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धार्मिक सहनशीलता पर मोदी की नसीहत ईसाइयों के लिए थी : विश्व हिन्दू परिषद

फाल्गुन शुक्लपक्ष द्वितीया, कलियुग वर्ष ५११६

vhpनई देहली : धार्मिक सहिष्णुता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को भले ही अल्पसंख्यकोंके लिए आश्वासन के तौर पर देखा जा रहा हो, मगर विश्व हिंदू परिषद का कुछ और ही मानना है। संगठन का कहना है कि मीडिया प्रधानमंत्री की बात का गलत अर्थ ले रहा है। वीएचपी के मुताबिक पीएम की नसीहत दरअसल ‘हिंदुओंपर हमले कर रहे ईसाइयों’ के लिए थी।

धार्मिक सहनशीलता पर मोदी ने ईसाइयों को नसीहत दी है : वीएचपी विश्व हिंदू परिषद का कहना है, ‘मोदी ने उसी दिन ईसाइयोंकी सभा में भाषण दिया, जिस दिन दिल्ली पुलिस ने बताया कि ७ चर्चों के मुकाबले २०६ मंदिरों पर हमले हुए हैं। इससे साबित होता है कि पीएम ईसाइयों को धार्मिक रूप से सहनशील बनने और हिंदू धर्म का सम्मान करने की नसीहत दे रहे थे।’

संगठन के महासचिव सुरेंद्र जैन ने बताया, ‘प्रधानमंत्री ने न तो अल्पसंख्यकों का जिक्र किया और न ही किसी धर्म का नाम लिया। समाचार के सौदागर अपना अजेंडा तुष्ट करने के लिए गलत अर्थ निकाल रहे हैं। जब उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, तो आपको देखना चाहिए कि किन हालात में बात कही गई है। चर्चों पर कथित हमले काफी दिनों से चल रहे हैं, मगर पीएम ने कभी टिप्पणी नहीं की। वह तब बोले, जब दिल्ली पुलिस ने २०६ मंदिरों पर हमले की बात कही। उन्होंने उस दिन यह टिप्पणी की, जब अमेरिका में भी मंदिर पर हमला किया गया।’

जैन ने यह मानने से इनकार कर दिया कि पीएम के बयान में यह संदेश था कि अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू संगठनों की तरफ भी पीएम का कोई इशारा नहीं था, ऐसे में ‘घर वापसी’ और ‘लव जिहाद के विरोध’ जैसे कार्यक्रम जारी रहेंगे।

वीएचपी महासचिव ने कहा, ‘पीएम का संदेश उन लोगों के लिए था, जो दूसरे धर्मों पर हमले करते हैं। ये ईसाई ही हैं जो हिंदू देवी-देवताओं को अपमानित करने वाली चीज़ें लिखते हैं, हिंदू धर्म के खिलाफ नफरत फैलाने के आंदोलन चलाते हैं। इसीलिए तो हिंदुओं की सभा में मोदी ने कभी ये बातें नहीं कही। इसका मतलब है कि उन्होंने ईसाई समुदाय से कहा है कि आपको हिंदू धर्म का सम्मान करना शुरू कर देना चाहिए।’

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने मंगलवार को एक चर्च के कार्यक्रम में कहा था, ‘मेरी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सभी को पूरी धार्मिक स्वतंत्रता मिले और बिना दबाव के हरेक को कोई भी धर्म अपनाने की आजादी हो।’

स्त्रोत : नवभारत टाइम्स

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