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मानसिक बीमार बच्चों को आत्मघाती हमलावर बना रहा है IS

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि आतंकी संगठन आईएस मानसिक रूप से कमजोर बच्चों को आत्मघाती हमलावर बना रहा है । संयुक्त राष्ट्र की बच्चों के अधिकारों पर बनी कमिटी ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट जारी की है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक आईएस इराक में आत्मघाती हमलावर के तौर पर १८ साल से कम उम्र के बच्चों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है। इसके अलावा बम बनाने, सूचनाएं जमा करने और अमेरिकी हमलों से बचने के लिए ह्यूमन शील्ड के तौर पर भी इनका इस्तेमाल किया जा रहा है।

कमिटी के एक्सपर्ट रेनैट विंटर के मुताबिक, आत्मघाती हमलावरों के तौर पर बच्चों, खासतौर पर मानसिक रूप से कमजोर बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने इसे बड़ी समस्या बताया है।

रैनेट का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र बच्चों के शोषण और हत्याओं से काफी चिंतित हैं। इसमें अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे भी शामिल हैं। यूएन की कमिटी ने इराक में धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की निंदा की है।

इस रिपोर्ट में आईएस के इराक में बच्चों का अपहरण कर उन्हें सेक्स गुलाम के तौर पर बेचने और युवाओं को जलाकर मारने पर चिंता जताई गई है।

स्त्रोत : नवभारत टाइम्स

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