकरण के जरिए मुस्लिम लड़कियों को बनाया जा रहा हिंदू जानकारी के मुताबिक, इस कैंपेन के तहत अगर पुरुष हिंदू है और और मुस्लिम महिला से शादी की है, तो महिला का शुद्धिकरण कर हिंदू धर्म में लाया जा रहा है। पिछले दो महीने के दौरान साउथ २४ परगना, नॉर्थ २४ परगना, मुर्शिदाबाद, हावड़ा और बीरभूम जैसे जिलों में चुनाव के दौरान बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इन इलाकों में हाल में शादी करने वाले ऐसे कई दंपती मिल जाएंगे, जो अपनी शादी का श्रेय हिंदू समूहों को देते हैं।

विश्व हिंदू परिषद के नेता बादल दास इस इलाके में संगठन के कैंपेन के इंचार्ज हैं। कहा जा रहा है कि साल भर के भीतर 500 मुस्लिम व ईसाई महिलाएं शादी के बाद हिंदू बनी हैं। सभी महिलाओं को हिंदू नाम दिए गए हैं। साथ ही, अपनी सुरक्षा के लिए उनके परिवारों को बीजेपी ज्वाइन करने की सलाह दी गई है।

हिंदू सहमति संगठन के चीफ तपन घोष ने कहा कि हम लोग ‘लव जिहाद’ के खिलाफ लड़ रहे हैं। हम देखते हैं कि कई मुस्लिम लड़के हिंदू लड़कियों को अपने जाल में फंसा कर शादी कर लेते हैं, हम लव जिहाद के पीड़ितों को बाहर निकालते हैं और मुस्लिम लड़कियों को हिंदू घरों में लाते हैं। वीएचपी गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन कमेटी का नेतृतव करने वाले जादवपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अचिन्तया विश्वास का कहना है, ”यदि एक हिंदू लड़का मुस्लिम लड़की को हिंदू धर्म में ला सकता है, तो इसे पवित्र कार्य समझा जाएगा। हम इस ट्रेंड को तोड़ना चाहते हैं कि हिंदू लड़कियां मुस्लिम लड़कों से शादी करती हैं।” इसी प्रकार के एक कैंपेन में शुद्धिकरण के जरिए २१ साल की रेबेका खातून को मीनाक्षी नस्कर बनाया गया। फिलहाल, वह साउथ २४ परगना के लक्ष्मीनरायणपुर में रहती है। कोर्ट मैरिज के एक साल बाद मधुमंगल नस्कर से पिछले साल उसकी शादी हो गई। मधुमंगल के पिता हराधन चंद्र नस्कर को भी इस शादी से कोई एतराज नहीं था। यही नहीं, कहा जा रहा है कि रेबेका के पिता मुसर्रफ शेख को भी दंपती और परिवार की सुरक्षा के लिए पार्टी ज्वाइन करने को कहा गया है। रेबेका ने कहा, ”मुझसे कहा गया था कि यदि मैं शादी करना चाहती हूं तो मुझे हिंदू धर्म अपनाना पड़ेगा। मैं भाग गई, क्योंकि मेरा समाज एक मुस्लिम लड़की द्वारा हिंदू लड़के से शादी को स्वीकार नहीं करता। इसके बाद मधुमंगल ने हिंदू संगठनों से संपर्क किया। संगठन ने हमें बचाया और विश्वास दिलाया कि यदि मैं हिंदू बन जाऊं तो सब कुछ ठीक हो जाएगा। इसके बाद हमें कोलकाता में हिंदू सहमति ने शरण दी। कुछ महीने के बाद मैं यहां आ गई। मैंने खुद को हिंदू घोषित करते हुए कोर्ट में एफिडेविट भी दिया। उसके माता-पिता ने ‘हवन’ का आयोजन किया और मेरा शुद्धिकरण कराया गया। मैंने पति से हिंदू रीतियों के तहत शादी की।”

उसके ससुर हराधन ने कहा कि उन्होंने लड़की के पिता को कहा है कि वे लोग बीजेपी के साथ अच्छा संबंध बना कर रखें। मैं एसयूसीआई का सदस्य था, लेकिन अब मैं बीजेपी से जुड़ गया हूं। लड़की के पिता मुसर्रफ शेख का कहना है कि शुरुआत में हमें आपत्ति थी, लेकिन मेरी बेटी ने भाग कर हिंदू धर्म अपना लिया, अब वह खुश है।

स्त्रोत : दैनिक भास्कर

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