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राजस्थान में हिन्दू जनजागृति समिति के कार्य को उत्स्फूर्त रूप से प्रतिसाद

फाल्गुन शुक्ल पक्ष चतुर्थी, कलियुग वर्ष ५११६

पू. रघुवीर महाराज को (दार्इं ओर) जानकारी देते हुए श्री. रमेश शिंदे

बीकानेर (राजस्थान) : हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा यहां ग्रंथ प्रदर्शनी लगाना, धर्मसत्संग एवं बैठकें इत्यादि आयोजित करना, विविध माध्यमोंसे धर्मशिक्षा देना एवं हिन्दुओंके प्रभावी संगठनोंका कार्य किया जा रहा है। इस कार्य को समाज से उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिल रहा है।

महाशिवरात्रि के निमित्त शिवबाडी, बीकानेर के प्रसिद्ध श्री लालेश्‍वर महादेव मंदिर में हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा ग्रंथ प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। यहां के महंत स्वामी सोमगिरी महाराज ने प्रदर्शनी लगाने हेतु समिति को मंदिर में स्थान उपलब्ध करवा दिया था। स्वामी ने ही स्थानीय लोगोंको इस प्रदर्शनी का अधिकाधिक लाभ लेने का आवाहन किया। प्रदर्शनी में समिति द्वारा धर्मशिक्षा देनेवाला फलक तथा राष्ट्र-धर्म, अध्यात्म तथा आयुर्वेद इत्यादि विषयोंके साथ सनातन निर्मित ग्रंथोंका भी समावेश था। इस प्रदर्शनी को यहां के लोगों का उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिला।

हिन्दु युवकोंने प्रतिदिन धर्मशिक्षा ग्रहण करने हेतु संगठित होने की शपथ ली !

बीनासर के भक्तानंद शिव मंदिर के महंत श्री सुबोधगिरी महाराज ने महाशिवरात्रि के निमित्त गांव के युवकों तथा धर्माभिमानी हिन्दुओंको एकत्रित कर मंदिर में एक बैठक का आयोजन किया था। बैठक में हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने उपस्थित लोगोंको धर्मशिक्षा का महत्त्व एवं हिन्दू संगठन की अत्यावश्यकता विषय पर मार्गदर्शन किया। तदुपरांत कार्यक्रम को उपस्थित युवकोंने धर्मशिक्षा हेतु प्रतिदिन मंदिर में संगठित होने की शपथ ली एवं कहा कि वे प्रतिदिन मंदिर में होनेवाली आरती को भी उपस्थित रहेंगे। श्री. रमेश शिंदे ने बीनासर के पू. रघुवीर महाराज से भेंट कर उन को समिति की स्थापना एवं समिति द्वारा आजतक के धर्मकार्य के विषय में जानकारी दी। इस अवसर पर महाराज ने समिति द्वारा किए जानेवाले धर्मकार्य की प्रशंसा की एवं कहा कि वे राजस्थान में उन्हें ज्ञात कुछ अन्य क्षेत्रों में समिति के कार्य को सहायता करेंगे।

इस अवसर पर महाराज ने कहा कि धर्मकार्य को निमित्त बना कर उसे करते हुए अपनी उन्नति होने हेतु प्रयास करना आवश्यक है। क्रियाशक्ति की अपेक्षा संकल्पशक्ति से अधिक कार्य हो सकता है।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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