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मलेशिया में पंतप्रधान को माला पर मौलवी की टिप्पणी की भर्त्सना

फाल्गुन कृष्णपक्ष पंचमी, कलियुग वर्ष ५११६

कुआलालंपुर – मलेशिया में हिंदुओं ने एक मौलवी की सलाह की तीव्र आलोचना की है। उस मौलवी ने कहा था कि प्रधानमंत्री नजीब रज्जाक को हिंदू लिबास नहीं पहनना चाहिए। और न ही उन्हें हिंदुओं के समारोहों में माला पहननी चाहिए। यह बात शनिवार को एक मीडिया रिपोर्ट में कही गई है।

मलेशियाई प्रधानमंत्री रज्जाक ने मंगलवार को कुर्ता पहना था और कुआलालंपुर के पास बाटु केव्स में तमिल थाईपुसम समारोह में माला पहनी थी। इस पर मलेशियाई राज्य पर्लीज के मुफ्ती मुहम्मद असरी जैनुल अबिदीन ने नाराजगी जताई थी।

मलेशियाई हिंदू संघम के अध्यक्ष आरएस मोहन शान ने कहा कि फूलों की माला पेश करना वास्तव में अतिथियों को सम्मान का प्रतीक है। यह हमेशा से किसी के आदर करने का भारतीय तरीका रहा है। इसका धर्म से कोई मतलब नहीं है।

कुरान में ऐसा कुछ नहीं लिखा गया है कि मुसलमानों को माला पेश नहीं किया जा सकता। असरी ने कहा था कि प्रधानमंत्री के सलाहकारों को इस मामले में सख्त रहना चाहिए और ऐसे कार्यक्रमों के आयोजकों को इस बारे में बता देना चाहिए कि प्रधानमंत्री इसी शर्त पर कार्यक्रम में भाग लेंगे कि वह हिंदू संस्कारों में भाग नहीं लेंगे।

स्त्रोत: नई दुनिया

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