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नाशिक में आयोजित सिंहस्थपर्व उचित तरह से संपन्न होने के लिए हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा न्यायालयीन लडाई

फाल्गुन कृष्ण पक्ष द्वितीया, कलियुग वर्ष ५११६

४ सप्ताह के पश्चात न्यायालयद्वारा पुन: ब्यौरा प्रस्तुत करने का आदेश !

मुंबई : नाशिक में संपन्न होनेवाले सिंहस्थपर्व हेतु आवश्यकता नुसार क्षेत्र की उपलब्धता नहीं है, वहां सुविधाओंका अभाव है, ऐसी परिस्थिति में यदि सिंहस्थपर्व का आयोजन किया गया, तो पिछले समय के समान भीड के कारण धिचपिच की पुनरावृत्ति होना संभव है, इस सिंहस्थपर्व पर आतंकवादी आक्रमण की आपत्ति आने की संभावना भी है; इसलिए नाशिक महानगरपालिका, महाराष्ट्र शासन तथा केंद्रशासन द्वारा उचित रक्षा की पूर्ति होनी चाहिए, इसलिए हिन्दू जनजागृति समिति ने मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका प्रविष्ट की है।

महानगरपालिका के अधिवक्ता द्वारा यह बात स्वीकार की गई कि ३ फरवरी को इस याचिका की सुनवाई थी। उस समय ‘हमारी स्थिति अत्यंत कठिन थी, हमारे समक्ष अनेक बाधाएं उत्पन्न हुई हैं, हमें अल्प समय में अनेक कार्य करने हैं।’ राज्यशासन के अधिवक्ताओंने न्यायलय में बताया कि ‘राज्यशासन द्वारा नगरपालिका को भूमि उपलब्ध करने की प्रक्रिया आरंभ हो गई है।’

वर्ष २००३ से आजतक आवश्यकतानुसार क्षेत्र उपलब्ध नहीं है, समिति द्वारा मुख्य न्यायमूर्ति श्री. मोहित शाह तथा न्या. कुलाबावाला के खंडपीठ के सामने यह वस्तुस्थिति प्रस्तुत करने के पश्चात माननीय न्यायालय द्वारा ४ सप्ताह के पश्चात पूरे कार्य का ब्यौरा पुनः प्रविष्ट करने का आदेश दिया गया। हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने पक्ष प्रस्तुत किया।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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