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तळोदा (जिला नंदुरबार) में विद्यालय की श्री गणेशमूर्ति विसर्जन मिरवणूक में मजार की प्रतिकृति नचाई !

  • मजार की प्रतिकृति नचाने वालों पर कार्रवाई न होने पर हिन्दुत्वनिष्ठों की आंदोलन की चेतावनी !

  • सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगने की मांग !

तळोदा (जिला नंदुरबार) – यहां के नेमसुशील विद्यालय ने श्री गणेशमूर्ति विसर्जन शोभायात्रा में मजार की प्रतिकृति नचाई । इस समय संबंधित बच्चों को हरे रंग के मुसलमानी वस्त्र पहनाए गए थे । इस प्रकरण से हिन्दुत्वनिष्ठ, धर्मप्रेमी तथा भक्त आहत हुए हैं एवं सकल हिन्दू समाज तथा हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने इसका निषेध किया तथा तळोदा के तहसीलदार को २३ सितंबर के दिन विविध मांगों का ज्ञापन सौंपा । मांगें पूरी न होने पर हिन्दुत्वनिष्ठों ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है ।

इस ज्ञापन में कहा गया है कि,…

१. हिन्दू धर्मशास्त्र के अनुसार किसी भी शुभ कार्य, देवता के पूजन अथवा मांगलिक समारोह में कब्र, मजार (दफ्नभूमि में मृत शरीर का स्थान या रचना) या मृत्यु से संबंधित प्रतीकों के दर्शन कराना अत्यंत तामसिक, अशुभ एवं निषिद्ध माना जाता है । शोभायात्रा में मजार की प्रतिकृति खडी कर उसके सामने प्रार्थना करने का प्रसंग दिखाया गया था, साथ ही अल्लाह को संबोधित गीत पर सीधे गणेशमूर्ति के सामने नृत्य किया गया ।

२. इस प्रकार की मजारें अथवा कब्रें गणेशोत्सव में दिखाकर नई पीढी को किस अंधकार की ओर धकेलने का यह प्रयास है ?

३. मृत शरीर से संबंधित मजार की विडंबनायुक्त छाया मंगलमूर्ति के सामने लाकर आखिर क्या साधना था ? शिवराज्याभिषेक जैसी ऐतिहासिक एवं पवित्र घटना से ऐसे काल्पनिक प्रसंगों को जोडकर इतिहास एवं परंपराओं की विडंबना किया जा रहा है । तत्कालीन ऐतिहासिक संदर्भ या बख्तरों (बखरी) में ऐसे किसी भी विधि की नोंद न होने पर भी गणेशोत्सव में यह झांकी क्यों सजाई गई ?

विद्यालय प्रबंधन चौराहे पर फलक लगाकर क्षमा मांगे ! – हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों की मांग

‘त्योहारों के मूल आध्यात्मिक एवं धार्मिक सार से छेडछाड करने का अधिकार किसी भी संस्था या व्यक्ति को नहीं है । हिन्दू समाज सहिष्णु होने पर भी, अपने आराध्य देवता की शोभायात्रा में मृत्यु तथा मजार का विकृत प्रदर्शन देखने जितना लाचार नहीं हुआ है । इस प्रकरण में विद्यालय प्रशासन तत्काल सार्वजनिक स्पष्टीकरण दे, साथ ही धार्मिक भावनाएं आहत होने के विषय में तळोदा शहर के मुख्य चौराहे पर फलक लगाकर विद्यालय प्रबंधन सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगे, भविष्य में धार्मिक उत्सवों की शोभायात्रा में इस प्रकार के आपत्तिजनक प्रदर्शन न हों, इस विषय में प्रशासन उचित सतर्कता बरते, निर्धारित समयाअवधि में क्षमा न मांगने पर विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध संवैधानिक एवं कानूनी मार्ग से तीव्र आंदोलन छेडा जाएगा, ऐसी चेतावनी हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने दी है, यह मांगें तहसीलदार को दिए गए ज्ञापन में की गई हैं ।

संपादकीय टिप्पणी
ज्ञानमंदिर कहे जाने वाले विद्यालय के स्थान पर ऐसे प्रकार होना दुर्भाग्यपूर्ण ! 'हिन्दुओं को धर्मशिक्षा नहीं है', ऐसा भले ही कहा जाए, फिर भी सीधे मुसलमानों का वेश धारण कर मजार नचाने जितना ज्ञान छत्रपति शिवाजी महाराज के महाराष्ट्र के हिन्दुओं में नहीं है, ऐसा कैसे कहा जा सकता है ?
— संपादक, हिंदू जनजागृति समिति
संपादकीय टिप्पणी
धर्मरक्षण के लिए स्पष्ट एवं कठोर भूमिका लेने वाले हिन्दुत्वनिष्ठों का अभिनंदन !
— संपादक, हिंदू जनजागृति समिति

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