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माघ मेले में विहिप देगी ‘घर वापसी’ व ‘गौरक्षा’को धार

vhpलखनऊ – देश की सत्ता पर अपने अनुकूल पार्टी को पाकर साधु-संत फूले नहीं समा रहे हैं। संगम तट पर माघ मेले में जुटे साधु-संत १७ जनवरी को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के बैनर तले सम्मेलन करेंगे और इसके जरिए ‘घर वापसी’ व ‘गौरक्षा’ की मुहिम को विस्तार देंगे। बताया गया है कि संत सम्मेलन में बड़े-बड़े संत व धर्माचार्य शामिल होंगे और कई मुद्दों पर चिंतन-मंथन करेंगे। वे ‘एकपंथ द्विकाज’ यानी कल्पवास के साथ धर्म-रक्षा के लिए आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार करेंगे।

बैठक में देश के ज्वलंत विषयों, जैसे धर्मातरण, लव जेहाद व घर वापसी के साथ-साथ गौरक्षा व सरकार द्वारा किए जा रहे मठ-मंदिरों के अधिग्रहण को लेकर चर्चा होगी। दरअसल, संत सम्मेलन की आयोजक विहिप अपनी स्थापना के ५० वर्ष पूरे होने पर इस साल स्वर्ण जयंती वर्ष मना रही है। इसके तहत देश के हर जिले में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं, इसलिए सम्मेलन में इन विषयों के साथ ही स्वर्ण जयंती वर्ष के तहत आयोजित हो रहे कार्यक्रमों और विहिप के आगामी कार्यक्रमों की रणनीति बनेगी।

सूत्रों की मानें तो संत सम्मेलन में घर वापसी, बढ़ती मुस्लिम आबादी, रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर, गंगा शुद्धिकरण, बांग्लादेशी मुस्लिमों की घुसपैठ, सीमाओं की सुरक्षा, गौरक्षा और मठ-मंदिरों के अधिग्रहण के मुद्दे रहेंगे। सूत्र बताते हैं कि १६ जनवरी को विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में जो निर्णय लिए जाएंगे, उनकी विधिवत घोषणा १७ जनवरी को होने वाले संत सम्मेलन में की जाएगी।

गौरतलब है कि १७ जनवरी को संगम तट पर ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के पंडाल में संत सम्मेलन का आयोजन किया गया है। सम्मेलन के दौरान संत श्रद्धालुओं को उन हिंदुओं को घर वापस लाने के लिए प्रेरित करेंगे, जो किसी कारणवश दूसरा धर्म अपना चुके हैं। धर्मातरण व घर वापसी मुद्दे पर केंद्र सरकार की हिदायत के बावजूद विहिप अपनी मुहिम रोकने के मूड में नहीं है। सच तो यह है कि विहिप को भी ऐसी हिदायत की असलियत पता है।

धर्मातरण की बात छेड़ते ही विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा, “देखिए, धर्मातरण और घर वापसी में अंतर समझना होगा। हमारा संगठन सदैव धर्मातरण के विरोध में रहा है। विहिप की लगातार मांग रही है कि देश में धर्मातरण पर सख्त कानून बने।” शर्मा के बयान से स्पष्ट है कि वह भी कुछ भाजपा नेताओं की तरह एक कानून को देश के संविधान से ऊपर मानते हुए धर्मातरण पर ‘सख्त कानून’ के पक्षधर हैं। यानी मिले सुर मेरा-तुम्हारा तो सुर बने ‘हमारा’।

उन्होंने कहा, “जग जाहिर है कि धर्मातरण कराने वाली कौन सी शक्तियां हैं। भारत ही नहीं, विश्व के अनेक देश इस समस्या से ग्रसित है और आज आतंकवाद उसी का एक भयावह चेहरा है।” इधर, संगम तट पर १६ जनवरी को विहिप के शीर्ष पदाधिकारियों व प्रमुख पीठों के संत धर्माचार्यो की मौजूदगी में होने वाली विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक भी हो रही है। मार्गदर्शक मंडल की बैठक में विहिप के संरक्षक अशोक सिंहल, अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगड़िया, महामंत्री चंपत राय, श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष व मणिराम दास छावनी अयोध्या के महंत नृत्यगोपालदास जी महराज, ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद और काशी के सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती सहित विहिप से जुड़े शीर्ष संत धर्माचार्य हिस्सा लेंगे।

स्त्रोत : पर्दाफाश

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