फाल्गुन कृष्ण पक्ष द्वादशी, कलियुग वर्ष ५११६
इतने सालों बाद मिला न्याय ये अन्याय ही है !
अहमदाबाद: स्थानीय ट्रायल कोर्ट ने शुक्रवार को २००२ में हुए गुजरात दंगों में ६८ अरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीके पुजारा ने कहा कि गवाहों के बयानों का सबूतों से मिलान नहीं हो पा रहा है। अदालत में १९० गवाह अपने बयान से पलट गए थे।बनासकांठा जिले के देवदर तहसील के सेशन गांव में २ बच्चों समेत १४ लोग मारे गए थे। मामले में २०१२ में आरोपपत्र दाखिल किए थे जबकि १२ पूरक आरोपपत्र बाद में दाखिल किए गए। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि चश्मदीद गवाहों ने १४ लोगों की मौत में आरोपियों को शामिल होते देखा है। लेकिन बचाव पक्ष ने कहा कि गवाह पहचान परेड के दौरान अभियुक्त की पहचान नहीं कर सका था।
पुलिस के अनुसार ५००० लोगों की भीड़ ने तलवारों और डंडों के साथ २ मार्च २००२ को गांव पर हमला किया था। गांव में बलोच मुसलिम समुदाय के करीब २०० लोग रहते थे। भीड़ ने दो लड़कियों समेत १४ लोगों को मार दिया था। पुलिस फायरिंग में भीड़ में शामिल दो लोग भी मारे गए थे।
स्त्रोत: अमरउजाला








