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महाराष्ट्र : श्री विठ्ठल की महापूजा करने हेतु अब ५१ सहस्र रुपए देने पडेंगे !

माघ पौर्णिमा कलियुग वर्ष ५११६

पंढरपुर के श्री विठ्ठल रुक्मिणी मंदिर समिति द्वारा पैसा कमाने का निर्णय 

पंढरपुर (महाराष्ट्र) : ७ वर्ष पूर्व पुरातत्व विभाग द्वारा भगवान श्री विठ्ठल रुक्मिणी मंदिर समिति को श्री विठ्ठल की महापूजा करते समय पंचामृत स्नान करने से मूर्ति की घिसाई होने का कारण बताकर महापूजा बंद करने की सूचना दी गई थी। इन ७ वर्षोंकी कालावधि में समिति द्वारा महापूजा करने हेतु पंचधातु की उत्सवमूर्ति बिठाने का निर्णय भी लिया गया था। ३० जनवरी को श्री विठ्ठल रुक्मिणी मंदिर समिति के अध्यक्ष अण्णासाहेब डांगे ने जानकारी दी कि मंदिर समिति द्वारा ५१ सहस्र रुपयोंका अर्पण करनेवाले भक्तोंके हाथों पूजा करने का निर्णय लिया गया है। इस की कार्यवाही १९ फरवरी से होगी। (भगवान श्री विठ्ठल की महापूजा के लिए इतनी भारी मात्रा में अर्पण देना महापूजा का बाजार मंडाने का ही एक प्रकार है। जब बडवे एवं उत्पात ऐसी पूजा करते थे, तब इस पूजा के लिए ५०० रुपये से लेकर २१०० रुपए तक का व्यय होता था। अब साधारण मनुष्य के लिए इस प्रकार की पूजा संभव ही नहीं होगी। इसलिए सच्चे भक्तोंमें अंतर उत्पन्न होने की संभावना है। इससे स्पष्ट होता है कि मंदिरों का सरकारीकरण करने से किस प्रकार के दुष्परिणाम हो सकते हैं। – संपादक, दैनिक सनातन प्रभात)

इस निर्णय से अनेक वारकरियोंद्वारा ऐसा प्रश्न उपस्थित किया गया है कि किस के हित के लिए महापूजा चालू की जा रही है।

यहां के ‘संत तुकाराम’ भवन में डांगे की अध्यक्षता में मंदिर समिति की बैठक संपन्न हुई।

इस बैठक में आगे दिए गए निर्णय लिए गए –

१. प्रतिदिन नित्यपूजा के अवसर पर दान देनेवालोंके साथ पूजा करने का मान दर्शन पंक्ति के एक पति-पत्नी को भी दिया जाएगा।

२. गुढीपाडवे से श्री विठ्ठल एवं श्री रुक्मिणी की पूजा चंदन तिलक (उटी) लगाकर की जाएगी। इसलिए समाचार पत्र में विज्ञापन देकर इच्छुक श्रद्धालुओंसे आवेदन पत्र मंगवाए जाएंगे।

३. आषाढ एवं कार्तिक माह की यात्राओंकी कालावधि में अधिकाधिक श्रद्धालुओंको श्री विठ्ठल-रुक्मिणी का दर्शन करना संभव होने हेतु २४ घंटे तक मंदिर खुला रखा गया था; परंतु माघ एवं चैत्र की यात्राओंकी कालावधि में मंदिर रात्रि बंद किया जाता है। भीड बढने के कारण माघ एवं चैत्र माह में मंदिर २४ घंटे खुला रखने हेतु शासन को प्रस्ताव देना चाहिए।

हिन्दुओे, मंदिर सरकारीकरण के इन दुष्परिणामों को जानकर सभी मंदिर शासन मुक्त कर भक्तों के नियंत्रण में लेने हेतु सरकार से आग्रह करें !

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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