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श्री तुलजाभवानी देवी का सोना पिघलाने की उच्च न्यायालय से अनुमति न मिलने के उपरांत प्रशासन की जिद क्यों? – हिंदू जनजागृति समिति

धाराशिव के जिलाधिकारी, राज्य के मुख्य सचिव एवं गृह सचिव को भेजा गया ‘अवमानना नोटिस’

धाराशिव/तुलजापुर : श्री तुलजाभवानी मंदिर में भक्तों द्वारा अर्पित किया गया कुल 247 किग्रा सोना और 3298 किग्रा चांदी पिघलाने का नया प्रस्ताव पारित कर मंदिर प्रशासन ने राज्य के विधि एवं न्याय विभाग से मंजूरी मांगी है। प्रशासन का दावा है कि वे केवल 2009 के बाद का सोना पिघलाएंगे; हालांकि, प्रशासन का यह दावा गलत और अदालत को गुमराह करने वाला है। उच्च न्यायालय ने 23 जनवरी 2025 को ही 2009 के बाद का सोना पिघलाने वाली प्रशासन की याचिका खारिज कर दी थी। इसके उपरांत नया प्रस्ताव पारित कर सरकार से अनुमति मांगना सीधे तौर पर अदालत की अवमानना है। इस संदर्भ में ‘हिंदू जनजागृति समिति’ की ओर से अधिवक्ता (पू.) सुरेश कुलकर्णी और अधिवक्ता उमेश भड़गांवकर ने धाराशिव के जिलाधिकारी, राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और विधि एवं न्याय विभाग के सचिव को ‘न्यायालय की अवमानना का नोटिस’ भेजा है और प्रशासन को ‘क्रिमिनल कंटेंट’ (आपराधिक अवमानना) की चेतावनी दी है।

सोना पिघलाने का हमारा प्रखर विरोध क्यों? 

दिनांक 01.01.2010 से 10.06.2023 की अवधि का सोना पिघलाने की अनुमति के लिए संस्थान ने उच्च न्यायालय में आवेदन किया था। हालांकि, 23 जनवरी 2025 को अदालत ने स्पष्ट किया था कि चूंकि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, इसलिए अंतरिम आदेश में बदलाव करना अनुचित होगा। इसके बावजूद फिर से नया प्रस्ताव पारित करना गैरकानूनी है।

8 दिसंबर 2023 को उच्च न्यायालय ने सोना पिघलाने पर रोक लगाते हुए एक गंभीर बात पर संज्ञान लिया था कि “एक भक्त द्वारा चढ़ाया गया सोने का मुकुट नकली (सोने जैसा दिखने वाला) निकला है।” मंदिर से प्राचीन 71 सिक्के, सोने का मुकुट और मंगलसूत्र पहले से ही गायब हैं। यदि खजाने के आभूषण नकली निकल रहे हैं, तो यह स्पष्ट है कि चोरी हुई है। अब बचा हुआ सोना पिघलाने से ‘नकली आभूषण किसने रखे?’ इसका सबूत नष्ट हो जाएगा और यह भ्रष्टाचार दब जाएगा।

प्रशासन का दावा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले पर स्टे (स्थगन) दिया है, लेकिन नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया स्टे केवल 8.50 करोड़ रुपये के गबन मामले के 16 दोषियों पर ‘मामला दर्ज करने’ तक ही सीमित है। इस स्टे का ‘सोना पिघलाने की अनुमति’ से कोई संबंध नहीं है। सोना पिघलाने पर उच्च न्यायालय का पिछला स्टे आज भी लागू है।

यदि जिला प्रशासन ने सोना पिघलाने के इस गैरकानूनी प्रस्ताव को तुरंत वापस नहीं लिया, तो धाराशिव के जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों पर उनकी व्यक्तिगत क्षमता में ‘क्रिमिनल कंटेंट पिटीशन’ (आपराधिक अवमानना याचिका) दायर की जाएगी, यह स्पष्ट चेतावनी हिंदू जनजागृति समिति की ओर से इस कानूनी नोटिस के माध्यम से दी गई है।

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