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छुआछूत के लिए इस्लामी आक्रमण जिम्मेदार : अशोक सिंघल

फाल्गुन कृष्णपक्ष पंचमी, कलियुग वर्ष ५११६

इलाहाबाद – विश्व हिंदू परिषद ने दलितों को सम्मान देने की जरुरत को रेखांकित करते हुए दावा किया कि छुआछूत की प्रथा के लिए ‘इस्लामी आक्रमणकारियों’ का दमन जिम्मेदार है। वीएचपी संरक्षक अशोक सिंघल ने यहां कहा,’इस्लामी आक्रमण शुरू होने से पहले तक हिंदुओं में कोई छुआछूत नहीं थी।’  

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में चार वर्ण थे जो पेशे पर आधारित थे। कामगारों का यह बंटवारा किसी भी तरीके से वर्गीकृत नहीं था। सभी से समान व्यवहार किया जाता था। सिंघल वीएचपी के स्वर्ण जयंती के मौके पर आयोजित ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ को संबोधित कर रहे थे जिसमें बीजेपी के सांसदों श्यामा चरण गुप्ता (इलाहाबाद) , केशव प्रसाद मौर्य और विनोद सोनकर (कौशांबी) के साथ ही संघ परिवार के संगठनों के पदाधिकारियों और सदस्यों ने हिस्सा लिया।

मैला ढोने की प्रथा

उन्होंने कहा, ‘सदियों पहले इस्लामी आक्रमणकारियों ने हिंदुओं के एक वर्ग को मैला ढोने जैसा काम करने के लिए मजबूर किया क्योंकि उस वर्ग ने दमन के बावजूद इस्लाम धर्म अपनाने से इनकार कर दिया था।’ सिंघल ने कहा कि इस गलती को ठीक करने का सही वक्त आ गया है।

उन्होंने कहा, ‘मैं हिंदुओं का आवाह्न करता हूं कि वे दलितों को वह सम्मान दें जिसके वे हकदार हैं। उन्हें आगे से अछूत नहीं बल्कि धर्मयोद्धा के रुप में देखा जाना चाहिए जिन्होंने अपना धर्म छोड़ने की बजाय ऐसे काम करने का फैसला लिया और अपमान सहा।’ सिंघल ने पिछले साल के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की जीत की ओर इशारा करते हुए कहा कि पृथ्वीराज चौहान के बाद २०१४ में पहली बार दिल्ली में एक सच्चा हिंदू शासन कर रहा है। वे बोले कि गो हत्या पर प्रतिबंध जैसे कई काम करने अभी बाकी भी हैं।

स्त्रोत: नवभारत टाइम्स

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