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देश ने स्वतंत्रतावीर सावरकर को क्या दिया ? – सरसंघचालक मोहन भागवत

फाल्गुन शुक्ल पक्ष एकादशी, कलियुग वर्ष ५११६

स्वतंत्रतावीर सावरकर के सुवर्णमहोत्सवी आत्मार्पण वर्षारंभ का आरंभ

पू. विक्रमराव सावरकर की स्मृतियोंपर आधारित ‘विक्रम सावरकर – एक चैतन्यझरा’ ग्रंथ का प्रकाशन (पुस्तक का विमोचन करते हुए मान्यवर)

दादर (मुंबई) : यहां के सावरकर स्मारक में स्वा. सावरकर के सुवर्णमहोत्सवी आत्मार्पण स्मृतिवर्षारंभ के निमित्त विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर ‘सावरकर एवं परिस्थिति’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में बोलते हुए सरसंघचालक श्री. मोहन भागवत ने कहा कि स्वतंत्रतावीर विनायक दामोदर सावरकर को स्वतंत्रता प्राप्ति की उत्तर कालावधिमें एक लज्जाजनक अपराध की आड में पिंजरे में खडे रहना पडा। अंदमान में उनके नाम का फलक हटाना पडा। सावरकर को देश ने क्या दिया ?, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री. मोहन भागवत ने स्पष्ट रूप से ऐसा प्रश्‍न किया। सरसंघचालक बोल रहे थे।

इस कार्यक्रम में स्मारक के कार्याध्यक्ष श्री. रणजीत सावरकर, स्वामिनी विक्रम सावरकर, पदाधिकारी, सावरकर भक्त तथा बडी संख्या में देशप्रेमी नागरिक उपस्थित थे ।

इस अवसर पर जांबुवंतराव धोटे के शुभ हाथों स्वतंत्रतावीर सावरकर के सक्रिय शिष्य पू. विक्रमराव सावरकर की स्मृतियोंपर आधारित ‘विक्रम सावरकर – एक चैतन्यझरा’ ग्रंथ का विमोचन किया गया। इस समय उन के ही एक शिष्य प्रताप वेलकर लिखित ‘विक्रमादित्य सावरकर’ पुस्तक का भी विमोचन किया गया। सरसंघचालक के शुभ हाथों आत्मार्पण वर्ष के विशेष बोधचिह्न का भी अनावरण किया गया। देश स्तर पर ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर के विचारों का अनुकूल उपक्रम चलाते समय उसे दृढता मिलने की दृष्टि से सभी को संगठित रूप से कार्य करना चाहिए। इसलिए इस वर्ष में स्मारक अधिक प्रयत्नशील रहेगा। स्मारक के माध्यम से राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सावरकर का विचार अधिक प्रभावित रूप से चलाया जाएगा, स्मारक के अध्यक्ष अरुण जोशी ने ऐसा प्रतिपादन किया।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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